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महिमा आश्रम की महिमा : राशन लाना, पकाना और खिलाना बच्चों की जिम्‍मेदारी

: 72 विद्यार्थियों के काल्पनिक नामों से हो रही हेराफेरी : जगदलपुर। बस्तर जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित किये जा रहे कई आश्रम शालाओं का बुरा हाल है। कहीं बच्चे हैं तो भवन नहीं है। कहीं पंचायत भवन में ही आश्रम संचालित किये जा रहे हैं। भवन है तो बच्चों का अता पता नहीं है। कहीं भवन और बच्चे दोनों हैं तो अधीक्षक और गुरुजी का महीनों से कोई अता पता नहीं है। जिला मुख्‍यालय में बैठे आला अफसर आदिवसियों के विकास के कागजी कीर्तिमान गढ़ते नहीं थक रहे हैं। पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, लेकिन इन पैसों से जो परिणाम निकल कर आने चाहिये थे वो आज तक कहीं नजर नहीं आते। संभागीय मुख्‍यालय से महज 50 किलो मीटर की दूरी पर स्थित ककनार पंचायत का एक आश्रित ग्राम है जिसका नाम है महिमा। लोहण्डीगुड़ा विकास खण्ड के इस महिमा नामक गांव में बरसों से एक 100 सीटर आश्रम शाला का संचालन किया जा रहा है। शनिवार की सुबह 11 बजे जब देशबन्धु की टीम ने इस आश्रम का मुआयना किया और यहां मौजूद बच्चों से बातें की तो कई आश्चर्यजनक बातें सामने आने लगी।

: 72 विद्यार्थियों के काल्पनिक नामों से हो रही हेराफेरी : जगदलपुर। बस्तर जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित किये जा रहे कई आश्रम शालाओं का बुरा हाल है। कहीं बच्चे हैं तो भवन नहीं है। कहीं पंचायत भवन में ही आश्रम संचालित किये जा रहे हैं। भवन है तो बच्चों का अता पता नहीं है। कहीं भवन और बच्चे दोनों हैं तो अधीक्षक और गुरुजी का महीनों से कोई अता पता नहीं है। जिला मुख्‍यालय में बैठे आला अफसर आदिवसियों के विकास के कागजी कीर्तिमान गढ़ते नहीं थक रहे हैं। पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, लेकिन इन पैसों से जो परिणाम निकल कर आने चाहिये थे वो आज तक कहीं नजर नहीं आते। संभागीय मुख्‍यालय से महज 50 किलो मीटर की दूरी पर स्थित ककनार पंचायत का एक आश्रित ग्राम है जिसका नाम है महिमा। लोहण्डीगुड़ा विकास खण्ड के इस महिमा नामक गांव में बरसों से एक 100 सीटर आश्रम शाला का संचालन किया जा रहा है। शनिवार की सुबह 11 बजे जब देशबन्धु की टीम ने इस आश्रम का मुआयना किया और यहां मौजूद बच्चों से बातें की तो कई आश्चर्यजनक बातें सामने आने लगी।

इस आश्रम में जो सबसे बड़ा विद्यार्थी है उसका नाम शिवनाथ है। शिवनाथ कक्षा पांचवीं का विद्यार्थी है और पास के ही गांव का रहने वाला है। कुल मिलाकर इस आश्रम का संचालन इसी छात्र द्वारा किया जा रहा है। बाकी बच्चे अन्य कामों में इसकी मदद करते हैं। मीलों दूर पहाड़ों का पैदल सफर तय कर यह बच्चे कोरमेल तक जाते हैं यहां से हर माह का राशन बच्चों द्वारा कांवड़ में लादकर आश्रम तक लाया जाता है। तीसरी और चौथी के बच्चे अनाज को साफ कर स्वयं भोजन तैयार करते हैं। यहां दूर-दूर तक कोई हैंडपंप नहीं है। आश्रम के सामने बह रहे नाले से पानी लाने की जिम्‍मेदारी अन्य छह बच्चों को दी गई है। आश्रम में पानी और शौचालय आदि की कोई व्यवस्था ना होने के कारण सभी बच्चों को नित्यकर्म के लिये बाहर जाना पड़ता है। बरसात के मौसम में और रात के समय अत्याधिक परेशानियों का सामना बच्चों को करना पड़ता है। बिजली की लाईन तो इस गांव तक आ चुकी है, लेकिन सप्लाई के नाम पर महीने में दो चार दिन ही बिजली रहती है बाकी दिनों में अंधेरे में रहना बच्चों की मजबूरी है।

