अमर सिंह और मुलायम सिंह यादव के बीच अमर प्रेम की दास्तान आखिरकार क्या है? इस सवाल का जबाब तलाशने मे आज हर कोई तेजी से जुट गया है। एक समय ना चाहते हुये बडे़ अनमने ढंग से मुलायम सिंह यादव ने अमर सिंह का इस्तीफा स्वीकार करके अमर सिंह से दूरी बना ली थी, लेकिन आज अचानक मुलायम का अमर प्रेम एक बार फिर से उजागर हुआ है। यह किसी को समझ नही आ रहा है कि आखिरकार मुलायम सिंह यादव का अमर प्रेम क्यों जाग गया? मुलायम के अमरप्रेमी बयान के बाद अभी तक अमर सिंह का कोई भी बयान सामने नही आया है, इससे लग रहा है अमर सिंह और मुलायम सिंह के बीच जरूर ही कुछ ना कुछ पक रहा है।
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव आज देश की राजधानी नई दिल्ली में मीडिया से रूबरू होकर अमर सिंह का पक्ष ले रहे थे, मुलायम सिंह यादव ने 2008 में संसद में नोट दिखाये जाने के मामले में अमरसिंह का बचाव किया है। मुलायम ने कहा कि परमाणु करार मामले में उस समय केंद्र सरकार को किसी संकट से बचाने की कोशिश अमर सिंह की ओर से की गई, लेकिन आज हालात यह है कि अमर सिंह को ही इस नोट प्रकरण मे फंसाया जा रहा है, इस लिये अमर सिंह को बचाने की दिशा में जो कुछ भी किया जा सकता है अमर सिंह के लिये समाजवादी पार्टी करेगी। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने इस बयान को किस परिपेक्ष्य मे दिया यह तो आसानी से समझा जा सकता है, लेकिन मुलायम सिंह ने जिस अंदाज मे अमर सिंह का पक्ष लिया बड़ा हैरत भरा है। जब अमर सिंह और मुलायम सिंह के बीच में अलगाव हो गया है तो फिर मुलायम का अमर के पक्ष में इस अंदाज में दिये गये बयान को कई मायनों में एक बार फिर से मुलायम और अमर की दोस्ती की ओर इशारा करते हुए देखा जा रहा है।
अमर सिंह ने जब संसद में परमाणु करार मामले में नोट प्रकरण को जन्म दिया था तब अमर सिंह समाजवादी पार्टी के महासचिव हुआ करते थे, ऐसे में अमर सिंह के खिलाफ जो जांच इस समय जारी है वो अगर कायदे से होती है तो ऐसे में अमर सिंह के साथ-साथ सपा के कई सांसद जांच के दायरे में आयेंगे। सांसद रेवतीरमण सिंह से नोट प्रकरण मे पूछताछ सोमवार को करने की बात सामने आने के बाद मुलायम सिंह यादव गुस्से में दिख रहे हैं। मुलायम सिंह यादव ने जिस अंदाज में अमर सिंह का पक्ष लिया कहीं भी नहीं लगा कि अमर सिंह मुलायम सिंह से अलग हो चुके हैं। मुलायम की बयान से ऐसा लग रहा था कि मानो नोट प्रकरण में मुलायम सिंह से पूछताछ हो रही हो अमर सिंह से नहीं। मुलायम सिंह यहां तक बोल गये अमर सिंह को कांग्रेस के इशारे पर परेशान किया जा रहा है। अब मुलायम सिंह को कौन समझाये कि अमर सिंह इस समय आपके साथ नहीं बल्कि सपा से अलग हो कर लोकमंच नामक संगठन के प्रमुख हैं और मुलायम सिंह यादव के कट्टर विरोधी माने जाते हैं।
बताते चलें कि फिरोजाबाद मे अखिलेश यादव की बीबी और मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधु डिंपल यादव के पराजित हो जाने के बाद अमर सिंह और मुलायम सिंह यादव के बीच अनबन हो गई थी, जिसके बाद मुलायम सिंह यादव के भाई डा.रामगोपाल यादव से अमर सिंह की ठन गई, उसके बाद अंतत: अमर सिंह ने सपा से इस्तीफा दे दिया, जिसे मुलायम सिंह यादव ने ना चाहते हुये भी स्वीकार करके डा. रामगोपाल की बात को माना।
अब आखिर हर कोई इस बात को लेकर सोच में पड़ गया है कि आखिर अमर सिंह के पास मुलायम सिंह की ऐसी कौन सी कमजोर कड़ी है कि हर बार वे अमर सिंह के सामने नतमस्तक हो जाते हैं? अमर सिंह के बारे में कुछ बातें ऐसी है, जिसे हर कोई जानता है, उसकी चर्चा हो या नहीं लेकिन आंकलन हर कोई कर सकता है। हर कोई जानता है कि अमर सिंह राजनैतिक के रूप में उतने लोकप्रिय नहीं है जितने अमर को उनके संबधों के चलते जाना जाता है। अमर सिंह की एक सबसे बड़ी खासयित यह है कि जब भी वो किसी के खिलाफ मोर्चा खोलते हैं तो बिना सबूत के कोई तथ्य उजागर नहीं करते, लेकिन यह सबूत कहां से और कैसे जुटाये जाते हैं, यह किसी ने कभी भी जानने की कोशिश नहीं की। अमर सिंह एक राजनीतिज्ञ होने के बाद भी जिस तरह का खुफिया काम करते हैं उसे देख कर लगता है कि खुफिया विभाग को अमर सिंह से सीख लेनी चाहिये ताकि उनका खुफिया काम आसान हो जाये। ऐसी भी अफवाहें उड़ती रहती हैं कि अमर सिंह सीडी बनवाकर रिकार्ड रखने में सिद्धहस्त व्यक्ति हैं जिसका इस्तेमाल वे अपने तरह की राजनीति में करते हैं।
