आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए घमासान तेज होता जा रहा है। वोटों के गणित के चलते नया नाम पीए संगमा का है। मुस्लिम वोट बैंक पर नजर लगाए समाजवादी पार्टी ने कलाम का नाम उछाल कर कांग्रेस के संभावित राष्ट्रपति उम्मीदवार हामिद अंसारी की उम्मीदवारी को करारी चोट पहुंचाई। राष्ट्रपति चुनाव में वोटों के संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस बैकफुट पर आ गई है। कांग्रेस की मुसीबत तमाम क्षेत्रीय क्षत्रप दिनोंदिन बढ़ाते जा रहे हैं। मुलायम सिंह, नीतीश कुमार, जयाललिता, ममता बनर्जी और प्रकाश सिंह बादल सहित तमाम क्षेत्रीय पार्टियों के बैर भरे रवैये से सचेत कांग्रेस ने नई चाल चली है। वामपंथी तो पहले ही कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस ने एनसीपी के कंधे पर रख कर बंदूक चलाई है। राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार के तौर पर पीए संगमा का नाम सामने लाया गया। साफ-सुथरी छवि और अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले संगमा विपक्षी दल बीजेपी और उसके घटक दलों को रास आते हैं।
राष्ट्रपति पद के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद तथा विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य मतदान करते हैं। मतों की संख्या का आंकड़ा उस राज्य की आबादी के हिसाब से निकाला जाता है। जिसके चलते कांग्रेस को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए फिर से कसरत शुरू करनी पड़ी। संगमा के उम्मीदवारी का ताना-बाना दिल्ली में संगमा की किताब के विमोचन के वक्त बुनी गई। इस मौके पर तमाम कद्दावर नेताओं के साथ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी और सोमनाथ चटर्जी भी आये। किताब विमोचन के मौके पर तीन मुख्यमंत्रियों सहित 9 एंबेसडर भी जुटे। लोकसभा अध्यक्ष रह चुके संगमा के सभी दलों के आला नेताओं से अच्छे ताल्लुकात रहे हैं। सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस छोड़कर अलग पार्टी में शामिल हुए संगमा के तेवर तमाम क्षेत्रीय दलों की भी रास आते हैं। इनमें वो भी दल शामिल हैं, जो कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं। वामपंथी दल भी संगमा जैसे साफ-सुथरी छवि और अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवार को सहज स्वीकार कर लेंगे, इसकी संभावना जताई जा रही है।
कांग्रेस की पहली कोशिश सभी दलों को राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के नाम पर लामबंद करने की है। लेकिन राष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग में संख्या बल की कमी के चलते अगर कांग्रेस असफल रहती है, तो वो भी दिखाने के लिए सही दबे मन से संगमा की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर सहर्ष अपनी मोहर लगा देगी। इससे मुस्लिम वोटों को समाजवादी पार्टी से दूर रखने की कांग्रेस की मंशा भी किसी हद तक पूरी हो जाएगी। हालांकि कांग्रेस अभी अपने पत्ते खोलने को राजी नहीं है। कांग्रेस नेता भी जानते हैं कि कलाम की उम्मीदवारी को हवा देकर समाजवादी पार्टी ने दोहरी चाल चली है। पहली, कलाम के बहाने समाजवादी पार्टी की कोशिश मुस्लिम वोटरों के दिलों में उनका सच्चा हमदर्द दिखने की है। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का माने तो राष्ट्रपति चुनाव तो महज दिखावा है, असल लड़ाई तो उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार उतारने की है, जिसके लिए कांग्रेस से मोलभाव किया जा सके। लेकिन कांग्रेस की भरसक कोशिश दोनों ही चुनावों में अपने उम्मीदवार को जिताकर सरकार को मजबूत दिखाने की रहेगी।
लेखक प्रसून शुक्ला मैजिक टीवी के संपादक हैं.


