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विजय वर्मा कथा सम्‍मान नीला प्रसाद तथा हेमंत स्‍मृति कविता सम्‍मान रविकांत को

मुम्बई :  ”जिसे ईश्वर ने सम्मानित किया हो उसे पुरुष क्या सम्मानित करेगा” ये उदगार समारोह अध्यक्ष वरिष्ठ शायर [अध्यक्ष-फ़िल्म राइटर्स एसोसिएशन] श्री जलीस शरवानी  ने ४ फरवरी २०१२ को बगड़का कालेज सभागार अंधेरी [पूर्व] मुम्बई में श्री जे.जे.टी विश्वविद्यालय के साहित्यिक एकांश हेमंत फाउंडेशन द्वारा आयोजित विजयवर्मा कथा सम्मान एवं हेमंतस्मृति कविता सम्मान के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि ”नारी मां होने के गौरव पूर्ण सम्मान से सम्मानित है, जिसकी अभिव्यक्ति नीला प्रसाद की कहानियों में है। यह पुरस्कार भारत का सबसे बड़ा पुरस्कार कहलाए जाने के लायक है क्योंकि यह संवेदना और संभावनाओं को तवज्जो देता है जिसकी आज के समय में जरुरत है और यह हेमंत फाउंडेशन ने साबित कर दिया।”

मुम्बई :  ”जिसे ईश्वर ने सम्मानित किया हो उसे पुरुष क्या सम्मानित करेगा” ये उदगार समारोह अध्यक्ष वरिष्ठ शायर [अध्यक्ष-फ़िल्म राइटर्स एसोसिएशन] श्री जलीस शरवानी  ने ४ फरवरी २०१२ को बगड़का कालेज सभागार अंधेरी [पूर्व] मुम्बई में श्री जे.जे.टी विश्वविद्यालय के साहित्यिक एकांश हेमंत फाउंडेशन द्वारा आयोजित विजयवर्मा कथा सम्मान एवं हेमंतस्मृति कविता सम्मान के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि ”नारी मां होने के गौरव पूर्ण सम्मान से सम्मानित है, जिसकी अभिव्यक्ति नीला प्रसाद की कहानियों में है। यह पुरस्कार भारत का सबसे बड़ा पुरस्कार कहलाए जाने के लायक है क्योंकि यह संवेदना और संभावनाओं को तवज्जो देता है जिसकी आज के समय में जरुरत है और यह हेमंत फाउंडेशन ने साबित कर दिया।”

हिन्दी उर्दू के साहित्यकारों, टी.वी कलाकारों तथा साहित्य प्रेमियों, मीडिया प्रेस से संलग्न पत्रकारों तथा रायपुर से आए भारत भास्कर के संपादक संदीप तिवारी, अहिर हैदरी तथा लंदन से आए कथा यूके अध्यक्ष तेजेन्द्र शर्मा, जकिया जुबैरी एवं अनीता कपूर तथा पत्रकारों की उपस्थिति में वर्ष २०१२ का विजयवर्मा कथा सम्मान नीला प्रसाद को उनके कथा संग्रह ‘सातवीं औरत का घर’ के लिए तथा हेमंत स्मृति कविता सम्मान रविकांत को उनके कविता संग्रह ‘यात्रा’ के लिए प्रमुख अतिथि डोगरी की वरिष्ठ साहित्यकार डा. पदमा सचदेव के हाथों प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरुप ग्यारह हजार की धनराशि, शाल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्जवलन एवं शास्त्रीय संगीत के गायक नीरज कुमार के द्वारा गाई सरस्वती वंदना से हुआ। संस्था की अध्यक्ष साहित्यकार संतोष श्रीवास्तव ने हेमंत फाउंडेशन की स्थापना और गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मैंने अपने कवि पुत्र हेमंत के गम को खुशियों के मोतियों में बदल डालने की एक जिद्द भरी कोशिश की है जिसका परिणाम है कि मैंने एक हेमंत खोया और आज मुझे रविकांत के रुप में दसवां हेमंत मिला है।