अब आप समझ ही गये होंगे कि अमर सिंह की इतनी तारीफ के पीछे मेरा मकसद क्या रहा होगा? असल में अमर सिंह को नेता कम ब्लैकमेलर ज्यादा समझा जाता है। जी हां बिल्कुल सही समझे आप। जबकि मुलायम के भाई डा.रामगोपाल यादव अमर के इस अमर प्रेम को बर्दाश्त नहीं कर पाये और अपना गुस्सा अमर सिंह को नसीहत देकर निकाल दिया। जैसे ही रामगोपाल के उवाच प्रकट हुये वैसे ही लोगों की जिज्ञासा भी बढ़ चली, लेकिन मुलायम ने सारे के सारे गुस्से पर पानी फेर दिया। संसद नोट कांड मे अमर सिंह के हमसफर संजीव सक्सेना के अलावा सुहेल हिन्दुस्तानी की गिरफतार के बाद इस बात की सभांवनाएं तेजी से चल निकली हैं कि अमर सिंह किसी भी समय गिरफ्तार किये जा सकते हैं।
देश के प्रमुख राजनेताओं के बीच जा रही गहमा गहमी के बीच ऐसी खबरें व्यापक हो चली हैं कि अमर सिंह के करीबी संजीव सक्सेना के तीस हजारी कोर्ट में दिए बयानों के आधार पर एक बार दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम अमर सिंह से पूछताछ कर चुकी है। बताया जा रहा है कि अमर सिंह के कहने पर ही संजीव सक्सेना 2008 में हुए विश्वास मत के दौरान बीजेपी सांसदों को करोड़ों रुपए देने गया था। इस काम में अमर सिंह का ड्राइवर भी उसके साथ था। संजीव सक्सेना ने खुद को अमर सिंह का सेक्रेटरी बताया था। नोट के बदले वोट कांड में कुछ दिन पहले कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को तगड़ी फटकार लगाई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने लगभग तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं की थी। संजीव सक्सेना की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया है कि सांसद नोट कांड में हुई फंडिग के बारे में कई अहम सुराग मिले हैं। अभी पुलिस इस मामले में संजीव सक्सेना का फोन खंगाल रही है ताकि और जानकारियां जुटा सकें।
सनद रहे कि 2008 में हुए संसद नोट कांड में बीजेपी के 3 सांसदों ने संसद में सरेआम नोट लहराए थे। इनमें अशोक अरगल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा का नाम शामिल है। देश के संसदीय इतिहास में पहली बार संसद को शर्मसार करने वाली इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे। 3 साल पूरे होने के बाद भी पुलिस यह नहीं पता लगा पाई थी कि सांसदों के पास यह पैसा कहां से आया? अमर सिंह ने इससे पहले गिरफ्तार किए गए संजीव सक्सेना से किसी तरह का कोई संबंध होने से साफ इनकार किया है, लेकिन संजीव के इस बात को खुलेआम बोल देने कि संसद में लहराने वाला धन अमर सिंह ने दिया था। इसके उलट संजीव सक्सेना खुद को उनका सचिव बता रहा था। उसने यह भी कहा था कि वह बीजेपी के सांसदों को पैसा अमर सिंह के कहने पर देने गए थे। इस काम के लिए जिस कार का इसतेमाल किया गया था वह अमर सिंह की निजी कार थी। इस काम में उनके साथ उनका ड्राइवर भी मौजूद था। संजीव सक्सेना के इस बयान के बाद अमर सिंह जरूर इस मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। जल्द ही सीबीआई उनसे पूछताछ करके इस मामले में उनकी भूमिका के बारे में खुलासा कर सकती है।
2009 में मनमोहन सरकार के विश्वास मत के समय हुए संसद नोट कांड ने अमर सिंह की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिल्ली क्राइम ब्रांच पुलिस ने यह दावा किया है कि संजीव सक्सेना ही बीजेपी के सांसदों के पास एक करोड़ रुपए के नोट लेकर गया था। उस समय उसके साथ अमर सिंह का ड्राइवर भी मोजूद था। यह वहीं कांड था जिसने विश्वास मत के दौरान सांसद को शर्मसार कर दिया था। कई सांसदों ने सरेआम सांसद में नोट लहराते हुए यह आरोप लगाया था कि उन्हें नोट के बदलने वोट देने का लालच दिया गया था।
इटावा से दिनेश शाक्य की रिपोर्ट.


