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बेगूसराय में मीडिया बन गई एक डॉक्‍टर की गुलाम

बेगूसराय में एक फर्जी डाक्टर द्वारा मीडिया को खरीदने का चर्चा जोरों पर है. इस डॉक्टर का नाम संजय कुमार है, जो पिछले  कई सालों से न्‍यूरो सर्जन बन कर लोगों का ऑपरेशन कर रहा था. इस डॉक्टर के यहाँ कई पत्रकार दलाली करते हैं और मरीज भी भेज रहे थे लेकिन एक डॉक्टर ने डीएम को सूचना देकर इस फर्जीवाड़े से अवगत कराया, जिसके बाद मामले की जांच की गई. जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि डॉक्टर संजय के पास कोई विशेषज्ञ की डिग्री नहीं है. रिपोर्ट कई दिनों तक दबी रही लेकिन एक दिन ईटीवी ने सीएस के हवाले से इस खबर को ब्रेक कर दिया. मामला बड़ा था लेकिन ईटीवी को छोड़ किसी मीडिया ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई. खुद को ndtv और dd न्यूज़ का रिपोर्टर कहने वाले तो इस डॉक्टर के समर्थन में ही खड़े हो गए.

बेगूसराय में एक फर्जी डाक्टर द्वारा मीडिया को खरीदने का चर्चा जोरों पर है. इस डॉक्टर का नाम संजय कुमार है, जो पिछले  कई सालों से न्‍यूरो सर्जन बन कर लोगों का ऑपरेशन कर रहा था. इस डॉक्टर के यहाँ कई पत्रकार दलाली करते हैं और मरीज भी भेज रहे थे लेकिन एक डॉक्टर ने डीएम को सूचना देकर इस फर्जीवाड़े से अवगत कराया, जिसके बाद मामले की जांच की गई. जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि डॉक्टर संजय के पास कोई विशेषज्ञ की डिग्री नहीं है. रिपोर्ट कई दिनों तक दबी रही लेकिन एक दिन ईटीवी ने सीएस के हवाले से इस खबर को ब्रेक कर दिया. मामला बड़ा था लेकिन ईटीवी को छोड़ किसी मीडिया ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई. खुद को ndtv और dd न्यूज़ का रिपोर्टर कहने वाले तो इस डॉक्टर के समर्थन में ही खड़े हो गए.

इस मामले को जब हिन्दुस्तान के संवाददाता विभूति ने अपने प्रमुख को लिख कर दिया तो डॉक्टर संजय और हिन्दुस्तान प्रमुख की बैठक के बाद इस खबर का मोल-भाव हुआ और खबर दबा दी गई. इससे आहत विभूति को अब मामले में माल खाने के आरोपों को झेलना पड़ रहा है. हालाँकि इस मामले में ईटीवी का फालो-अप रंग लाया है और डीएम ने इस फर्जी डॉक्टर से भविष्य में कभी भी कोई ऑपरेशन नहीं करने का हलाफनामा दाखिल कराया है. लेकिन बड़ा सवाल यहाँ है कि इस डॉक्टर के सामने बेगूसराय के मीडिया की हालत कुत्ते की तरह क्यों हो गई है. इसके असली चेहरे को यहाँ की मीडिया आम जनता के सामने क्यों नहीं ला रही है.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

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