दिनांक २८ मार्च को गया के भूमि सुधार उपसमाहर्ता नंदकिशोर चौधरी ने मेरे उपर एक मुकदमा दर्ज किया है। उक्त अधिकारी ने अभियोग लगाया है कि मैंने उसके कार्यालय में घुसकर फ़ाइलों को फ़ेंका तथा सरकारी काम में बाधा पहुंचाई। अब मैं बताता हूं कि सच्चाई क्या है। बिहार में नगर निगम के चुनाव होने वाले हैं। मेरे घर से पचास कदम की दूरी पर मतदान केन्द्र हैं लेकिन न सिर्फ़ मेरा बल्कि सैकड़ों लोगों का नाम तथा मतदान केंद्र बूथ दो किलोमीटर दूर हरिदास सेमिनरी विद्यालय में कर दिया गया है।
मैंने एक आवेदन कल जिला निर्वाचन पदाधिकारी को दिया। उन्होंने मेरे आवेदन को भूमि सुधार उपसमाहर्ता के पास अग्रसारित कर दिया तथा मुझे कहा कि आप इसे उन्हें दे दें, जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जायेगी। मैं वह आवेदन लेकर नंदकिशोर चौधरी के पास गया। नंदकिशोर चौधरी ने पूछा कि क्या बात है, मैंने अभी यह कहना शुरू ही किया था कि मुझे जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने भेजा है, इस आवेदन को आपको देने के लिये कि उक्त नंदकिशोर चौधरी ने अचानक कहा पहले तुम ठीक से खड़ा हो। यह तुम शब्द का इस्तेमाल मुझे बुरा लगा मैंने तुरंत उनसे कहा- Mr. LRDC mind your language. This is the way to talk with a gentleman? I am not accustomed to such language and behavior.
मेरे इस जवाब पर वह गुस्सा हो गया और कहा कि बाहर जाओ, बाहर जाओ। मैंने कहा जबान संभाल कर बात करो- you have to come in the court. I will lodge case against you for your defamatory language. वह और गुस्सा हो गया तथा अपने स्टाफ़ तथा कुछ दलाल जो वहां काम कराने के लिये खडे़ थे, उनको कहा कि इसे बाहर निकालो, बाहर निकालो। वे लोग जबरदस्ती करने लगे, मैने उन्हें भी कहा- तुम सबको अपनी इस हरकत के लिये कोर्ट में आना पडे़गा याद रखना, किसी को मैं नहीं बख्शने वाला, सब को जेल जाना पडे़गा। मेरी बात पर एक-दो आदमी को छोड़कर बाकी हट गये। गुस्सा बहुत था, मैं तुरंत वापस जिला निर्वाचन पदाधिकारी के पास गया। उन्हें कहा कि आप मेरे आवेदन पर स्वंय जांच करें या किसी और से करायें, आपका डीसीएलआर बहुत बदतमीज आदमी है, भ्रष्ट भी है, मैं उसके खिलाफ़ अब लडाई लडूंगा।
मैं इसके बाद वापस घर आ गया। सीएम को ईमेल भेजने के लिये सोचा, लेकिन दूसरे दिन यानी 29 मार्च को आयुक्त गया के न्यायालय में चार अपील थी, उसकी तैयारी करनी जरुरी थी। मैं उसमें लग गया। दूसरे दिन सुबह मुझे हिंदुस्तान अखबार में छपी खबर से पता चला कि उक्त महाभ्रष्ट अधिकारी ने मेरे उपर गलत मुकदमा किया है कार्यालय में आकर के फ़ाइल फ़ेंकने का, जबकि मैंने किसी फ़ाइल को छुआ तक नहीं है। कोर्ट से मैं तीन बजे के करीब लौटा। मैंने निश्चय किया है कि पुलिस के आलाधिकारियों से बात करुंगा, ईमेल भेजूंगा और अगर जरूरत पड़ी तो अपनी गिरफ़्तारी भी दूंगा।
आपको बता दें कि वह अधिकारी करोड़ों रुपये की नाजायज संपति अर्जित कर चुका है। मेरा मकसद अब उसके भ्रष्टाचार को उजागर करना है। उसका संबंध भू माफ़ियाओं से है। सरकारी जमीन का भी दाखिल खारिज वह कर चुका है। उसके द्वारा लिये गये सारे निर्णयों की विजिलेंस या सीबीआई जांच जब तक नही हो जाती मेरी जंग जारी रहेगी। रह गई झूठे मुकदमे की बात तो मैं भी यह काम कर सकता हूं लेकिन नहीं करुंगा। हां, मेरी मांग होगी polygraph test कराने की, मेरा और उक्त भ्रष्ट अधिकारी दोनों का। भू माफ़ियाओं के साथ उसके संबध को भी उजागर करुंगा, चाहे जो कीमत अदा करनी पडे़। आज तीन बजे तक एफ़आईआर कोर्ट में नहीं आया था। एफ़आईआर की नकल लेने के बाद मैं अपनी कार्रवाई शुरू करुंगा।
मदन तिवारी
संपादक
बिहार मीडिया


