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भ्रष्‍टाचार में डूबी मायावती आरक्षण पर राजनीति कर रही हैं

लखनऊ : पूरे देश में चले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी मायावती की सरकार डरी हुई है। आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली है। यही वजह है कि वह प्रदेश में मुस्लिम व अन्य तबकों के आरक्षण के नाम पर राजनीतिक पैतरेबाजी कर रही है। यदि मुख्यमंत्री अपनी घोषणा के प्रति ईमानदार हैं तो उन्हें प्रदेश में पिछड़े मुसलमानों व अति पिछड़े हिन्दुओं को अन्य पिछड़े वर्ग के आरक्षण में अलग आरक्षण कोटा देना चाहिए और आदिवासियों के सामाजिक न्याय की गारंटी करनी चाहिए। यह बातें आज प्रेस क्लब में जन संघर्ष मोर्चा द्वारा ‘मुस्लिम आरक्षण का सवाल और मायावती सरकार का दोहरा चरित्र’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में जन संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कही। 

लखनऊ : पूरे देश में चले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी मायावती की सरकार डरी हुई है। आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली है। यही वजह है कि वह प्रदेश में मुस्लिम व अन्य तबकों के आरक्षण के नाम पर राजनीतिक पैतरेबाजी कर रही है। यदि मुख्यमंत्री अपनी घोषणा के प्रति ईमानदार हैं तो उन्हें प्रदेश में पिछड़े मुसलमानों व अति पिछड़े हिन्दुओं को अन्य पिछड़े वर्ग के आरक्षण में अलग आरक्षण कोटा देना चाहिए और आदिवासियों के सामाजिक न्याय की गारंटी करनी चाहिए। यह बातें आज प्रेस क्लब में जन संघर्ष मोर्चा द्वारा ‘मुस्लिम आरक्षण का सवाल और मायावती सरकार का दोहरा चरित्र’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में जन संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कही। 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ही कृपा से मायावती और मुलायम के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति के चल रहे मुकदमें के साथ इंसाफ नहीं हो रहा है और दोषियों को सजा नहीं मिल रही है। लेकिन यह दोनों बचेंगे नहीं और लोकपाल बिल के पारित होने के बाद उन्हें सजा मिलेगी। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए पूर्व सांसद व जन संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष इलियास आजमी ने कहा कि आजादी के बाद से मुसलमानों को कांग्रेस बेवकूफ बनाती रही वही काम आज मायावती कर रही हैं। मायावती सरकार की इस चाल को प्रदेश का मुसलमान खारिज करेगा।

सम्मेलन में पूर्व मंत्री व राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव कौशल किशोर ने कहा कि मायावती खुद जिस उत्पीड़ित समुदाय से आती हैं उसकी नहीं हुई तो वह मुसलमानों की क्या होंगी। देश का मुसलमान कैसे भूल सकता है कि मायावती ने तो गुजरात के कुख्यात मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी तक को क्लीन चिट देने का काम किया था। पूर्व आईजी एसआर दारापुरी ने संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि मायावती जिस आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत कर रही हैं वह संविधान के अनुसार सम्भव ही नहीं है।

सम्मेलन में लिए राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया कि कांग्रेस की कृपा से आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में बच रहे मुलायम और मायावती को राहत नहीं मिलेगी। अति पिछड़ों, पिछड़े मुसलमानों और आदिवासियों के सामाजिक न्याय के मामले में इन दोनों का एक ही रूख है। दोनों ने इन तबकों को सामाजिक न्याय का अधिकार देने की जगह मात्र राजनीतिक पैतरेबाजी ही की है। प्रस्ताव में कहा गया कि उप्र की जनता को मुलायम सिंह को बताना चाहिए कि अति पिछड़े और पिछड़े तबके के आरक्षण पर उनकी क्या नीति है। सम्मेलन का संचालन मोहम्मद इकबाल ने किया और शिया कालेज के पूर्व अध्यक्ष सैय्यद मजहर अब्बास रिजवी, दिनकर कपूर, रेहान खान ने भी सम्बोधित किया।

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