सोनिया गाँधी को गलत राय देने वाले कनखजूरों को एक बड़ा झटका लगा, जब उन्हें उत्तराखंड की राज्यसभा की एक मात्र सीट के लिए उत्तराखंड के माहारा को चुनना पडा. इसका श्रेय उत्तराखंड की जनता तथा काफी हद तक उत्तराखंड क्रान्ति दल के एक मात्र विधायक पंवार तथा तीन निर्दलीय विधायकों को जाता है, जिन्होंने राज्य सभा के लिए स्थानीय व्यक्ति को चुनने की बात मजबूती से रखी. वरना दिल्ली में बैठे सत्ता के कांग्रेस के दलाल तो मध्य प्रदेश के सुरेश पचौरी से दावतें उड़ा चुके थे. उधर भाजपा ने भी कांग्रेस की आपसी लड़ाई को देखकर बाहरी लोगों को ढूँढना शुरू कर दिया था, जिसमे राजस्थान के उद्योगपति कमल मोरारका को तैयार रहने को कह दिया गया था. उन्हें विधान सभा चुनाव में…खंडूरी.. तो जरूरी लगे… पर उनका नाम राज्य सभा के लिए….पार्टी ने लेना भी गंवारा नहीं समझा!!
लेखक विजेंद्र रावत उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार हैं.


