कांग्रेस पार्टी नेता व दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक सूरज यादव ने नितीश सरकार द्वारा प्रदेश में अपराध दर पर अंकुश लगाने हेतु राज्य गृह विभाग के वेबसाइट पर सजायाफ्ता अपराधियों के नाम और अन्य विवरण पोस्ट किये जाने के कदम को भ्रामक, हास्यास्पद और लोगों को गुमराह किये जाने की सुशासन बाबु की चाल बताया है. यह समझ से परे है कि जहाँ एक ओर आम जनता ऐसे अपराधियों से आतंकित है जो अपराध कर या तो खुले आम कानून की पकड़ से बाहर हैं अन्यथा गिरफ्तार हो कर भी सजा दिलाये जाने के लिए पुलिस के अनुसन्धान एवं न्यायिक प्रक्रिया से दूर रहने में सफल हो रहे हैं, वहीँ दूसरी ओर कई दशक पहले अपराध कर सजा पा चुके लोगों की सूची से “अपराध के क्या नागरिक परिणाम होंगे”?
प्रो. यादव ने कहा है कि उदाहरण के लिए सहरसा जिला जेल की अपराधियों की सूची में त्रिवेणी शर्मा, कारी शर्मा, ललन शर्मा, अशोक यादव, उपेन्द्र शर्मा एवं रघुनी शर्मा हैं. यह सभी १९९७ में अपराध किये थे. परन्तु अभी जो सहरसा जेल में कुख्यात अपराधी कैद हैं उनमें उमेश दहलान, शशि कुमार सिंह, मनोज यादव इत्यादि हैं. तथा राजनैतिक रूप से जाने-माने आनंद मोहन भी हैं. इनमें मनोज यादव, जो बभनी नरसंहार का मुख्य आरोपी हैं और जिस पर लगभग ५२ संगीन मामलें दर्ज हैं, जिनमें हत्या, डकैती, लूट, फिरौती आदि है. ऐसे अपराधियों की सूची अगर जारी कर एवं इन पर अप.दं.प्र. सं. धारा ११० के अंतर्गत करवाई होती है, तो आम लोगों को अपराध से कुछ राहत ज़रूर मिलेगी. अतः सरकार से उम्मीद की जाती है कि जनता को भ्रामक घोषणा परोसने की जगह अगर वास्तविक रूप से अपराध को अंकुश लगाये जाने की उपाए किये जायें तो सभी दल और आम नागरिक उसका स्वागत करेंगे.