आश्रम में मौजूद बच्चों शिवनाथ पांचवीं, प्रभु तीसरी, पोहडू चौथी, भजन दूसरी और महेश तीसरी ने बताया कि इस आश्रम के अधीक्षक राजेन्द्र भारती हैं जिनका निवास किरन्दुल में है। एक अन्य शिक्षक हैं जिनका नाम कपिल टेमुलकर है। आश्रम अधीक्षक पिछले तीन महीनों से बिना किसी सूचना के छुट्टी पर है। एक अन्य शिक्षक कपिल पिछले 15 दिनों से गायब हैं। शिक्षकों के अलावा कोई्र चौकीदार और रसोईया तक इस आश्रम में मौजूद नहीं है। बच्चों से पूछा गया कि पिछली बार शिक्षकों ने कब और क्या पढ़ाया था तो लगभग हर बच्चे ने कहा कि सत्र शुरू होने के समय जुलाई में शिक्षकों द्वारा पढ़ाई की शुरुआत कराई गई थी तबसे लेकर आज तक ब्लैक बोर्ड पर एक भी अक्षर नहीं लिखा गया है। पढ़ाई्र की स्थिति यह है कि चौथी और पांचवीं के छात्र पहली और दूसरी कक्षा के सवालों के जवाब देने में असमर्थ नज़र आये।

आश्रम शाला में बच्चों के हाजिरी रजिस्टर में लगभग 100 बच्चों के नाम विभिन्‍न कक्षाओं में दर्ज किये गये हैं जबकि आश्रम में अध्यनरत कुल बच्चों की संख्‍या 28 है। अधीक्षक के कार्यालय में रखे रजिस्टर का मुआयना किया गया तो एक वह हकीकत सामने आई जिसे देखकर आंखें हैरत से फटी की फटी रह गई। पहली से लेकर पांचवीं तक की कक्षाओं में ऐसे विद्यार्थियों के नाम लिखे गये हैं जो तीन चार साल पहले ही आश्रम छोड़ कर जा चुके हैं। पांचों कक्षाओं में करीब बीस-बीस बच्चों के नाम लगातार फर्जी तरीके से दर्शाये जा रहे हैं, जबकि बच्चों ने आश्रम में कुल 28 बच्चों के मौजूद होने की बात कही है। हर महीने 100 बच्चों का राशन हर साल सौ बच्चों के लिये कपड़े, गद्दे, गणवेश और किताबें बांटने का ढोंग इस आश्रम में पदस्थ कर्मचारी करते आ रहे हैं। ना ही बच्चों की वास्तविक संख्‍या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है और ना ही शासन को वास्तविक बच्चों की जानकारी दी जा रही है। वर्ष भर में दो चार बार यहां का हाल जानने शिक्षक यहां पहुंचते हैं बाकी दिनों में सिर्फ भगवान के भरोसे इन बच्चों की जि़दगी गुजर रही है। रजिस्टर में दर्ज बच्चों के नाम जब पढ़कर इन बच्चों को सुनाये गये तो बच्चों ने बड़ी ही मासूमियत से यह स्वीकार किया कि आधे से अधिक बच्चे तो सालों पहले यहां से जा चुके हैं।

कक्षा पहली में कुलधर, गंगाराम, सुन्दर, रामेश्वर, जगबंधु, महेश, गणेश राम, भगवती, रामेश्वरी, दूसरी कक्षा सोमारू, उमेश, दिनेश, कैलाश, नीमधर, शंकर, डमरू, धरमू, कुमार, रमेश, फूलचंद, रचना, सुलो, सुकरी, रामेश्वर, तीसरी कक्षा में मूलसाय कोर्राम, विजय, सुखनाथ, बुधनी, तपेश्वरी, सनमती, रंचनी, सुमनी, कक्षा चौथी में बलीराम, सोनाधर, कु. मेरई, धनई, अंती, रतनूराम, कक्षा पांचवीं में राजमन, नीलाराम, आसमनी, सुकमनी, जगदीश के नाम दर्ज हैं। जबकि आश्रम के विद्यार्थियों ने बताया कि यह सभी बच्चे तीन-चार सालों पहले ही आश्रम छोड़कर जा चुके हैं। शासन द्वारा इन्हें लगातार सारी सुविधाएं दिये जाने के दावे महिमा आश्रम के अधीक्षक करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार की रहनुमाई कर रहे अफसर शाहों को सब कुछ सामान्य नजर आ रहा है। बहरहाल यह महिमा इस आश्रम की नहीं है यह महिमा बस्तर के संपूर्ण आदिम जाति कल्याण विभाग की है जहां व्याप्त भ्रष्टाचार अपनी सारी सीमाएं लांघ चुका है। यह महिमा सिर्फ महिमा आश्रम की नहीं है ऐसे दर्जनों आश्रम इस जिले में फर्जी आंकड़ों के सहारे चल रहे हैं और झूठी उपलब्धियों का बखान कर जिले के अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं।

लेखक देवशरण तिवारी बस्‍तर में देशबंधु अखबार के ब्‍यूरोचीफ हैं.

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