Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

Uncategorized

मैं आता हूँ प्रतिवर्ष

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन मैं आता हूँ प्रतिवर्ष।
जी हाँ मुझको कहते हैं नव वर्ष॥
भरता हूँ नव जीवन सबमें,
विमल उमंग उत्कर्ष।
जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन मैं आता हूँ प्रतिवर्ष।
जी हाँ मुझको कहते हैं नव वर्ष॥
भरता हूँ नव जीवन सबमें,
विमल उमंग उत्कर्ष।
जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥

1) मैं वसंत का प्राण निराला।
कर देता सबको मतवाला।
मुझसे सबको हर्ष॥
जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥

2) नहीं ग्रीष्म में नहीं शीत में।
वीणा के मैं मधुर गीत में।
गाता हूँ प्रतिवर्ष॥
जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥

3) धरती करती मेरा स्वागत।
ओढ़ चूँदरी करती आरति।
बैठ योगिओं ॠषि मुनिओं में।
ध्याता हूँ प्रतिवर्ष॥
जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥

4) सभी फूल मुझसे हैं रिझाते।
पक्षी भी पिउ-2 कर गाते।
सिखलाता हूँ प्रतिवर्ष॥
जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥

5) वीरों की मैं याद दिलाता।
जन्म और निर्वाण मनाता।
होकर नव कुछ नव कर जाओ।
दोहराता हूँ प्रतिवर्ष॥
जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥

6) मुझको प्यारे भूल न जाना।
पश्चिम में तुम झूल न जाना।
सदा रहा हूँ सदा रहूँगा।
चाहे हो संघर्ष॥
जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥

कवि विमलेश बंसल संतनगर ईस्‍ट ऑफ कैलाश दिल्‍ली के निवासी हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...