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भोला को नहीं भूले नीतीश, चाय पीने पहुंचे उनकी दुकान पर

पिछले कई वर्षों से पत्रकारों के अनन्य सहयोगी की भूमिका निभाने वाले मुजफ्फरपुर शहर के पुरानी धर्मशाला चौक पर पुश्तैनी चाय की दुकान चलाने वाले भोला चौधरी इन दिनों आम लोगों के आकर्षण के केन्द्र बने हुए हैं। शहर के कार्यालय विहीन समाचार पत्र व पत्र-पत्रिकाओं के और अब टीवी चैनलों के भी अघोषित कार्यालय के रूप में प्रसिद्ध यह चाय की दुकान राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं के जमावडा का स्थल भी है। इस दुकान पर चाय की चुस्की के साथ लोगों ने आपातकाल से लेकर अब तक के कई राजनीतिक दौर को न सिर्फ देखा है बल्कि उसके गवाह भी बने हैं। ऐसे ही पलों में से एक पल वह भी आया जब आपातकाल के दिनों में मिले सहयोग को याद करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सेवा यात्रा के दौरान अपने काफिले के साथ चाय दुकान पर पहुंच चाय मांग दी। इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी कि अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच मुख्यमंत्री यहां आकर चाय पीयेंगे।

पिछले कई वर्षों से पत्रकारों के अनन्य सहयोगी की भूमिका निभाने वाले मुजफ्फरपुर शहर के पुरानी धर्मशाला चौक पर पुश्तैनी चाय की दुकान चलाने वाले भोला चौधरी इन दिनों आम लोगों के आकर्षण के केन्द्र बने हुए हैं। शहर के कार्यालय विहीन समाचार पत्र व पत्र-पत्रिकाओं के और अब टीवी चैनलों के भी अघोषित कार्यालय के रूप में प्रसिद्ध यह चाय की दुकान राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं के जमावडा का स्थल भी है। इस दुकान पर चाय की चुस्की के साथ लोगों ने आपातकाल से लेकर अब तक के कई राजनीतिक दौर को न सिर्फ देखा है बल्कि उसके गवाह भी बने हैं। ऐसे ही पलों में से एक पल वह भी आया जब आपातकाल के दिनों में मिले सहयोग को याद करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सेवा यात्रा के दौरान अपने काफिले के साथ चाय दुकान पर पहुंच चाय मांग दी। इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी कि अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच मुख्यमंत्री यहां आकर चाय पीयेंगे।

खुद भोला चौधरी को भी यकीन नहीं आया कि खुद सीएम उनके सामने हैं। चाय पीने के साथ आपातकाल के दिनों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने भोला चौधरी का कुशलक्षेम पूछा फिर काफिले के साथ चले गये। इसके बाद भोला चौधरी शहर के लोगों के आकर्षण के केन्द्र बन गये हैं। अब लोग आते हैं और कौतूहल के साथ तरह तरह के सवाल ही नहीं पूछते बल्कि यह जानने की भी कोशिश करते हैं कि नीतीश कुमार से नजदीकी रहने के बाद भी भोला भाई अब तक चाय ही क्यों बेच रहे हैं, इस स्थिति से निजात दिलाने के लिए नीतीश कुमार ने कोई वादा तो नहीं किया है। इतना ही नहीं अब वैसे पत्रकार और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी भोला भाई के पास मंडराने लगे हैं जो पहले किसी कारणवश कन्नी काटते थे, लेकिन अब नीतीश कुमार के यहां या फिर सत्ता के गलियारे में अपनी पहुंच बनाना चाहते हैं। पर, भोला भाई सबको एक ही भाव से जवाब देते हैं यह तो नीतीश जी की दरियादिली ही है कि पुराने दिनों व पुराने संबंधों को वो आज भी याद किये हुए हैं, हम उनके दिल में हैं यह कम है क्या?

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