: हजयात्रियों की तरह अर्थिक सहायता देनेवाला संभवत: पहला प्रदेश बना मध्य प्रदेश : इंदौर। मध्यप्रदेश सरकार ने गजट नोटिफिकेशन कर श्रीलंका तथा कंबोडिया की तीर्थ यात्रा के लिए जाने वाले मप्र के निवासियों के लिए यात्रा व्यय का आधा खर्चा देने का प्रावधान किया है। अभी तक केवल मुस्लिम धर्मावलंबियों को ही हज यात्रा के लिए अनुदान का प्रावधान था, लेकिन म.प्र. सरकार के इस फैसले के बाद हिंदू धर्मावलंबी लाभान्वित हो सकेंगे। हजयात्रियों की तरह आर्थिक सहायता देनेवाला मप्र संभवत: देश का पहला प्रदेश बना है जहां मुस्लिमों के अलावा अन्य धर्म के लोगों को भी तीर्थयात्रा के लिए रियायत मिलने लगी है।
संभवत: देश मे पहली बार ऐसा हो रहा है कि मुस्लिम धर्मावलंबियों के अलावा किसी को तीर्थ यात्रा मे लिए कोई सहायता दी जा रही हो। अब म.प्र. के मूल निवासी रामायण व पौराणिक कथाओं में उल्लेखित श्रीलंका की अशोक वाटिका, सीता मंदिर तथा कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर का दर्शन लाभ ले सकेंगे। अभी तक हजयात्रियों को ही धार्मिक यात्रा के लिए सरकार अर्थिक सहायता देती थी लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि मप्र सरकार किसी धार्मिक यात्रा के लिए आधा खर्च खुद उठाने को तैयार है। मप्र के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने श्रीलंका के सीता मंदिर, अशोक वाटिका व अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया की यात्रा नियम 2011 बनाए है ताकि प्रदेश के यात्रियों को आर्थिक सहायता मिल सकें। राज्यपाल के अनुमोदन के बाद इस आदेश का प्रकाशन गत 13 जनवरी को मध्यप्रदेश के राजपत्र (असाधारण) में भी हो चुका है और इसी दिन से यह आदेश प्रभावी हो गया है।
कौन है पात्र
– केवल मप्र के मूल निवासी ही इस योजना के पात्र हैं।
– हर व्यक्ति, उसके जीवनकाल में केवल एक बार ही यह अनुदान राशि प्राप्त करने का हकदार होगा।
किस तरह मिलेंगी आर्थिक सहायता
यात्री को तीर्थयात्रा के बाद वास्तविक खर्चे का प्रमाणपत्र पेश करना होगा । इसके आधार पर खर्च हुई राशि का 50 फीसदी सहायता राज्य सरकार देंगी जिसकी सीमा अधिकतम 30 हजार रूपए तक होगी। सहायता राशि पाने के लिए यात्री को यात्रा समाप्त होने 60 दिन के भीतर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन विकास निगम, पर्यटन रोड, भदभदा रोड, भोपाल, म.प्र को आवेदन प्रेषित करना होगा जो जांच के बाद अनुदान राशि का भुगतान करेंगा।
पीपुल्स समाचार अखबार में राजेन्द्र कचोलिया की रिपोर्ट.


