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याहू, गूगल, फेसबुक, ट्विटर आदि नियमों का पालन करें : हाई कोर्ट

: आईपीएस अमिताभ ठाकुर एवं नूतन ठाकुर ने दायर की याचिका : आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में याहू, गूगल, फेसबुक, ट्विटर आदि जैसे सर्विस प्रोवाइडर द्वारा नियमों का पालन नहीं करने के सम्बन्ध में रिट याचिका संख्या 9359/2012 दायर किया गया. बुधवार को जस्टिस उमा नाथ सिंह और जस्टिस वीके दीक्षित की बेंच ने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार मंत्रालय, भारत सरकार को आदेशित किया है कि यह सुनिश्चित करें कि सभी सर्विस प्रोवाइडर द्वारा तीन माह में इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी (इंटरमिडीएरी गाइडलाइन्स) नियम 2011 के नियम 3 तथा 11 का पूर्ण पालन किया जायेगा. नियम तीन में इन सर्विस प्रोवाइडर को अपने वेबसाईट पर यह स्पष्ट करना होता है कि उसके उपभोक्ता किस प्रकार की बातें नहीं लिख या प्रसारित कर सकते. नियम 11 के अनुसार प्रत्येक सर्विस प्रोवाइडर को अपने वेबसाइट पर एक या अधिक शिकायत अधिकारियों के नाम और उनके संपर्क पते प्रकाशित करना अनिवार्य है. 

: आईपीएस अमिताभ ठाकुर एवं नूतन ठाकुर ने दायर की याचिका : आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में याहू, गूगल, फेसबुक, ट्विटर आदि जैसे सर्विस प्रोवाइडर द्वारा नियमों का पालन नहीं करने के सम्बन्ध में रिट याचिका संख्या 9359/2012 दायर किया गया. बुधवार को जस्टिस उमा नाथ सिंह और जस्टिस वीके दीक्षित की बेंच ने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार मंत्रालय, भारत सरकार को आदेशित किया है कि यह सुनिश्चित करें कि सभी सर्विस प्रोवाइडर द्वारा तीन माह में इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी (इंटरमिडीएरी गाइडलाइन्स) नियम 2011 के नियम 3 तथा 11 का पूर्ण पालन किया जायेगा. नियम तीन में इन सर्विस प्रोवाइडर को अपने वेबसाईट पर यह स्पष्ट करना होता है कि उसके उपभोक्ता किस प्रकार की बातें नहीं लिख या प्रसारित कर सकते. नियम 11 के अनुसार प्रत्येक सर्विस प्रोवाइडर को अपने वेबसाइट पर एक या अधिक शिकायत अधिकारियों के नाम और उनके संपर्क पते प्रकाशित करना अनिवार्य है. 

 

अमिताभ और नूतन ने इससे पूर्व भी इस विषय पर एक रिट याचिका दायर किया था जिसमे जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस सईद उज-जमा सिद्दीकी की बेंच ने 09 मई 2012 के अपने आदेश द्वारा इन नियमों का पालन कराने के आदेश दिये थे. चूँकि सर्विस प्रोवाइडरों द्वारा उस आदेश का पालन नहीं किया गया, अतः याचीगण द्वारा यह दूसरी याचिका दायर की गयी. यदि सर्विस प्रोवाइडर इन नियमों का पालन करने लगेंगे तो इससे इन्टरनेट उपभोक्ताओं को भारी राहत मिलेगी और उन्हें अपनी शिकायत दर्ज कराने और आपत्तिजनक बातों पर ऐतराज प्रकट करने में बहुत सुविधा मिलेगी.

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