प्रदेश सत्ता की कमान सबसे युवा चेहरे को दी जा रही है। इस फैसले से सूबे की राजननीति युवाओं के हाथ में होगी। अखिलेश को प्रदेश का सीएम बनाने के पीछे मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी की सियासत चाहे जो भी हो। लेकिन यह एक ऐतिहासिक फैसला है। समाज बदलाव की ओर बढ़ रहा है। सपा ने सही समय पर उचित फैसला लिया है। निश्चित तौर पर सूबे के विकास और उसकी सियासत पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा। लेकिन आतंरिक तौर पर यह फैसला कहीं न कहीं से सपा की घरेलू राजनीति और मुलायम की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को साबित करती दिखती है।
युवराज अखिलेश की ताजपोशी से मुलायम सिंह ने कई निशाने साधे हैं। नेताजी की बढ़ती उम्र और परिवार में ही राजनीतिक दावेदारी को लेकर उठने वाले सवाल को उन्होंने हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। यूपी में जब भी सपा की बहुमत वाली सरकार आयी तो निश्चित तौर पर शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल, अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के नाम पर आजम खां का नाम खत्म हो जाएगा। एक बार पिता की विरासत संभालने के बाद अखिलेश का हर फैसलों पर दखल होगा। पार्टी में जहां युवा लाबी अखिलेश को पसंद करेगी। वहीं किसी अहम फैसले में मुलायम सिंह की दखलंदाजी तो अहम होगी ही साथ ही किसी ऐसे मोड पर अखिलेश की आड़ लेने के लिए भी मुलायम सिंह विवश नहीं होंगे। मीडिया में अभी तक जो मंत्रिमंडल के कैबिनेट मंत्रियों की लिस्ट आयी है। उसमें युवा चेहरे अधिक दिखते हैं, जो अपने क्षेत्र के महारथी हैं। यूपी के चुनावों में युवाओं ने खूब वोटिंग किया। लिहाजा यहां की कमान किसी युवा को भेंट किया जाना बदली सोच का नजरिया है। युवा और महिलाओं के नाम पर संसद और विधान सभाओं के अलावा मंचों पर राजनीति करने वालों को सपा ने करारा जबाब दिया है।
दूसरे दलों को समाजवादी पार्टी ने काफी पीछे ढकेल दिया है। नए सीएम से युवाओं को काफी उम्मीद हैं। 35 साल के ऊपर के लोगों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाना एक नयी सोच प्रदर्शित करती है। क्योंकि आम तौर पर 30 साल तक आज का युवा कैरियर बनाने में लगा रहता है। चुनाव के बाद मिला सपा को भारी बहुत ने कांग्रेस युवराज राहुल गांधी बनाम सपा युवराज अखिलेश बना दिया है। सूबे का सियासी परिणाम आने के बाद मीडिया में राहुल गांधी और छोटे चौधरी जयंत को फेल करार दिया। ऐसे में सूबे के औद्योगिक विकास और युवाओं के गैर प्रांतों में पलायन को रोकने की जिम्मेदारी भी अखिलेश की होगी। राज्य के संसाधनों से उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाना होगा। अब तक सपा पर यूपी को उपद्रव प्रदेश बनाने का दाग लगा है। इसे धोना होगा। सपा के गुंडाराज से ही परेशान जनता ने बसपा को जनादेश दिया था। वहीं नीति बसपा पर लागू हुयी। अब ऐसी स्थिति में सपा को अपनी खोयी छवि सुधारनी होगी। कांग्रेस युवराज के उस बयान का भी मुहंतोड जबाब देना होगा जिससे कि यहां के युवा गैर प्रांतो में रोजगार के लिए न भटकें। अपनी प्रदेश में ही आर्थिक आय का जरिया तलाशे।
बदले की राजनीति के बजाय एक ऐसी बयार बहनी चाहिए, जिससे उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाया जा सके। लोहियावादी विचारधारा की युवा सोच को लालटोपी की साख बचानी होगी। वरना एक फेल सीएम का ठप्पा लग जाएगा। थोपी गयी नीतियों के बजाय खुद निर्णय लेना होगा। रिमोट कंट्रोल सीएम बनने से बचना होगा। चुनावों के दौरान जनता को दिए गए लालीपाप को भी परिणति में बदलना होगा। ऐसा न हो कि जनता-जनार्दन का भरोसा टूट जाय। इसका भी खयाल रखना होगा। सीएम का ताज सिर पर रखने भर से सूबे में अराजकता का अंत नहीं होगा। इसके लिए एक साफ-सुधरी राजनीतिक पहल जरुरी होगी।
लेखक प्रभुनाथ शुक्ला स्वतंत्र पत्रकार हैं.


