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वर्तमान विसंगतियों का समाधान भगत सिंह के विचारों में है निहित- संजीव

: हिंदी विवि में वैचारिक विमर्श से भगत सिंह शहीद दिवस मनाया गया : वर्धा : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के विद्यार्थियों की वैचारिक संस्‍था ‘गोरख-संवाद’ की ओर से विमर्श कार्यक्रम आयोजित कर भगत सिंह शहीद-दिवस समारोह मनाया गया। कार्यक्रम में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। गोरख पांडेय छात्रावास में आयोजित समारोह की अध्‍यक्षता वरिष्‍ठ साहित्‍यकार व विवि के ‘राइटर-इन-रेजीडेंस’ से.रा.यात्री ने की। ‘राइटर-इन-रेजीडेंस’ संजीव, अभिनव कदम पत्रिका के संपादक व विवि के दूरस्‍थ शिक्षा के डॉ. जयप्रकाश राय ‘धूमकेतु’, संपादक अशोक मिश्र बतौर वक्‍ता के रूप में मंचस्‍थ थे।

: हिंदी विवि में वैचारिक विमर्श से भगत सिंह शहीद दिवस मनाया गया : वर्धा : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के विद्यार्थियों की वैचारिक संस्‍था ‘गोरख-संवाद’ की ओर से विमर्श कार्यक्रम आयोजित कर भगत सिंह शहीद-दिवस समारोह मनाया गया। कार्यक्रम में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। गोरख पांडेय छात्रावास में आयोजित समारोह की अध्‍यक्षता वरिष्‍ठ साहित्‍यकार व विवि के ‘राइटर-इन-रेजीडेंस’ से.रा.यात्री ने की। ‘राइटर-इन-रेजीडेंस’ संजीव, अभिनव कदम पत्रिका के संपादक व विवि के दूरस्‍थ शिक्षा के डॉ. जयप्रकाश राय ‘धूमकेतु’, संपादक अशोक मिश्र बतौर वक्‍ता के रूप में मंचस्‍थ थे।

मुख्‍य वक्‍ता के रूप में कथाकार संजीव ने कहा कि भगत सिंह के विचार और व्‍यवहार में कोई अंतर नहीं था। वर्तमान विसंगतियों को दूर करने का समाधान भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों में निहित है। भगत सिंह ने अपने विचारों के अनुरूप ही ब्रिटिश साम्राज्‍यवाद और पूंजीवादी तानाशाही के खिलाफ जंग का ऐलान किया और उसे वे मरते दम तक निभाते रहे। भगत सिंह को श्रमिक वर्ग के हिमायती बताते हुए उन्‍होंने कहा कि भगत सिंह श्रम के मूल्‍य को प‍हचानते थे, इसीलिए उन्‍होंने हमेशा श्रम और श्रमिक वर्ग के प्रति एक न्‍यायपूर्ण व्‍यवस्‍था के लिए संघर्ष किया। अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य में से.रा. यात्री ने कहा कि हमारा देश भगत सिंह के रास्‍ते पर चलकर ही खुशहाल रह सकता है। इन क्रांतिकारियों को याद करना तभी सार्थक होगा जब हम उनके द्वारा समाज के प्रति किए गए अवदानों को न सिर्फ याद करें अपितु समाज को कुछ नया भी दें।

प्रस्‍ताविक भाषण में डॉ.जयप्रकाश राय ‘धूमकेतु’ ने भगत सिंह के राजनीतिक विचारों की चर्चा करते हुए कहा कि भगत सिंह का प्रसिद्ध लेख ‘बम का दर्शन’ एक नवीन समतामूलक समाजवादी व्‍यवस्‍था को अपनाने पर जोर देता है। जहां किसानों और मजदूरों के खुशहाल जीवन की पर्याप्‍त संभावनाएं हैं। उन्‍होंने कहा कि भगत सिंह हमारे समय के युवाओं-नौजवानों के आदर्श हैं, हमें उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है कि किस प्रकार राष्‍ट्र और मानवता के लिए उन्‍होंने अपने निज़ी स्‍वार्थों का उत्‍सर्ग किया। अशोक मिश्र ने कहा कि भगत सिंह ने भारत में सांप्रदायिकता की समस्‍या को बहुत पहले ही पहचान लिया था इसीलिए वे सांप्रदायिकता के विरोध में हमेशा से ही मुखर रहे। संचालन ‘गोरख-संवाद’ के संयोजक श्रीकांत ‘राजन’ ने किया। विवि के विद्यार्थियों द्वारा ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की गई तथा समापन भी क्रांतिकारी गीतों की प्रस्‍तुति से हुई। इस अवसर पर नाट्य एवं फिल्‍म अध्‍ययन विभाग के अखिलेश दीक्षित सहित गोरख पांडेय छात्रावास व बिरसा मुण्‍डा छात्रावास के शोधार्थी व विद्यार्थी बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।

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