Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

ये दुनिया

वहां सुनवाई में देरी के लिए न्‍यायाधीश दंडित, यहां मामलों का बोझ

अमेरिका के मैनी राज्य के सुप्रीम कोर्ट को वहाँ की न्यायिक जिम्मेदारी एवं निर्योग्यता समिति से दिनांक 20.05.11 को रिपोर्ट मिली कि प्रोबेट न्यायाधीश लीमेन होम्स ने न्यायिक आचरण की मैनी संहिता के कुछ सिद्धांतों का उल्लंघन किया है जो कि समस्त न्यायिक मामलों के तुरंत निपटान की आवश्यकता बताती है। न्यायाधिपति लेवी ने पक्षकारों की सुनवाई की और दिनांक 04.10.11 को अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत की। प्रकरण में दिनांक 08.11.11 को सार प्रस्तुत किया गया और दिनांक 01.12.11 को निर्णय घोषित किया गया। इतनी अल्प अवधि में और वह भी न्यायाधीश के मामले में निर्णय भारत में दिवा स्वप्न सा लगता है।

अमेरिका के मैनी राज्य के सुप्रीम कोर्ट को वहाँ की न्यायिक जिम्मेदारी एवं निर्योग्यता समिति से दिनांक 20.05.11 को रिपोर्ट मिली कि प्रोबेट न्यायाधीश लीमेन होम्स ने न्यायिक आचरण की मैनी संहिता के कुछ सिद्धांतों का उल्लंघन किया है जो कि समस्त न्यायिक मामलों के तुरंत निपटान की आवश्यकता बताती है। न्यायाधिपति लेवी ने पक्षकारों की सुनवाई की और दिनांक 04.10.11 को अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत की। प्रकरण में दिनांक 08.11.11 को सार प्रस्तुत किया गया और दिनांक 01.12.11 को निर्णय घोषित किया गया। इतनी अल्प अवधि में और वह भी न्यायाधीश के मामले में निर्णय भारत में दिवा स्वप्न सा लगता है।

उपयुक्त दंड के निर्धारण के लिए न्यायालय कई पहलुओं पर विचार करते हैं जैसे कि न्यायाधीश का पूर्व इतिहास, पृष्ठभूमि जिसमें आरोपित उल्लंघन हुआ, मुकदमे के पक्षकारों और जनता को हुई हानि, न्यायाधीश की उल्लंघन की अभिस्वीकृति व पक्षकारों पर असर की समझ, उल्लंघन की गंभीरता, और न्यायाधीश के कार्य में जन विश्वास व आस्था की भावी संभावनाएं। न्यायाधीश होम्स वाशिंगटन जिला के 1989 से प्रोबेट न्यायाधीश हैं। वे अन्य संबद्ध जिलों के मामले भी सुनते हैं जहां के न्यायाधीश उन मामलों से दूर रहते हों। उनके 22 वर्ष के सेवा काल में आचार संहिता के उल्लंघन का कोई मामला नहीं हुआ। वर्तमान में प्रश्नगत मामला यह है कि वे, अपनी याददाश्त के आधार के अतिरिक्त, मामलों के निपटान के प्रबंधन में असफल रहे।

मामलों के कार्यभार के प्रभावी प्रबंधन के अभाव का स्पष्ट कारण गत वर्षों में मामलों की संख्या में भारी बढ़ोतरी था। अंशकालिक (23826 डॉलर वार्षिक पर) न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होम्स को मदद करने के लिए प्रशासनिक संसाधनों में इस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई थी। स्मरणीय है कि अमेरिका में लगभग 18000 डॉलर वार्षिक तो न्यूनतम मजदूरी है और इससे थोड़ा ही अधिक न्यायाधीशों को दिया जाता है, जबकि भारत में न्यूनतम मजदूरी लगभग 5500 रुपये प्रति माह है और संविधान (अनुच्छेद 38 (2)- राज्य विभिन्न व्यवसायों में लगे हुए समूहों के बीच भी प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता को समाप्त करने का प्रयास करेगा|) से विपरीत इससे 10 गुणा वेतन न्यायाधीशों को दिया जा रहा है।

अपनी याददाश्त के आधार पर मामलों का प्रबंधन करना न्यायाधीश होम्स की एक पुरानी परंपरा थी जो कि प्रारम्भिक समय में तो प्रभावी हो सकती थी, किन्तु कालांतर में कार्यभार बढ़ने के कारण बच्चों और परिवारों की सामयिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अब अप्रभावी थी। निर्धारित प्रक्रियानुसार होम्स को रजिस्टर रखना था, जिसमें 30 दिन और 60 दिन से अधिक समय से बकाया मामलों की सूची अलग से रखी जानी थी। किन्तु होम्स ने मात्र 30 दिन से अधिक समय से बकाया का ही रजिस्टर रखा और 60 दिन से अधिक बकाया मामलों पर ध्यान ही नहीं दिया।

पक्षकारों और अन्य लोगों को विलम्ब से हुई कठिनाई के लिए न्यायाधीश होम्स ने खेद व्यक्त किया। न्यायालय ने होम्स के खेद को निष्ठापूर्ण माना। जांचकर्ता न्यायाधिपति लेवी ने एक माह के निलंबन की सिफारिश की किन्तु न्यायालय का विचार रहा कि होम्स ने उल्लंघनों को स्वीकार कर लिया है और भविष्य में ऐसी समस्या से दूर रहने के लिए योजना तैयार कर ली है, वह पूर्व में दण्डित नहीं है व वाशिंगटन जिले को 22 वर्ष से निष्ठापूर्वक सेवाएँ दी हैं। अपने कर्तव्यों के प्रति होम्स की भावी प्रतिबद्धता को देखते हुए उनका एक माह के लिए निलंबन जनता व विवाद्यकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा और इससे जनहित सुरक्षित नहीं होगा।

न्यायालय ने आगे कहा कि हमें विश्वास है कि सार्वजनिक भर्त्सना और सुधारात्मक योजना से उसके व्यवहार में मौलिक परिवर्तन होगा, जनता की रक्षा होगी और इससे इन उल्लंघनों की पुनरावृति नहीं होना सुनिश्चित होगा। तदनुसार न्यायालय ने आदेश दिया कि होम्स को इन उल्लंघनों के लिए सार्वजनिक प्रताड़ना दी जाय और होम्स तीस दिन से अधिक समय से बकाया मामलों के विषय में प्रति माह न्यायिक जिम्मेदारी समिति को रिपोर्ट देते रहेंगे। इधर भारत में तो न्यायधीशों को देवतुल्य माना जाता है उन्हें कोई बड़ा दंड देना तो दूर उनकी सार्वजनिक भर्त्सना तक नहीं की जा सकती।

लेखक मनीराम शर्मा पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...