Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

ये दुनिया

शिक्षा अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कड़ाई से लागू करवाएं अशोक गहलोत

अजमेर। माननीय सर्वोच्च न्ययालय द्वारा शिक्षा का अधिकार कानून की संवैधानिक वैधता बरकरार रखकर गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध करवाने संबंधी शुक्रवार को दिये ऐतिहासिक  फैसले का मौलाना आजाद लोक सेवा संस्थान ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कानून की सख्ती से पालन करवाने की मांग की है। संस्थान के अध्यक्ष मुजफ्फर भारती ने ब्यान जारी कर बताया कि उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को शिक्षा का अधिकार कानून 2009 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जिससे देशभर के सरकारी और गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में गरीबों को 25 प्रतिशत निशुल्क सीटें समान रूप से मिल सकेंगी।

अजमेर। माननीय सर्वोच्च न्ययालय द्वारा शिक्षा का अधिकार कानून की संवैधानिक वैधता बरकरार रखकर गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध करवाने संबंधी शुक्रवार को दिये ऐतिहासिक  फैसले का मौलाना आजाद लोक सेवा संस्थान ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कानून की सख्ती से पालन करवाने की मांग की है। संस्थान के अध्यक्ष मुजफ्फर भारती ने ब्यान जारी कर बताया कि उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को शिक्षा का अधिकार कानून 2009 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जिससे देशभर के सरकारी और गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में गरीबों को 25 प्रतिशत निशुल्क सीटें समान रूप से मिल सकेंगी।

उच्त्तम न्ययालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस एच कपाड़िया, न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायामूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ ने बहुमत के विचार से कहा कि कानून सरकारी और गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में समान रूप से लागू होगा। सिर्फ गैरसहायता प्राप्त निजी अल्पसंख्यक स्कूल इसके दायरे से बाहर होंगे। परन्तु न्यायमूर्ति राधाकृष्णन की राय को न्यायमूर्ति कपाड़िया और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने नहीं माना। उन्होंने कहा कि कानून गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों पर भी लागू होगा। न्यायमूर्ति राधाकृष्णन ने इससे असहमति जताते हुए राय जाहिर की कि यह कानून उन गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों और अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू नहीं होगा जो सरकार से कोई सहायता या अनुदान हासिल नहीं करते।

शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसका फैसला आज से प्रभावी होगा। इसका अर्थ है कि कानून बनने के बाद किए गए दाखिले पर यह लागू नहीं होगा, शीर्ष अदालत ने कहा कि इस फैसला का प्रभाव पिछली तारीख से नहीं बल्कि इसके बाद से होगा। मुजफ्फर भारती ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को गरीबों के लिए हितकारी बताया उन्होंने कहा कि अब गरीब माँ बाप का अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाने का सपना साकार होगा और निजी स्कूलों की मनमानियां समाप्त होंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अक्षरश: पलना करवाने की मांग की।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...