चार दिन के अंदर ही लाल चरित मानस ने दो महत्वपूर्ण कांड की रचना कर दी है। स्वर्ग में बैठे गोस्वामी तुलसी दास भी लाल चरित मानस की रचना की इतनी तेज गति देख हैरान हैं। राम चरित मानस की रचऩा करते हुए तुलसीदास को वर्षों लग गए थे। लेकिन एलके आडवाणी तो लाल चरित मानस की रचना काफी तेज गति से कर रहे हैं। सतना में जहां पत्रकार घूस कांड की रचना हो गई। सतना से आडवाणी जी की रथयात्रा निकली ही थी कि लाल चरित मानस के एक और कांड यदुरप्पा कांड का पूरा मटेरियल मिल गया। हालांकि इससे पहले कई कांडों की रचना की समाग्री लाल के पास थी, लेकिन वे इसे रचना के रुप में ढालने को तैयार नहीं थे। पंजाब समेत देश के कई भाजपा शासित राज्यों से उनकी रचना के लिए भारी सामाग्री उपलब्ध थी, लेकिन लाल रचित मानस के रचियता चुप्पी साधे थे।
लाल चरित मानस के यदुरप्पा कांड के प्रमुख नायक यदुरप्पा भूमि घोटाले में जेल चले गए हैं। अन्ना की टीम के सदस्य संतोष हेगड़े की मार उन पर पड़ी और हेगड़े ने जाते-जाते उनकी बलि ले ली है। हालांकि उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री कुर्सी छोड़ने के बाद उन्हें कुछ न कुछ राहत मिलेगी लेकिन लोकायुक्त कोर्ट ने उन्हें राहत नहीं दी। उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस के हाथ गिरफ्तारी से बचने के लिए वे खुद लोकायुक्त कोर्ट में पहुंच गए। कोर्ट ने उन्हें 22 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले कोर्ट ने येदियुरप्पा के खिलाफ वॉरंट जारी करते हुए शाम चार बजे तक गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। लेकिन येदियुरप्पा के रेस कोर्स रोड पर मौजूद घर पहुंची लोकायुक्त पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। पुलिस ने शहर में मौजूद उनके दूसरे घर पर भी उनकी तलाश की, लेकिन वह उस घर पर भी नहीं मिले।
इस समय लाल चरित मानस के रचियता एलके आडवाणी पूरे देश में भ्रष्टाचार मिटाने निकले है। जेपी की जन्म भूमि से आडवाणी रथ लेकर निकले थे। लेकिन पहले दिन से ही यह रथयात्रा अशुभ संकेत लिए थे। अंदर प्रधानमंत्री की ख्वाहिश लेकर निकले आडवाणी को यह नहीं पता था कि भ्रष्टाचार रूपी भस्मासुर तो उनकी पार्टी में कई हैं। वे क्या भारत से भ्रष्टाचार मिटाएंगे। यदुरप्पा तो बेचारे अकेले फंस गए। हालात यह है कि भाजपा शासित राज्यों के कुछ और मुख्यमंत्री कभी भी फंस सकते हैं। उनके कई मसला उनके विरोधियों के हाथ लग गए हैं। जिस बिहार राज्य से आडवाणी जी ने रथयात्रा निकाली वहां ही भाजपा कोटे के कई मंत्री पिछले पांच सालों में करोड़पति बन गए हैं। एक मंत्री जो आज से पंद्रह साल पहले थोड़ी बहुत दुकानदारी कर काम चलाते थे, उनके पास आज पचास करोड़ रुपए से उपर की जमीन गया और बोधगया के पास है।
