नई दिल्ली : ब्राज़ील, भारत, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका ने आज प्रभावी तरीके से अमरीकी डालर के आधिपत्य को चुनौती देने का फैसला कर लिया है. ब्रिक्स शिखर सम्मलेन २०१२ के अवसर पर पाँचों देशों के विकास बैंकों के आला अफसरों ने ब्रिक्स शासन प्रमुखों की मौजूदगी में एक समझौते पर दस्तखत किया, जिसके बाद अब ब्रिक्स देश सदस्य देशों को अपनी मुद्रा में कारोबार के अवसर प्रदान करेंगे और डालर को आपसी कारोबार की सीमा से बाहर कर देंगे. यह एक बड़ी बात है क्योंकि आज ही मंज़ूर किये गए दिल्ली घोषणा पत्र में विश्व बैंक की तर्ज़ पर एक विकास बैंक स्थापित करने की बात की गयी है, जो इन देशों में कारोबार के लिए ज़रूरी बुनियादी ढाँचे के विकास को रफ़्तार देने का काम करेगा.
नई दिल्ली में गुरुवार को ब्रिक्स दशों के शासनाध्यक्षों के शिखर के बाद दिल्ली घोषणापत्र जारी कर दिया गया. इस घोषणा पत्र के जारी होने के बाद सदस्य देशों ने यह भी ऐलान कर दिया कि अब वे दुनिया के क्षितिज पर आ चुके हैं और एक नए समूह के रूप में उनको गंभीरता से लेने के सिवा बाकी दुनिया के पास कोई रास्ता नहीं है. इस अवसर पर यह भी तय किया गया कि आने वाले दिनों में उन सभी मंचों पर ब्रिक्स देशों के प्रतिनधि सक्रिय रहेंगे, जहां इनकी सदस्यता है. ख़ासकर जी-२० एक ऐसा संगठन है जिसमें ब्रिक्स के सभी सदस्य देश शामिल हैं. आज तय किया गया कि जी-२० के मंच को ब्रिक्स के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए बखूबी इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा आने वाल एक वर्ष में ऐसी बहुत सारी बैठकें होंगीं, जिनके बाद एक संगठन के रूप में ब्रिक्स को बहुत मजबूती मिलेगी.
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी. जी-२० की बैठक के दौरान ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के अध्यक्षों की बैठक होगी. ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की तीसरी बैठक को बहुत ही ज्यादा तैयारी के साथ किया जाएगा. ब्रिक्स देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा को बहुत ज्यादा प्राथमिकता देने का फैसला किया है इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जाएगा. ब्रिक्स देशों के बीच एक शहरीकरण फोरम की स्थापना की गयी है. इस वर्ष दिल्ली में उसका सम्मलेन होगा, जिसे बहुत ही गम्भीरता से लेने का फैसला किया गया. ब्रिक्स देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक का आयोजन २०१३ में किया जाएगा. विश्व बैंक की तर्ज़ पर एक ब्रिक्स विकास बैंक स्थापित करने के लिए विशेषज्ञों की एक अहम बैठक बहुत जल्द बुलाई जायेगी. ब्रिक्स रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई को समझने के लिए सदस्य देशों के वित्तीय जानकारों की बैठक बुलाई जायेगी. कुछ नए क्षेत्रों में भी आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए सम्भावनाओं की तलाश की जायेगी. ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग, ब्रिक्स युवक नीति संवाद और जनसँख्या से सम्बंधित विषयों के बारे में भी सहयोग के लिए योजना बनाने पर विचार किया जाएगा.
लेखक शेष नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. इन दिनों जनसंदेश टाइम्स के साथ रोविंग एडिटर के रुप में कार्यरत हैं.


