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रिपोर्टिंग में शोध और तथ्यों की जांच अनिवार्य हो : डा. कलाम

: माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में मिसाइलमैन का व्याख्यान : भोपाल। रिपोर्टिंग में शोध और तथ्यों का सत्यापन नितांत आवश्यक है। इसके लिए जरूरी है कि प्रत्येक मीडिया संस्थान समाचार का प्रकाशन करने से पूर्व उसके तथ्यों की पूरी जांच-पड़ताल करे। एक पत्रकार की दायित्व और निष्ठा किसी व्यक्ति, पार्टी और संस्था के प्रति नहीं बल्कि पूरे देश के प्रति होनी चाहिए। रिपोर्टिंग में सत्य को प्रस्तुत करते समय कोई समझौता नहीं करना चाहिेए। ये विचार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने व्यक्त किए।

: माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में मिसाइलमैन का व्याख्यान : भोपाल। रिपोर्टिंग में शोध और तथ्यों का सत्यापन नितांत आवश्यक है। इसके लिए जरूरी है कि प्रत्येक मीडिया संस्थान समाचार का प्रकाशन करने से पूर्व उसके तथ्यों की पूरी जांच-पड़ताल करे। एक पत्रकार की दायित्व और निष्ठा किसी व्यक्ति, पार्टी और संस्था के प्रति नहीं बल्कि पूरे देश के प्रति होनी चाहिए। रिपोर्टिंग में सत्य को प्रस्तुत करते समय कोई समझौता नहीं करना चाहिेए। ये विचार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने व्यक्त किए।
विश्वविद्यालय द्वारा ‘विश्वविद्यालय का संकल्पः शोध संस्कृति का पोषण’ विषयक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन रविन्द्र भवन, भोपाल में किया गया। डॉ. कलाम ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के शिक्षकों व विद्यार्थियों से आह्वान किया कि पत्रकारिता में नये मानदंड स्थापित करने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय, परिसर में शोध-संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प ले और ऐसे विद्यार्थी तैयार करे जो भारतीय पत्रकारिता में शोध आधारित रिपोर्टिंग को बढ़ावा दें।

डॉ. कलाम ने देश भर में अपने दौरों के दौरान संपादकों और पत्रकारों को दिए गए व्याख्यानों का संदर्भ देते हुए कहा कि वे उनसे भी आग्रह  करते हैं कुछ समय देश के ऐसे विश्वविद्यालयों में बिताएं जहां शोध का वातावरण होता है उद्देश्यपूर्ण प्रामाणिक शोध होते हैं। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि देश की 70 प्रतिशत जनता गांवों में रहती है लेकिन पत्रकारिता में शहरी जनता को अधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में विकास संबंधी समाचारों को भी रिपोर्ट किया जाना चाहिए। यद्यपि हमारे देश के पास बढ़िया हवाई जहाज है लेकिन अभी भी हमारे कई गांव सड़क से जोड़े जाने बाकी हैं। भारत को शासन व्यवस्था के विभिन्न अंगों विधानपालिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ ही मीडिया को भी सुदृढ़ बनाना होगा।

अपने व्याख्यान  के दौरान मिसाइल मैन ने मध्यप्रदेश में जनजातीय और ग्रामीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की भी व्याख्या की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में होशंगाबाद जिले के एक गांव में उन्हें 15 वर्ष से कम आयु के पत्रकारों से मिलने का सुअवसर मिला जो ‘बचपन की पहल’ नाम का अखबार निकालते हैं। बच्चों के इस अनूठे एवं प्रेरक प्रयास की सराहना करते हुए डॉ. कलाम ने युवा, प्रतिबद्ध और निर्भीक पत्रकारों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपनी क्षमताओं तथा मीडिया कौशल से मध्यप्रदेश के विकास में योगदान दें। उन्होंने विकास से संबंधित 11 क्षेत्रों का उल्लेख किया जिसमें विद्यार्थी मीडिया कर्मी के रूप में अपना योगदान दे सकते हैं। ये क्षेत्र हैं- उद्यानिकी, कृषि, शिक्षा, उद्यमिता, वैश्विक मानव संसाधन, स्वास्थ्य सुरक्षा, जल प्रबंधन, अधोसंरचना विकास, ई-गवर्नेंस, पर्यटन विकास, विशेष आर्थिक क्षेत्र और जनजाति विकास। उन्होंने अपने उदबोधन का समापन विद्यार्थियों को निष्ठापूर्वक सत्य एवं नैतिकता के साथ पत्रकारिता की शपथ दिलाकर किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय  के कुलपति प्रो. बृज किशोर  कुठियाला ने डॉ. कलाम का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने डॉ. कलाम से विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में उपस्थित होने का अनुरोध भी किया। डॉ. कलाम ने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के लिए अपने द्वारा लिखित पुस्तकों का सेट भी भेंट किया। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय  के रेक्टर प्रो. रामदेव भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और विद्यार्थियों के अलावा जनसंपर्क प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रतिभागी जनसंपर्क अधिकारी भी उपस्थित थे।

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