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राबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ी : एक और आरोप लगा, पीआईएल अदालत में मंजूर

यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ इलाहबाद हाइकोर्ट में दायर एक अर्जी मंजूर कर ली गई है। अर्जी रॉबर्ट वाड्रा पर लगे आरोपों की जांच के लिए सामाजिक कार्यकर्ता डा. नूतन ठाकुर ने दाखिल की थी। इस मामले की सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।

यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ इलाहबाद हाइकोर्ट में दायर एक अर्जी मंजूर कर ली गई है। अर्जी रॉबर्ट वाड्रा पर लगे आरोपों की जांच के लिए सामाजिक कार्यकर्ता डा. नूतन ठाकुर ने दाखिल की थी। इस मामले की सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।

याचिका में मांग की गई है कि प्रधानमंत्री कार्यालय अरविंद केजरीवाल की तरफ से लगाए गए आरोपों की जांच का आदेश दे। याचिका के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ की सफाई के बाद भी कई सवाल बने हुए हैं जिनके जवाब मिलने जरूरी हैं। गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ से ब्याज मुक्त कर्ज और अन सिक्योर्ड लोन लेने का आरोप लगाया था। साथ ही उन्होंने डीएलएफ और हरियाणा सरकार के बीच सांठगांठ होने का दावा किया था।

इस बीच, जानकारी मिली है कि वाड्रा ने मेवात में कौड़ियों के भाव जमीन खरीदकर उसे करोड़ों में बेच दिया. इस प्रकरण के कारण सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर जमीन से जुड़ा एक और विवाद जुड़ गया है। वाड्रा ने दिल्ली और गुड़गांव से सटे मेवात इलाके की बेशकीमती जमीन से 3 साल में ही मोटा मुनाफा कमाया। इंडियन नेशनल लोकदल के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौटाला ने ये आरोप लगाया है। जमीन की रजिस्ट्री के मुताबिक वाड्रा ने 2009 में 28 एकड़ जमीन सिर्फ 71 लाख में खरीदी और 2011 में इसी जमीन को 2 करोड़ 15 लाख में बेच दिया। जमीन बेचने वाले एक परिवार के सदस्य को बाद में कांग्रेस का टिकट भी मिल गया।

दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात में जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं। लेकिन तीन साल पहले सोनिया गांधी के दामाद रोबर्ट वाड्रा ने इस इलाके में काफी कम कीमत में 28 एकड़ जमीन खरीद की। ये जमीन रोबर्ट वाड्रा ने 6 पार्टियों से लगभग तीन लाख रूपये प्रति एकड़ के भाव से खरीदी। दिलचस्प बात यह है कि 2009 में खुद राज्य सरकार ने इस इलाके में कम से कम 16 लाख रूपये प्रति एकड़ स्टाम्प ड्यूटी तय की हुई थी। लिहाजा वाड्रा ने जो जमीन करीब तीन लाख रूपये प्रति एकड़ कीमत पर खरीदी उस पर 16 लाख रूपये प्रति एकड़ के हिसाब से राज्य सरकार को स्टाम्प ड्यूटी अदा किया। यानी जमीन की मूल कीमत से स्टाम्प ड्यूटी 8 गुणा ज्यादा थी। अब वाड्रा का यह सौदा विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल के गले नहीं उतर रहा। इनेलो के सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला ने वाड्रा द्वारा सस्ती दर में खरीदी गई जमीन की जांच करने की मांग की है।

विपक्ष का सवाल यह है कि सरकार द्वारा निर्धारित कीमत से कम दाम में यह जमीन कैसे खरीदी और बेची गयी। कहीं ऐसा तो नहीं की वाड्रा को फायदा पहुंचाने के लिए जमीन को बाजार से कम दाम पर बेचा दिखाया गया। रोबर्ट वाड्रा ने अपनी कम्पनी मेसर्स रियल अर्थ एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक के तौर पर मेवात के फिरोजपुर जिरका के शकरपुरी गांव के छह लोगों से करीब 28 एकड़ जमीन खरीदी है। कागजात के मुताबिक वाड्रा ने रूबी तबस्सुम से सात लाख में दो एकड़, आनंद डज फुड इंडिया से करीब साढ़े आठ एकड़ जमीन 20 लाख रूपए में, मेमूना और सुभाष चंद से दो-दो एकड़ जमीन सात-सात लाख रूपए में और फिरदौस बेगम से सवा 11 एकड़ जमीन 24 लाख रूपए में खरीदी।

यानी वाड्रा ने करीब 28 एकड़ जमीन 71 लाख रूपए में 2009 में खरीदी। हरियाणा सरकार के कागजातों के मुताबिक दो साल बाद यानी नवंबर 2011 में वाड्रा ने यही जमीन दिल्ली की साउथ एक्स इलाके की कंपनी हिंद इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड को कुल 2 करोड़ 15 लाख रूपए में बेच दी। यानी वाड्रा ने 2009 में 2 लाख 53 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से कुल करीब 28 एकड़ जमीन खरीदी और उसे 2011 में सात लाख 68 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर दो करोड़ 15 लाख एक हजार पांच सौ 62 रूपए में बेची।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकश चौटाला के मुताबिक वाड्रा ने करीब 28 एकड़ जमीन में से 17 एकड़ जमीन कांग्रेस के नूंह विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अफताब अहमद के परिवार से खरीदी है। चौटाला का आरोप है कि इस जमीन की एवज में आफताब को नूंह विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की तरफ से टिकट दिया गया। यही नहीं विधायक के परिवार की बाकी बची जमीन को अर्बन डेवलप्मेंट प्लान में शामिल कर लिया गया। जिसकी वजह से उनकी जमीनों की कीमते कई गुणा बढ़ गई। फिरोजपुर जिरका से चौटाला की पार्टी के विधायक नसीम अहमद के मुताबिक हुड्डा सरकार की छत्रछाया में वाड्रा और आफताब को फायदा पहुंचाया गया। जब कांग्रेस के विधायक आफताब अहमद से बात की तो उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। आफताब का कहना है कि जमीनों को उनकी कीमत के मुताबिक ही बेचा गया।

 

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