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राजनेताओं और नौकरशाहों के लिए दुधारू गाय बन गई हैं गंगा

राम तेरी गंगा मैली हो गई….पापियों के पाप धोते-धोते……!! आपने राजकपूर की फिल्म …राम तेरी गंगा मैली…..का ये खुबसूरत गाना सुना होगा…यह गाना गंगा की चिंता करने वाले आज के हुक्मरानों के प्रति सटीक बैठ रहा है…. जो भी गंगा के लिए कुछ करने का दंभ भरता है वह उससे ले लेता है और इस अमृतमई जल में भ्रष्टाचार की गंदगी को और मिला देता है. जहां दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए गंगा, मां और आस्था की देवी है वहीं नेताओं, नौकरशाहों व बड़े-बड़े आश्रमधारियों के लिए यह एक ऐसी दुआरु गाय बन गई है जिसे बिना चारा दिए जमकर दुहा जा रहा है और इस कृत्य से यह गाय कंकाल के रूप में तब्दील हो गई है, पर हुक्मरानों को इसकी चिंता नहीं है…. देश की सर्वोच्च संवैधानिक जांच संस्था, केंद्रीय महालेखा परीक्षक ने गत वर्ष हरिद्वार में हुए कुम्भ मेले में जिस प्रकार के घोटालों की परतें खोली है और राज्य सरकार की नीयत पर शक जताया है. यह उत्तराखंड सहित पूरे देश को शर्मशार करने के लिए काफी है.

राम तेरी गंगा मैली हो गई….पापियों के पाप धोते-धोते……!! आपने राजकपूर की फिल्म …राम तेरी गंगा मैली…..का ये खुबसूरत गाना सुना होगा…यह गाना गंगा की चिंता करने वाले आज के हुक्मरानों के प्रति सटीक बैठ रहा है…. जो भी गंगा के लिए कुछ करने का दंभ भरता है वह उससे ले लेता है और इस अमृतमई जल में भ्रष्टाचार की गंदगी को और मिला देता है. जहां दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए गंगा, मां और आस्था की देवी है वहीं नेताओं, नौकरशाहों व बड़े-बड़े आश्रमधारियों के लिए यह एक ऐसी दुआरु गाय बन गई है जिसे बिना चारा दिए जमकर दुहा जा रहा है और इस कृत्य से यह गाय कंकाल के रूप में तब्दील हो गई है, पर हुक्मरानों को इसकी चिंता नहीं है…. देश की सर्वोच्च संवैधानिक जांच संस्था, केंद्रीय महालेखा परीक्षक ने गत वर्ष हरिद्वार में हुए कुम्भ मेले में जिस प्रकार के घोटालों की परतें खोली है और राज्य सरकार की नीयत पर शक जताया है. यह उत्तराखंड सहित पूरे देश को शर्मशार करने के लिए काफी है.

सीएजी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि कुम्भ की तैयारियों में 223 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. इस पैसे को गलत व मनमाने तरीके से खर्च किया गया या ये कहें कि जनता के इस पैसे की लूट हुई है! रिपोर्ट में कहा गया है कि कुंभ की तैयारियों में राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में आपस में समन्वय का बेहद अभाव था और इन्होंने अपने अपने काम में जमकर अनियमितताएं बरती. 180.07 करोड़ के 54 निर्माण कार्य कुम्भ मेले के दौरान भी अधूरे रहे और इन पर अनाप-सनाप पैसा खर्च किया गया. 311 कार्यों में से मात्र 82 कार्य ही मेले के समय तक पूरे हो पाए थे तथा 43 अतिरिक्त कामों की उचित मंजूरी नहीं ली गई थी. बिना काम किये ही कई ठेकेदारों को एडवांस पेमेंट कर दिया गया. रिपोर्ट में शक जाहिर किया गया कि कई काम देर में शुरू करने के पीछे यह मनसा जाहिर होती है कि कुंभ मेले के लिए जरूरी जल्दबाजी में पैसे की लूट हो सके? सीएजी ने कई और अनियमितताओं की चर्चा की है जो महाकुंभ को घोटालों का महाकुंभ बनाने की ओर इशारा करता है.

लेखक विजेंद्र रावत उत्‍तराखंड के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं.

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