संस्था की कार्यकारी अध्यक्ष कवयित्री सुमीता केशवा ने हेमंत फाउंडेशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और पुरस्कार संयोजक भारत भारद्वाज द्वारा भेजी गई संस्तुति प्रस्तुत की। सम्मानित रचनाकार नीला प्रसाद ने श्री जे.जे.टी.विश्वविद्यालय तथा हेमंत फाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य में इन दिनों स्त्री स्वतंत्रता के मुद्दे को अपनी मर्जी से देह बरत सकने या मर्जी से प्रेम कर सकने मात्र की स्वतंत्रता से जोड़कर देखने की जो हवा चल पड़ी है उसने स्त्री स्वतंत्रता और नारी अस्मिता के सवालों को हाशिए पर डाल दिया है। उन्होंने अपनी कहानी ‘विधवाएं’ का पाठ किया। रविकांत ने अपनी कविताएं सुनाकर यह साबित कर दिया है कि उनकी कविता में यथार्थ को कुरेदने के और समय के गुजर जाने की पीड़ा है। वरिष्ठ कथाकार सुधा अरोड़ा ने नीला प्रसाद की कहानियों पर गंभीर समीक्षात्मक वक्तव्य देते हुए कहा कि नीला प्रसाद युवा महिला लेखन का गौरव है। आज आज बाज़ारवाद के युग में धारा के विरुद्ध चलती हुई नीला प्रसाद का लेखन अलग से ध्यान खींचता है। आधुनिकता के साथ-साथ मूल्यों के बदलने और ढहने का जो संकट आया है उसका सही परिप्रेक्ष्य में बारीकी से बयान नीला प्रसाद की कहानियों में दिखाई देता है। हमारी पीढ़ी ने स्त्री की यातना के बारे में लिखा पर उसकी तथाकथित स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता के बावजूद उसके भीतरी द्वन्द्व और छले जाने के कारणों को प्रमाणिकता के और बारीकी के साथ नीला ने अभिव्यक्त किया है। सही चुनाव करने के लिए विजयवर्मा कथा सम्मान के निर्णायकों का मैं आभार व्यक्त करती हूं “कवि बोधिसत्व ने रविकांत की कविताओं पर अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए कहा कि रविकांत की कविताएं समय के प्रवाह को टिकाए रखने वाली कविताएं हैं।

जे.जे.टी. विश्वविद्यालय के कुलपति तथा संस्था के निदेशक श्री विनोद टीबड़ेवाला ने दोनों पुरस्कृत रचनाकारों का सम्मान करते हुए कहा कि नीला प्रसाद तथा रविकांत की लेखनी में भविष्य की संभावनाएं हैं,जो निश्चय ही ऊंचाइयां छुएंगी। रायपुर से आए पांडुलिपी एवं वेब पत्रिका सृजनगाथा के संपादक जयप्रकाश मानस ने कहा कि दोनों रचनाकार धारा से हटकर हैं इन्हें किसी वाद या खांचे में नहीं डाला जा सकता। ये मौलिक रचनाकार हैं। मुख्य अतिथि पदमा सचदेव ने डोंगरी की अपनी कुछ बेहतरीन रचनाएं सुनाते हुए कहा कि मुम्बई एक ऐसा महानगर है जहां की गलियों ने साहित्यकारों को अहमियत दी, जीने का हौंसला दिया और यह बात हेमंत फाउंडेशन ने साबित कर दी। साहित्यिक संस्था अंजुमन के अध्यक्ष खन्ना मुजफ्फरपुरी ने संतोष श्रीवास्तव को पुष्पगुच्छ देकर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन आलोक भट्टाचार्य ने किया तथा शिल्पा सोनटक्के ने आभार व्यक्त किया। पत्रकार अश्विनी चोरगे तथा सुनील सिंह ने कार्यक्रम में विशेष सहयोग दिया।

सुमीता केशवा की रिपोर्ट.

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