उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेताविरोधी दल और समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता शिवपाल सिंह यादव का कहना है कि उप्र में लोकतंत्र और संविधान दोनों को किनारे रख दिया गया है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। राज्य में मायावती प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चल रही है। जिसका काम व्यापार करना, मुनाफा कमाना और घरेलू जायदाद बढ़ाना है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनउ मे समाजवादी पार्टी कार्यालय में आज संवाददाओं से बात करते हुये उक्त कंपनी ने प्रदेश में हर विभाग में, हर निर्माण कार्य में और हर योजना में अपनी हिस्सेदारी तय कर रखी है। पूंजीघरानों को काम बंट रहे हैं। उसमें मोटा कमीशन तय रहता है।
श्री यादव ने कहा कि इस कंपनी सरकार को महाघोटालों की सरकार कहा जा सकता है क्योंकि चार साल में इसके अलावा कुछ किया ही नहीं है। यदि जाँच हो तो अब तक हुए सभी बड़े घोटालों, बोफोर्स, टू-जी स्पेक्ट्रम, कामनवेल्थ गेम्स को मिलाकर उससे भी बड़ा महाघोटाला सामने आएगा। मुख्यमंत्री ने अपने को प्रदेश की महारानी समझ लिया है और वे राजकोष को अपनी सनक पर लुटा रही हैं। सरकार कर्ज में डूबी हुई है। खजाना खाली है। प्रदेश कंगाल हो गया है। श्री यादव का खुला आरोप है कि मुख्यमंत्री को इंसानों की सुरक्षा, महिलाओं, बच्चियों की इज्जत, प्रदेश के विकास, बिजली-पानी उपलब्ध कराने, किसानों को खाद-बीज दिलाने, गरीबों, मुस्लिमों, पिछड़ों को पढ़ाई की सुविधा तथा छात्रवृत्ति मुहैया कराने में दिलचस्पी नहीं, उन्हें पत्थरों से बेहद प्रेम है। लखनऊ, नोएडा और बुलन्दशहर में सिर्फ पत्थरों पर उन्होंने 40 हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं।
सपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने सात स्मारकों, पार्को में बनी अपनी मूर्तियों की सुरक्षा के लिए जनता की गाढ़ी कमाई लुटाने जा रही है। इनके रख रखाव के लिए करोड़ों रुपए खर्च करेगी। अब तक ऐतिहासिक स्थल संरक्षित घोषित होते रहे हैं। सुश्री मायावती अपने जिंदा रहते ही अपने को इतिहास में संरक्षित रखने को बेचैन हैं। अपनी मूर्तियों पर लगी धूल पोंछने के लिए विशेषज्ञ रखने जा रही हैं। वे भूल जाती हैं कि समय की धूल के नीचे न जाने कितनी बड़ी-बड़ी हस्तिया दबी हुई हैं। मुख्यमंत्री का मोटा कमीशन सभी विभागीय योजनाओं और निर्माण कार्यो में सुरक्षित है। जननी सुरक्षा योजना, कांशीराम आवास योजना, वृक्षारोपण, महामाया योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण, स्वास्थ्य मिशन, बाल विकास पुष्टाहार, परिवार कल्याण, मनरेगा, सिंचाई, लोकनिर्माण, आबकारी, आवास, खनिज, ऊर्जा, नगर विकास सहित सभी विभागों में वित्तीय घपले हो रहे हैं। कई विभागों में अक्षम व्यक्तियों की भारी तादाद में नियुक्तिया की गई हैं।
श्री यादव का कहना है कि खाद्य रसद महकमें में राज्य स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक अनियमितताओं पर पर्दा डाला जा रहा है। स्टेट पूल में खाद्यान्न सत्यापन कार्य की अवधि बीते हुये 9 माह हो गये अभी तक यह शुरू नहीं हो पाया है। हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने दलित मुख्यमंत्री की दौलत की सनक पर अपने कई निर्णयों में टिप्पणियां की हैं। ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि गरीबों के नाम पर बड़े बिल्डरों को किसानों की जमीन जबरन छीनकर सौंपी गई है। नोएडा में फार्म हाउस आवंटन और हाई टेक सिटी घोटाला भी सरकार ने किया है।
