Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

Uncategorized

‘फिराक और फिराक का चिंतन’ का लोकार्पण

झुंझुनूं। झुंझुनूं के प्रसिद्व साहित्यकार स्व. रेवतीलाल शाह द्वारा लिखित एवं प्रमोद शाह द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘फिराक और फिराक का चिंतन’ का लोकापर्ण भारतीय भाषा परिषद सभाकक्ष कोलकता में कल समारोह पूर्वक हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कवि डॉ. केदारनाथ सिंह ने कहा कि मैंने फिराक को काफी नजदीक से देखा हैं, वे जिस अंदाज में शेर पढ़ते थे, उस अंदाज से लोग बड़े प्रभावित होते थे। वैसे फिराक गोरखपुरी को हिंदुस्तान से ज्‍यादा पाकिस्तान में समझा गया है। उन्होंने बताया कि पुस्तक में कई ऐसी महत्पूर्ण बाते हैं, जो विद्वान पाठक, भाषा और काव्य मर्मज्ञ ही लिख तथा जान सकते हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मोहम्मद सलीम थे। जिन्होंने बताया कि प्रोद्यौगिकी का तो विकास हो रहा हैं, परन्तु आपसी संवाद खत्म हो रहे है। रेवती भाई की इस पुस्तक में हमें संदेश मिला है कि एक भाषा लोगों को जोड़ सकती हैं तो वहीं भाषा तोड़ भी सकती है।

झुंझुनूं। झुंझुनूं के प्रसिद्व साहित्यकार स्व. रेवतीलाल शाह द्वारा लिखित एवं प्रमोद शाह द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘फिराक और फिराक का चिंतन’ का लोकापर्ण भारतीय भाषा परिषद सभाकक्ष कोलकता में कल समारोह पूर्वक हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कवि डॉ. केदारनाथ सिंह ने कहा कि मैंने फिराक को काफी नजदीक से देखा हैं, वे जिस अंदाज में शेर पढ़ते थे, उस अंदाज से लोग बड़े प्रभावित होते थे। वैसे फिराक गोरखपुरी को हिंदुस्तान से ज्‍यादा पाकिस्तान में समझा गया है। उन्होंने बताया कि पुस्तक में कई ऐसी महत्पूर्ण बाते हैं, जो विद्वान पाठक, भाषा और काव्य मर्मज्ञ ही लिख तथा जान सकते हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मोहम्मद सलीम थे। जिन्होंने बताया कि प्रोद्यौगिकी का तो विकास हो रहा हैं, परन्तु आपसी संवाद खत्म हो रहे है। रेवती भाई की इस पुस्तक में हमें संदेश मिला है कि एक भाषा लोगों को जोड़ सकती हैं तो वहीं भाषा तोड़ भी सकती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र ने कहा कि लोकगीतों के प्रति फिराक की गहरी रूचि थी। वैज्ञानिक होते हुए भी रेवतीलाल शाह साहित्य के रसज्ञ थे। यह पुस्तक मानस पटल पर नई संभावनाओं को जगाती दिखाई दे रही है। विशिष्ठ अतिथि राजकमल जौहरी ने कहा कि एक वैज्ञानिक जो गणित और भौतिकी के विद्वान थे। लेकिन हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी एवं राजस्थानी भाषा पर समान अधिकार रखते थे। इस अवसर पर शायर नंदलाल ‘रोशन’ ने फिराक की गजल प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। प्रमोद शाह ने सभी का आभार जताया।

रमेश सर्राफ की रिपोर्ट.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...