: केंद्र सरकार बाबा को तो यूपी सरकार मीडिया को निपटाने में जुटी : अगर यही लोकतंत्र है तो सच मानिए, तानाशाही इससे ज्यादा खराब नहीं होता. जिसकी सरकार, उसी की लाठी, उसी की मर्जी और उसी का राग. केंद्र सरकार और सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को बाबा रामदेव से डर लगता है इसलिए वह रामदेव की छवि खराब करने पर तुली है. रामदेव को मटियामेट करने का इरादा कर लिया है. पहले रामदेव के करीबी बालकृष्ण के खिलाफ सीबीआई जांच शुरू कराई और अब बाबा की संपत्ति के जांचने के आदेश प्रवर्तन निदेशालय को दे दिए हैं. इसी देश के एक राज्य यूपी में राज्य सरकार और सत्ताधारी बसपा ने मीडिया का गला घोंटना शुरू किया है क्योंकि मीडिया राज्य में लगातार बढ़ रहे अपराधों को बताने-सुनाने लगा है. जिन चैनलों ने डा. सचान हत्याकांड के रहस्य का पर्दाफाश किया, उन्हें राज्य में ब्लैकआउट कराया गया और अब उनके प्रतिनिधियों का अपहरण व पिटाई कराई जा रही है.
बाबा रामदेव को घेरने के लिए केंद्र सरकार सब कुछ करने को तत्पर है. बालकृष्ण के खिलाफ फर्जी पासपोर्ट मामले में सीबीआई जांच शुरू कराने के बाद अब केंद्र ने सीधे रामदेव पर हमला करते हुए उनके खिलाफ फेमा के तहत कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने अब बाबा और उनसे जुड़े संस्थानों की विदेशों में संपत्ति व निवेशों की जांच शुरू कर दी है. निदेशालय जांच कर रहा है कि रामदेव के निवेश व विदेशी मुद्रा लेनदेन में फॉरेन एक्सचेंज नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं. बाबा को इसको लेकर नोटिस भेजा जा सकता है.
निदेशालय के निशाने पर स्कॉटलैंड का एक द्वीप है जिसे रामदेव के एक भक्त ने उन्हें उपहार के तौर पर दिया. लिटिल कमब्रे नाम का यह आइलैंड स्कॉटलैंड के लार्ग्स कस्बे के पास है. यह भारत से बाहर बाबा रामदेव का बेस माना जाता है और यहीं पर रामदेव ने वेलनैस सेंटर भी खोल रखा है. बाबा रामदेव के अलावा उनके ट्रस्ट पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के निवेश और पैसों के लेनदेन पर भी कड़ी निगाह रखी जा रही है.
जांच के बाद अगर कुछ गड़बड़ी मिली तो उसके बाद यह तय किया जाएगा कि बाबा के खिलाफ फेमा के तहत केस दर्ज किया जाए या प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत. यह जांच विभिन्न आधिकारिक स्रोतों से मिले दस्तावेजों और इंटेलिजेंस जानकारी पर आधारित है. ईडी के निशाने पर सबसे पहले बाबा की दिव्य फार्मेसी है, जो सालाना करोड़ों की आयुर्वेदिक दवाइयां निर्यात करती है. आरोप है कि इन दवाओं की कीमत विदेश में जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जाती है और इसकी आड़ में विदेशों में जमा काला धन वापस लाया जाता है. ईडी निर्यात की गई दवाओं, उनकी कीमत और उनसे हुई आय का विस्तृत ब्यौरा दिव्य फार्मेसी से मांगने की तैयारी में है. संबंधित बैंकों से भी दिव्य फार्मेसी के खातों का ब्यौरा मांगा जा रहा है. पतंजलि योगपीठ की ओर से विदेशों में लगाए गए योग शिविरों और उनसे हुई कमाई की भी जांच ईडी कर रहा है.