श्री यादव ने मायावती पर खुला आरोप लगाते हुये कहा कि सरकारी संपत्ति बेचकर अपनी तिजोरी भरने के लिए मुख्यमंत्री ने चीनी मिलें, पावर प्लांट, पर्यटन गृह और होटल तथा अस्पतालों तक की सूची बना ली है और बड़े पूंजी घरानों को बेचने की तैयारी कर रही है। एनआरएचएम योजना के अन्तर्गत अनावश्यक रूप से स्टाफ उपलब्ध न होने के बावजूद लगभग 700 एम्बुलेंस खरीदी गयी, उनकी डिलीवरी आज तक विभाग द्वारा नहीं ली गयी। गाड़िया शोरूम में ही खड़ी-खड़ी सड़ रही हैं। खरीद में मोटी कमीशनखोरी हुई है। पीएचसी एवं सीएचसी अस्पतालों में 10 हजार क्षमता के विपरीत 32 हजार बेड खरीद कर मोटा कमीशन खाया गया। पीएचसी एवं सीएचसी के निमार्ण कार्यों में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। इसके कारण कई जगह बिल्डिगें गिरने लगी हैं। विगत चार वर्षो में एनआरएचएम योजना के अन्तर्गत लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की धनराशि प्रदेश को प्राप्त हुई, जिसमें से लगभग 50 प्रतिशत धनराशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। प्रदेश सरकार एनआरएचएम की जांच सीएजी से कराकर उसे लटकाना चाहती है। जब प्रकरण में भ्रष्टाचार और आपराधिक कृत्य मौजूद है तो उसकी सीएजी जाँच कैसे कर सकता है? इसलिए चार वर्ष के महाघोटाले की जांच सीबीआई से होना आवश्यक है।
श्री यादव ने पूरे राज्य के आकड़ों को जमा करने के बाद कहा कि पूरे प्रदेश में सीवर लाइन बिछाने के लिए प्रदेश को केन्द्र सरकार से लगभग 4 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुआ था। मोटा कमीशन लेकर चहेते ठेकेदारों को कार्य आबंटित किया गया। कार्य अभी तक अपूर्ण है, जिसके कारण लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी सहित लगभग पूरे प्रदेष में सड़कें खुदी पड़ी हैं। वर्षा में आये दिन लोग उसमें गिर रहे हैं, दुर्घटनाएं हो रही हैं। धान किसानों की तकलीफों का जिक्र करते हुये श्री यादव ने कहा कि धान एवं गेंहू की खरीद में पिछले चार वर्ष में केन्द्र सरकार से प्रति वर्ष लगभग 2 हजार करोड़ रुपया यानी कुल 8 हजार करोड़ की सब्सिडी प्राप्त हुई, जो पूरी की पूरी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी। विन्ध्याचल पहाड़ी को लगभग 40 किमी तक पूरा खोद डाला गया। कई पहाड़ियों का नामोनिशान मिट गया। प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण एक तरफ तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा और दूसरी तरफ खनन में भी भ्रष्टाचार किया गया। अवैध खनन में मुख्यमंत्री के परिवारीजन शामिल हैं।
श्री यादव ने कहा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई निर्णयों से बसपा सरकार की जन विरोधी, किसान विरोधी और गरीब विरोधी नीतियों को तथा उसके भ्रष्टाचार को उजागर किया है और बड़े बिल्डरों तथा पूंजी घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए फटकार लगाई है। समाजवादी पार्टी इस न्यायिक सक्रियता का स्वागत करती है और इस बात पर दुःख एवं चिंता जताती है कि जनहित के ऐसे तमाम मामले महामहिम राज्यपाल के संज्ञान में लाए जाने पर भी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। सरकार को बर्खास्त नहीं किया। केन्द्र सरकार की तमाम बड़ी योजनाओं का कार्यान्वयन न होने से चार साल में हजारों करोड़ रुपए की राशि खर्च न होने से वापस हो गई। प्रदेश में चल रही केन्द्रीय योजनाओं की स्थिति पर एक श्वेतपत्र प्रकाशित किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश के पारित बजट के तमाम मदों का दूसरे कार्या के लिए अंतरण (डायवर्जन) कर सरकार ने फिजूलखर्ची की है। किस मद का पैसा किस मद पर खर्च हुआ इसका पूरा विवरण श्वेतपत्र में प्रकाशित किया जाए। श्री यादव ने कहा कि उप्र की जनता तमाम समस्याओं और सरकार के मंत्रियों/विधायकों द्वारा भ्रष्टाचार, अत्याचार तथा बलात्कार की घटनाओं से पीड़ित है, क्षुब्ध हैं। कानून व्यवस्था भंग है। इस सब पर विचार के लिए विधानसभा का सत्र एक माह तक चलाया जाना चाहिए।
इटावा से दिनेश शाक्य की रिपोर्ट.


