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वरिष्‍ठ पत्रकार देव प्रकाश चौधरी ने लिखी ‘एक था लादेन’

पहली बार हिंदी में लादेन पर एक किताब आई है, जिसके लेखक हैं-वरिष्ठ पत्रकार और चित्रकार देव प्रकाश चौधरी। किताब का शीर्षक है-एक था लादेन। इस किताब में दुनिया के सबसे कुख्यात खलनायक लादेन की जिंदगी के हर पहलू को बड़े ही दिलचस्प अंदाज में शब्दों में पिरोया गया है। वैसे भी लादेन दुनिया के इतिहास का एक ऐसा चरित्र है, जिसकी कहानी कभी पूरी होती दिखाई ही नहीं देती। शायद ये एक इत्तेफाक था कि ऑस्कर विजेता हॉलीवुड निर्देशक कैथरिन बिगलो जब ओसामा बिन लादेन पर आधारित अपनी नई फ़िल्म की शूटिंग चंडीगढ़ में कर रही थीं, तो ठीक उसी वक्त पाकिस्तान के एबटाबाद में उस हवेली को नष्ट किया जा रहा था, जिस हवेली में ओसामा बिन लादेन मारा गया था। फिल्म की शूटिंग पाकिस्तान में होनी थी, लेकिन हाल के दिनों में पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में आई दरार की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पाया। बिगलो ने शूटिंग के लिए चंडीगढ़ की एक मार्किट को पाकिस्तानी शहर लाहौर का रूप दिया।

पहली बार हिंदी में लादेन पर एक किताब आई है, जिसके लेखक हैं-वरिष्ठ पत्रकार और चित्रकार देव प्रकाश चौधरी। किताब का शीर्षक है-एक था लादेन। इस किताब में दुनिया के सबसे कुख्यात खलनायक लादेन की जिंदगी के हर पहलू को बड़े ही दिलचस्प अंदाज में शब्दों में पिरोया गया है। वैसे भी लादेन दुनिया के इतिहास का एक ऐसा चरित्र है, जिसकी कहानी कभी पूरी होती दिखाई ही नहीं देती। शायद ये एक इत्तेफाक था कि ऑस्कर विजेता हॉलीवुड निर्देशक कैथरिन बिगलो जब ओसामा बिन लादेन पर आधारित अपनी नई फ़िल्म की शूटिंग चंडीगढ़ में कर रही थीं, तो ठीक उसी वक्त पाकिस्तान के एबटाबाद में उस हवेली को नष्ट किया जा रहा था, जिस हवेली में ओसामा बिन लादेन मारा गया था। फिल्म की शूटिंग पाकिस्तान में होनी थी, लेकिन हाल के दिनों में पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में आई दरार की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पाया। बिगलो ने शूटिंग के लिए चंडीगढ़ की एक मार्किट को पाकिस्तानी शहर लाहौर का रूप दिया।

अमेरिकी सूत्रों की मानें तो एबटाबाद की उस हवेली में लादेन ने कई साल बिताए थे, जबकि लादेन के पीछे 10 साल से अमेरिका लगा हुआ था। 9/11 हमले के बाद ही लादेन अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया था। लेकिन लादेन तक पहुंच पाना अमेरिका के लिए एक आसान जीत नहीं रही। यहां तक कि कई बार यह भी कहा गया कि लादेन बीमारी से मर चुका है। लेकिन जब भी उसकी मौत की कहानी सामने आती थी, किसी न किसी टीवी चैनल पर उसकी एक सीडी सामने आ जाती थी। यह क्रम चलता रहा और धीरे-धीरे लादेन बन गया दुनिया का सबसे रहस्यमय और खौफनाक नाम।  आखिर, २ मई, २००१ को दुनिया को पता चला कि जिसके पीछे दुनिया के ४२ मुल्कों की पुलिस लगी थी, वो बड़े आराम से पाकिस्तान के एक बेहद खूबसूरत कस्बेनुमा शहर में आलीशान जिंदगी जी रहा था। …आखिरकार लादेन मारा गया, लेकिन क्या उसकी मौत उसकी कहानी का अंत है। शायद नहीं!

यूं तो दुनिया भऱ में लादेन पर बहुत कुछ कहा, सुना और लिखा गया, लेकिन एक लंबे शोध के बाद हिंदी में पहली बार देव प्रकाश चौधरी की कलम से लादेन सामने आया है-एक था लादेन। कहानी एबटाबाद की 25 नंबर की उस हवेली से शुरु होती है, जिसमें लादेन मारा गया। फिर कहानी जब पीछे मुड़ती है तो एक से एक खौफनाक पल आते हैं। एक से एक खूंखार चेहरे आते हैं। एक से एक खतरनाक साजिश नजर आती है। किताब रोचक है और इसे छापा है नवज्योति प्रकाशन ने। पेपरबैक किताब की कीमत है 199 रुपए। यह बात सच है कि ओसामा बिन लादेन की कहानी जितनी सुनी गई है उससे ज्यादा अनकही है। यह बात दीगर है कि इस कहानी में बेगुनाहों की मौत बार-बार आती है। फिर भी लादेन को जानना दिलचस्प है। इस किताब “एक था लादेन” में आप पाएंगे कि लादेन का बचपन कुछ अलग था। जवानी कुछ अलग थी और जब मौत आई तो जिंदगी कुछ अलग थी। उसे सदी का सबसे खतरनाक खलनायक मानने वाला और उसे ढूंढने में अपनी पूरी ताकत झोंक देने वाला अमेरिका भी शायद उसकी पूरी कहानी से वाकिफ नहीं। कहते हैं, अगर वह आतंकवादी नहीं होता तो दुनिया का सबसे प्रतिभाशाली इंजीनियर होता।

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