: नाराज ममता के दबाव में पीएम ने रात में ही स्वीकार किया इस्तीफा : नई दिल्ली। रेल बजट में यात्री किराये में बढ़ोतरी के प्रस्ताव से हलचल मच गया है। सियासी भूचाल ने सरकार को भी हिलाकर रख दिया है। अपने ही पार्टी कोटे के मंत्री दिनेश त्रिवेदी द्वारा यात्री किराया में बढ़ोत्तरी ममता बनर्जी को रास नहीं आई और उन्हें तत्काल दिनेश त्रिवेदी का रिजर्वेशन कैंसिल कर दिया। लगे हाथ उन्होंने मनमोहन सिंह को भी त्रिवेदी को मंत्रिमंडल के कोच से बाहर करने की चिट्ठी भेज दी। पीएम ने ममता को समझाने की कोशिश की, प्रणब मुखर्जी को भी काम पर लगाया परन्तु वे मानने को तैयार नहीं हुईं। हार मानकर रात में ही मनमोहन सिंह ने काउंटर खोला और दिनेश त्रिवेदी का मंत्री पद का टिकट कैंसिल कर दिया।
ममता से सरकार को भी अल्टीमेटम दे दिया है कि यात्री किराए में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी किसी भी कीमत पर नही होने दी जाएगी। ममता ने पीएम से दिनेश त्रिवेदी की जगह तृणमूल सांसद मुकुल रॉय को रेलमंत्री बनाने की अनुशंसा भी कर दी है। खबर है कि मुकुल रॉय कोलकाता से दिल्ली के लिए निकल चुके हैं। ममता के तेवर को देखते हुए दिनेश त्रिवेदी ने भी अपना इस्तीफा पीएम को भेज दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया। बताया जा रहा है यात्री किराया में बढ़ोतरी के अलावा ममता को त्रिवेदी का वह बयान भी नागवार गुजरा जिसमें उन्होंने कहा था कि रेल मंत्रालय राइटर्स बिल्डिंग नहीं दिल्ली से संचालित होता है और मेरी पहली जिम्मेदारी देश के लिए है।
बताया जा रहा है कि इन बयानों के बाद नाराज ममता बनर्जी का दिनेश त्रिवेदी को हटाए जाने संबंध फैक्स मिलते ही प्रधानमंत्री के आवास पर आपात बैठक हुई, जिसमें मनमोहन सिंह के अतिरिक्त सोनिया गांधी, प्रणब मुखर्जी, पी चिदंबरम, एके एंटनी और अहमद पटेल मौजूद रहे। ममता को मनाने लिए प्रणब दा को मोर्चे पर लगाया गया परन्तु वे टस से मस होने को तैयार नहीं हुईं। ममता से सरकार से भी साफ कर दिया है कि अगर रेल किराया बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार ने वापस नहीं लिया तो तृणमूल कांग्रेस कटौती का प्रस्ताव पेश करेगी।
पीएम के डिनर पार्टी में ही प्रणब दा ने सरकार को सहयोग दे रही पार्टियों को चेताया था कि वे राष्ट्रपति के अभिभाषण, बजट पर संशोधन या कटौती का प्रस्ताव पेश ना करें, इससे सरकार को खतरा हो सकता है, सरकार गिर भी सकती है। उल्लेखनीय है कि एनसीटीसी मुद्दे पर भी टीएमसी राष्ट्रपति अभिभाषण में संशोधन लाने का प्रस्ताव दे चुकी थी। पर तकनीकी कारणों से यह संशोधन खारिज हो गया, जिससे सरकार ने राहत की सांस ली। रेलमंत्री को हटाने से यूपीए नेतृत्व खासा असहज है, पर सबसे ज्यादा मुश्किल बढ़े किराए को रोलबैक करने में होगी। ममता के मिजाज को समझते हुए कांग्रेस उनसे इस मसले पर कोई बात नहीं कर रही है।
ममता ने नया रेलमंत्री भी तय कर दिया है। सरकार यह भी मान रही है कि बजट सत्र उसके लिए और मुश्किलों भरा हो सकता है। चुनौतियां उसको विपक्ष से नहीं बल्कि सहयोगी दलों से मिलने वाली हैं। यह भारत के संसदीय इतिहास में शायद पहला मौका है, जब किसी रेलमंत्री को बजट प्रस्तुत करने के बारह घंटों के भीतर ही इस्तीफा देना पड़ा हो। माना जा रहा है कि रेल मंत्रालय से टिकट कैंसिल होने के बाद त्रिवेदी कांग्रेस के कोच में बर्थ पाने की कोशिश कर सकते हैं। इधर, पीएम ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार पर कोई खतरा नहीं है। उनके पास पर्याप्त संख्या में सांसद हैं।


