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मोदी और केजरीवाल का जंगः आप विधायकों की बैठक, विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया

मोदी और केजरीवाल का जंगः  आप विधायकों की बैठक, विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया

दिल्ली आखिर किसकी? उपराज्यपाल की या फिर मुख्यमंत्री की? किसका राज होगा दिल्ली पर? क्या कहता है संविधान? केजरीवाल क्यों हैं परेशान? कोर्ट कचहरी की जरूरत क्यों? ये वो सवाल हैं जो दिल्ली समेत पूरे देश के दिल में हैं। आखिर क्या हैं इन सवालों के जवाब?
सीएम केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच अदावत किसी से छुपी हुई नहीं है। हाल ये हैं कि अधिकारों की ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने वाली है।
माना जा रहा है कि गृह मंत्रालय से जारी अधिसूचना पर चर्चा करने के लिए आप विधायक को सीएम केजरीवाल के घर बैठक कर सकते हैं। इस बैठक में ये चर्चा होगी कि किस तरह केंद्र को घेरा जाए और सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए या नहीं।
यहां यह भी बताना ज़रूरी है कि केजरीवाल सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया है।

मोदी और केजरीवाल का जंगः  आप विधायकों की बैठक, विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया

दिल्ली आखिर किसकी? उपराज्यपाल की या फिर मुख्यमंत्री की? किसका राज होगा दिल्ली पर? क्या कहता है संविधान? केजरीवाल क्यों हैं परेशान? कोर्ट कचहरी की जरूरत क्यों? ये वो सवाल हैं जो दिल्ली समेत पूरे देश के दिल में हैं। आखिर क्या हैं इन सवालों के जवाब?
सीएम केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच अदावत किसी से छुपी हुई नहीं है। हाल ये हैं कि अधिकारों की ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने वाली है।
माना जा रहा है कि गृह मंत्रालय से जारी अधिसूचना पर चर्चा करने के लिए आप विधायक को सीएम केजरीवाल के घर बैठक कर सकते हैं। इस बैठक में ये चर्चा होगी कि किस तरह केंद्र को घेरा जाए और सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए या नहीं।
यहां यह भी बताना ज़रूरी है कि केजरीवाल सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया है।

केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच तनातनी सुप्रीम कोर्ट तक खिंच सकती है। संविधान विशेषज्ञों से मशविरे के बाद दिल्ली सरकार इसकी तैयारी में है। इस फैसले पर विधानसभा की मुहर लगवाने के लिए 26 और 27 मई को दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है।
इस विशेष सत्र में पूर्व महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम और संविधान विशेषज्ञ केके वेणुगोपाल द्वारा दिल्ली सरकार को दी गई सलाह पर खास चर्चा होगी। इन दोनों ने अपनी राय में केंद्र द्वारा जारी उस अधिसूचना को असंवैधानिक ठहराया था, जिसमें भूमि, सेवा और पुलिस जैसे विषयों पर एलजी को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार होने की बात कही गई थी।
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली सरकार ने कई दूसरे संविधान विशेषज्ञों की राय भी ली है। पिछली सरकारों का वह रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है, जिसमें एलजी व सीएम के बीच शक्तियों के बंटवारे पर कोई प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया हो।

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