बदायूं। जिला सूचना कार्यालय में 30 मई पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार बीपी गौतम ने कहा कि पत्रकार समाज का दर्पण हैं, जो समाज की बुराइयों को जनसामान्य के सामने रखता है। पत्रकारिता ही वह एक मात्र हथियार है, जो अंहिसा पर आधारित रहते हुए जनसामान्य की लड़ाई लड़ता है। पत्रकार का यही मुख्य दायित्व है कि यदि वह समाज की बुराइयों को पेश करे, वहीं दूसरी ओर समाज का आईना भी प्रस्तुत करे।
इसे विडंबना ही कहा जायेगा कि आज राजनैतिक प्रतिद्वंदता तथा भ्रष्टाचार के कारण ही समाज को छिन्न-भिन्न कर दिया है। आज समाज के गरीब तबके उसकी समस्याओं, उसी परेशानियों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। हर तरफ अफरा-तफरी का वातावरण है। चाहे वह राजनेता हो, अधिकारी वर्ग हो, समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति हों, अपनी दबंगई और वर्चस्व को समाज के सामने हर कीमत पर रखना चाहता है, चाहे इसके लिए उसे गरीब जनता की रोजी-रोटी छीनना हो, उसका खून बहाना हो, उसके लिए यह सब बातें कोई मायने नहीं रखती हैं। जब तक पत्रकार जगत स्वर्गीय गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे सरीखों पत्रकार के आदर्शों को अपने जीवन में नहीं अपनायेगा, तब तक यह अराजकता और परवान चढ़ती जायेगी। स्वर्गीय गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपने जीवन में इन बुराइयों से लड़ने का दंभ साहस किया। हालांकि उन्हें इसकी सजा अपनी मौत के रूप में मिली, परंतु मरते दम तक उन्होंने अपने आदर्शों का त्याग नहीं किया।
गोष्ठी में सोहन पाल साहू, प्रवीन गुप्ता, ओमप्रकाश मौर्य, आफाक हुसैन, डा. रामप्रकाश शास्त्री, ओमप्रकाश ओमी, मुन्ना बाबू शर्मा, आशु बंसल, मो. नईम, दिलीप सक्सेना, कामिल मजीद सिददीकी, धारम सिंह, डा. शैलेन्द्र कबीर, प्रवीन्द्र प्रताप सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कहा कि सभी को पत्रकारिता दिवस के अवसर पर दृढ़ संकल्प लेना चाहिए कि स्वर्गीय गणेश शंकर विद्यार्थी के विचारों, आदर्शों, मार्ग दर्शन को अपने जीवन में उतारते हुए पत्रकारिता के क्षेत्र में पत्रकारिता के बल पर साफ-स्वच्छ विचारों को जनसामान्य के सामने रखेंगे। गोष्ठी का संचालन अपर जिला सूचना अधिकारी यामीनुल रशीद ने किया। इस अवसर पर पत्रकारों के अलावा सूचना कार्यालय के मो. अगराज खान, उमाशंकर भारद्वाज, सरन लाल, नसीम मियां, नंदराम सोमेन्द्रपा सिंह उदय राज सिंह आदि मौजूद रहे।


