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शशांक शेखर की नियुक्ति के खिलाफ याचिका चीफ जस्टिस को प्रेषित

: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली : नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई दो हफ्ते के लिए टल गई है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि शशांक शेकर आईएएस अधिकारी नहीं हैं बावजूद इसके इन्हें मायावती सरकार ने कैबिनेट सचिव बना दिया गया जो नियमों के खिलाफ है. याचिका में शशांक शेखर को तुरंत कैबिनेट सचिव के पद से हटाने की मांग की गई है.

: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली : नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई दो हफ्ते के लिए टल गई है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि शशांक शेकर आईएएस अधिकारी नहीं हैं बावजूद इसके इन्हें मायावती सरकार ने कैबिनेट सचिव बना दिया गया जो नियमों के खिलाफ है. याचिका में शशांक शेखर को तुरंत कैबिनेट सचिव के पद से हटाने की मांग की गई है.

इससे पहले इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मायावती सरकार से कई तीखे सवाल पूछे हैं. अदालत ने मायावती सरकार से पूछा था कि क्या सरकार मनमर्जी से किसी को किसी भी पद पर बिठा सकती है? और क्या उसे सरकरी खजाने से वेतन दे सकती है? मायावती सरकार से अदालत का सवाल ये भी था कि कैबिनेट सचिव का पद तो केंद्र सरकार में होता है. राज्य में सर्वोच्च प्रशासनिक पद चीफ सेक्रेटरी का होता है, ऐसे में यूपी में नया पद बनाने के पीछे राज्य सरकार का क्या मकसद था? शशांक शेखर यूपी की मुख्यमंत्री मायावती के बेहद करीबी माने जाते हैं. उनपर भ्रष्टाचार के भी आरोप हैं. ऐसे में अदालत से सोमवार को फौरी राहत मिलने से मायावती की मुश्किलें थोड़ी कम जरूर हुई हैं.

साभार- स्टार न्यूज

कैबिनेट सचिव के विरुद्ध दाखिल याचिका मुख्य न्यायाधीश को प्रेषित

इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह के विरुद्ध आयकर विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिक दर्ज करने व सीबीआइ से जांच की मांग वाली याचिका को न्यायालय ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष किसी अन्य खंडपीठ को नामित करने के लिए प्रेषित किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अमर सरन व न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने प्रतापगढ़ निवासी विनोद कुमार की याचिका कर दिया है।

मालूम हो कि आयकर विभाग ने 18 जून 2002 को एक रिपोर्ट प्रेषित किया था। न्यायालय ने पूर्व में नोटिस जारी किया था। इस मामले में रिकाल प्रार्थना पत्र भी दाखिल किया गया है। आज अदालत ने मामले को मुख्य न्यायधीश के समक्ष अन्य खण्डपीठ नामित करने के लिये भेज दिया है। याचिका में कहा गया है कि इनके परिजन द्वारा कोआपरेटिव बैंक का भी संचालन किया जा रहा है।

साभार- दैनिक जागरण

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