बिहार के भाजपा कोटे के एक मंत्री को मिस्टर चालीस प्रतिशत कहा जाता है। उन्हें भाजपा कार्यालय में उनके नाम से कोई नहीं बुलाता है। उन्हें मिस्टर चालीस प्रतिशत कहा जाता है। क्योंकि सामान्य रुप से विकास फंड में कमीशन के रुप में विधायक बीस से तीस प्रतिशत अपना हिस्सा मांगते थे। लेकिन वे मंत्री महोदय चालीस प्रतिशत से नीचे नहीं मानते थे। उन्हें कमीशन के रुप में चालीस प्रतिशत चाहिए होता था। हालांकि नितिश कुमार ने फिलहाल इस फंड को समाप्त कर दिया और लेकिन मंत्री जी अब अपने मंत्रालय में कमाई कर रहे हैं। एक और प्रमुख भाजपा कोटे के मंत्री की नोटों से भरी गाड़ी नीतीश कुमार ने बरामद करवा ली थी। कुछ अधिकारी मंत्री जी के लिए नोटों से भरी गाड़ी लेकर पटना पहुंच रहे थे, जिसे रास्ते में इंटेलिजेंस विंग ने पकड़ लिय। गाड़ी को अधिकारी सीधा मुख्यमंत्री कार्यालय लेकर पहुंच गए। बस फिर क्या था नीतीश कुमार को मौका मिल गया। अधिकारियों ने जिस भाजपा नेता का नाम लिया, उसे तुरंत बुलाया गया और कहा गया कि इतना मोटा नोट किसलिए ले रहे हैं। उन्होंने तुरंत नीतीश जी के सामने सरेंडर कर दिया। उसके बाद से ही बिहार में भाजपा नीतीश कुमार के सामने सरेंडर है।
हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा है कि येदियुरप्पा की गिरफ्तारी से बीजेपी का असली चेहरा सामने आ गया है। ये कह कांग्रेस का चेहरा शुद्व नहीं होगा। जल्द ही उनके उपर कुछ न कुछ गाज गिरेगी। उसकी तैयारी हो गई है। लेकिन इस मारा-मारी में देश की जनता को तो फायदा हो ही रहा है। अब भाजपा वाले कुछ न कुछ कांग्रेस की पोल खोलेंगे। वैसे भाजपा के उतरांचल के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक पोखरियाल के खिलाफ भी जल्द कुछ न कुछ होने वाला है। उनके खिलाफ भी घोटालों का कुछ कागजात विरोधियों के हाथ लग गए हैं। सवाल उठता है कि फिर सारा कुछ जानते हुए आडवाणी इतना बेशर्मी क्यों दिखा रहे हैं। जब देश की जनता को पता है कि कांग्रेस के लोग भ्रष्टाचार में अगर 20 है तो भाजपा 19 है।
यह सच्चाई है कि जहां भी भाजपा के शासन है वहां भाजपा नेता अरबपति हो रहे हैं और वहां के भाजपा प्रभारी मोटे नोट लेकर जा रहे हैं। संघ के अधिकारियों को भी पूरा खुश किया जा रहा है, और महात्मा गांधी के आजीवन विरोधी रहे संघी महात्मा गांधी के फोटो वाले नोट को बहुत प्यार से अंदर किए जा रहे हैं। संघ के संगठन मंत्री भी मासिक वसूली में लगे हुए है। हर मंत्री से चार से पांच लाख रुपये संगठन मंत्रियों ने फिक्स कर दिया है। संघ के अधिकारियों ने शेयर मार्केट में मोटे पैसे लगा रखे हैं। इसके बावजूद आडवाणी जी भ्रष्टाचार विरोधी रथयात्रा निकल रहे है। पंजाब में भाजपा के एक विधायक रंगे हाथों सीबीआई के हत्थे चढ़ गए। इनका नाम राज खुराना था। उनके साथ दो मंत्री भी सीबीआई के हाथ चढ़ गए। उनसे मजबूरी में इस्तीफा लेना पड़ा। इसके बाद भी महान भ्रष्टाचार विरोधी रथयात्रा, जय हो एलके आडवाणी की लाल चरित मानस की।
लेखक संजीव पांडेय पत्रकार हैं.


