वर्धा : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के भाषा विद्यापीठ भवन के सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान कुलपति विभूति नारायण राय ने वरिष्ठ आलोचक व कवि शीतांशु शशिभूषण की सद्य प्रकाशित काव्य संग्रह ‘स्थगित हैं यात्राएँ’ का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं इन्हें आलोचक के रूप में जानता था। आज हम इनके नए रूप से अवगत हो रहे हैं। शीतांशु के कवि रूप में पर्यवेक्षण की जितनी गहरी क्षमता है, उतना ही सटीक उसका अभिव्यंजन भी है। उन्होंने कहा कि इनकी कविताओं में कोई तिलस्मी या जादुई दुनिया नहीं है और न ही ये किसी फैशन में लिखी गई हैं। उनकी कविताएं मानवता को प्रतिष्ठापित करती हैं।
साहित्य विद्यापीठ के सहायक प्रोफेसर अरुणेश नीरन शुक्ल ने आलोचक शीतांशु की रचनाधर्मिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शीतांशु की संवेदनशीलता, जीवन व जीवन के संबंधों को ठीक-ठीक समझने की दृष्टि ही उनकी कविता में असर पैदा करती है। इसलिए शीतांशु की तकरीबन सभी कविताओं में अनावश्यक चीख या नारेबाजी नहीं है। है तो बस जनता के उत्थान का स्वप्न व मनुष्यता को बचाए रखने की इच्छा जो बिना संवेदनशीलता के संभव नहीं। उनकी कविताएं समाज के इसी संवेदनशीलता को पैदा करने व बचाये रखने का उपक्रम है। विमोचन समारोह के दौरान आकर्षण के केंद्र में था-कवि शीतांशु शशिभूषण द्वारा काव्य संग्रह ‘स्थगित हैं यात्राऍं’ से कुछ कविताओं का पाठ किया जाना। उन्होंने ‘मॉं’, ‘पिता’, ‘बाबरी मस्जिद’ जैसी कई कविताओं का पाठ किया। गौरतलब है कि नेशलन पब्लिशिंग हाउस, जयपुर द्वारा प्रकाशित काव्य संग्रह ‘स्थगित हैं यात्राऍं’ में व्यक्ति, परिवार और समाज, धर्म और अध्यात्म, संस्कृति और राजनीति, अर्थतंत्र और प्रशासन तथा काल व स्थल की व्यापक समझ से लिखी गई कविताऍं हैं।
भाषा विद्यापीठ के सहायक प्रोफेसर डॉ.अनिल दुबे ने समारोह का संचालन किया तथा विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कु.पाण्डेय ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो.आर.पी. सक्सेना, प्रो.के.के. सिंह, प्रो.शंभू गुप्त, प्रो. रामवीर सिंह, डॉ. प्रीति सागर, जगदीश सिंह दांगी, डॉ. रामानुज अस्थाना, डॉ. अनवर अहमद सिद्दीकी, डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी, डॉ. हरीश हुनगुन्द, अमरेन्द्र कु.शर्मा, डॉ. रामप्रकाश यादव, डॉ. रूपेश कु.सिंह, बी.एस.मिरगे, अमित विश्वास, गिरीश चंद्र पाण्डेय, हेमा गोडबोले, गुंजन जैन सहित विवि के अध्यापक, शोधार्थी व विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


