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मानव को सेक्स मशीन बनाने की शुरुआत

लंदन : इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चिप का विकास किया है जिसे इंसान के दिमाग में फ़िट कर देने के बाद उसकी कामोत्‍तेजना अप्रत्याशित रुप से बढ़ जायेगी। हालांकि यह अभी परीक्षण काल में ही है। इस चिप का प्रयोग भी एक महिला के उपर किया जा चुका है। उक्त महिला की कामेच्छा समाप्त हो चुकी थी, इस चिप को दिमाग में बैठाने के बाद उसकी कामोत्‍तेजना में इतनी ज्यादा वृद्धि हुई कि महिला को परेशानी होने लगी और उसके दिमाग से चिप के तार को हटा दिया गया।

लंदन : इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चिप का विकास किया है जिसे इंसान के दिमाग में फ़िट कर देने के बाद उसकी कामोत्‍तेजना अप्रत्याशित रुप से बढ़ जायेगी। हालांकि यह अभी परीक्षण काल में ही है। इस चिप का प्रयोग भी एक महिला के उपर किया जा चुका है। उक्त महिला की कामेच्छा समाप्त हो चुकी थी, इस चिप को दिमाग में बैठाने के बाद उसकी कामोत्‍तेजना में इतनी ज्यादा वृद्धि हुई कि महिला को परेशानी होने लगी और उसके दिमाग से चिप के तार को हटा दिया गया।

इस चिप के उपयोग से दिमाग के उस हिस्से को क्रियाशील बनाया जा सकता है, जिसने काम करना बंद कर दिया है या फ़िर उस हिस्से की कार्य क्षमता में बढ़ोतरी की जा सकती है। पार्किंसन नामक बीमारी में इसका प्रयोग सफ़ल हुआ है और उसी से प्रेरणा लेकर अब सेक्स क्षमता में वृद्धि करने का प्रयास शोधकर्ता कर रहे हैं। हालांकि इसे नियंत्रित रखने के लिये इलेक्ट्रानिक स्विच लगाने पर भी काम चल रहा है जो वायरलेस होगा तथा जब सेक्स की जरुरत होगी उस स्विच को आन करके कामोत्‍तेजना बढ़ाने की सुविधा उपलब्ध होगी।

ब्रेन चिपआक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधार्थी अजीज का मानना है कि दिमाग के अन्य क्षेत्रों को भी क्रियाशील या ज्यादा सक्षम बनाने के लिये इसका प्रयोग किया जा सकता है। लेकिन इसके इजाद के साथ साथ विवाद भी पैदा हो गया है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इसका भी दुरुपयोग उसी प्रकार होने लगेगा जैसे नपुंसकता दूर करनेवाली दवाओं का सेक्स की क्षमता बढ़ाने और ब्लू फ़िल्मों के निर्माण में किया जा रहा है। इस चिप का दुरुपयोग से अपराध की भी संभावना वयक्त की जा रही है। यानी कामेच्छा बढ़ने की अवस्था में बलात्कार और पेड सेक्स की भी समस्या पैदा होगी।

आज नपुसंकता दूर करनेवाले वियाग्रा जैसे ड्रग का दुरुपयोग कामेच्छा बढ़ाने के लिये किया जा रहा है,  जो हार्ट के लिये बहुत ही खतरनाक है। खैर इस खोज को मानव को मशीन बनाने की शुरुआत कहा जा सकता है। वैज्ञानिक भी इस चिप के उपयोग को लेकर एकमत नहीं हैं। मिशिगन विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक केंट बेरिज का मानना है कि इसका उपयोग सेक्स की मर चुकी इच्छा को जिंदा करने और उसकी पूर्ति करने की बजाय ज्यादा सेक्स की चाह के लिये होने लगेगा। उन्होंने 1960  के दशक के मनोचिकित्सक राबर्ट हीथ के द्वारा एक होमोसेक्सुअल लड़के के दिमाग में लगाये गये इलेक्ट्राड, कोड नाम बी 19 से की है,  जिसका प्रयोग होमोसेक्सुयालिटी को दूर करने के लिये किया गया था। जिसके कारण वह लड़का एक सेक्स मशीन बन कर रह गया तथा उसे अन्य विभिन्न शारिरिक और मानसिक समस्याओं से जूझना पडा था।

इस प्रकार के चिप से सेक्स की इच्छा तो बढ़ जायेगी लेकिन क्या वाकई इसके उपयोगकर्ता को सेक्स का आनंद मिलेगा, यह प्रश्न अनुतरित है, सेक्स में आनंद का संबंध स्खलन से है और स्खलन का संबंध दिमाग की बजाय शारिरिक क्षमता से है। खैर अब जब यह चिप्स आ ही रहा है तो इसकी मांग भी जोरदार होगी। वैज्ञानिकों ने निर्माताओं से इसकी कीमत कम रखने का अनुरोध किया है।

मदन कुमार तिवारी की रिपोर्ट.

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