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शिक्षा माफियाओं से डरे डायट प्राचार्य का कथन, शिक्षा रुपी द्रोपदी का चीर हरण नहीं होने देंगे

मैं आपके समक्ष एक ऐसा पत्र प्रस्तुत कर रही हूँ जिसे देख कर यह आभास ही नहीं हो सकता है कि यह पत्र उत्तर प्रदेश के प्रादेशिक शिक्षा सेवा (पीइएस सेवा) के एक अधिकारी का लिखा हुआ है,  जो उन्होंने 06 अप्रैल 2011 को मध्‍यप्रदेश के एक अधिकारी को प्रेषित किया. इस पत्र में प्रदेश की शिक्षा व्‍यवस्‍था समेत शिक्षा मंत्री पर आरोप लगाए गए हैं. परन्‍तु इसमें आश्‍चर्यजनक बात यह है कि यह पत्र उत्‍तर प्रदेश के किसी अधिकारी को न भेजकर मध्‍य प्रदेश के अधिकारी को भेजा गया है.

मैं आपके समक्ष एक ऐसा पत्र प्रस्तुत कर रही हूँ जिसे देख कर यह आभास ही नहीं हो सकता है कि यह पत्र उत्तर प्रदेश के प्रादेशिक शिक्षा सेवा (पीइएस सेवा) के एक अधिकारी का लिखा हुआ है,  जो उन्होंने 06 अप्रैल 2011 को मध्‍यप्रदेश के एक अधिकारी को प्रेषित किया. इस पत्र में प्रदेश की शिक्षा व्‍यवस्‍था समेत शिक्षा मंत्री पर आरोप लगाए गए हैं. परन्‍तु इसमें आश्‍चर्यजनक बात यह है कि यह पत्र उत्‍तर प्रदेश के किसी अधिकारी को न भेजकर मध्‍य प्रदेश के अधिकारी को भेजा गया है.

मेरे पास जिस पत्र की प्रति प्राप्त हुई है उसका मजनून इस प्रकार से है-


 

परम आदरणीय महोदया,
डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट बागपत को संबोधित तथा अधोहस्ताक्षरी को पृष्ठांकित आपके पत्र क्रमांक प्रशासन/मि स स/ सत्यापन/ 932/2011 भोपाल दिनांक 21/03/2011 को पढ़ कर मुझे एहसास हुआ कि आजकल घोर अनाचार एवं भ्रष्टाचार के समय में चारों ओर उँगलियों पर गिनने लायक विशिष्ठ ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ आईएएस अधिकारी देश में हैं, जिनके कन्धों पर राष्ट्र चल रहा है. काश आप उत्तर प्रदेश में शिक्षा सचिव होतीं, तो हम उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार को नेस्तनाबूद कर देते.

माफियाओं के तार बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों से भी जुड़े हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि बागपत का प्रशासन अब राजनीतिज्ञों के दवाब में आ गया है. पहले बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाला प्रशासन सब कुछ मालूम होते हुए भी अब उनको गिरफ्तार कर रैकेट का खुलासा करने में रूचि नहीं ले रहा है. दो माफियाओं के विरुद्ध मैंने स्वयं बडौत थाने में एफआईआर कराया था,  किन्तु प्रशासन द्वारा एसडीएम बडौत को जांच स्थान्तरित करके एस डीएम से यह लिखा लिया गया कि एफआईआर झूठी पायी गयी. पता चला है कि माफियाओं द्वारा पैसे के बल पर गंठजोड कर के उल्‍टे मुझे किसी चक्रव्यूह में फंसाने हेतु बेसिक शिक्षा मंत्री स्तर से कोई साजिश रची जा रही है. परन्तु हम आखिरी दम तक अपनी क्षमताओं के अनुरूप माफियाओं और उनके संरक्षक नेताओं/ अधिकारियों के गंदे हाथों से शिक्षा रुपी द्रौपदी का चीर-हरण नहीं होने देंगे. इतिहास ऐसे दोषियों को माफ नहीं कर सकेगा.

यदि आप उचित समझें तो श्री नेतराम, आईएएस, प्रमुख सचिव, उ०प्र० शासन, लखनऊ को अपनी ओर से पत्र लिखने की कृपा करें ताकि फर्जी प्रमाण-पत्रधारियों और तमाम माफियाओं को गिरफ्तार करके रैकेट का पर्दाफ़ाश करने हेतु शासन स्तर पर डीएम और एसपी बागपत को निर्देश जारी हो सके.

सादर,
भवदीय,
(डॉ. राजकुमार दुबे)

सेवा में,
सचिव,
माध्यमिक शिक्षा मंडल,
मध्यप्रदेश,
भोपाल


इस पत्र के साथ कई सारी बातें जुडी हुई हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि यदि पत्र के प्रेषक डॉ. राजकुमार दुबे, जो चौधरी चरण सिंह जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान, बागपत, बडौत के प्राचार्य हैं और उप शिक्षा निदेशक स्तर के अधिकारी हैं, द्वारा कही जा रही सभी बातें सही हैं तो बागपत क्या, पूरे उत्तर प्रदेश की स्थिति बहुत ही दयनीय मानी जायेगी. यदि स्वयं शिक्षा विभाग का एक वरिष्ठ अधिकारी चीख-चीख कर यह कह रहा हो कि- ‘माफियाओं के तार बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों से भी जुड़े हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि बागपत का प्रशासन अब राजनीतिज्ञों के दवाब में आ गया है’  और एक दूसरे प्रांत की शिक्षा सचिव से आशा बाँध रहा है कि यदि वे उत्तर प्रदेश की शिक्षा सचिव होतीं तो काश यहाँ की स्थिति सुधार पातीं, तो हर कोई समझ सकता है कि हालात कितने खराब हो चुके हैं. यदि एक बड़ा अधिकारी साफ़ तौर पर यह कहने को बाध्य हो रहा है कि- ‘पहले बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाला प्रशासन सब कुछ मालूम होते हुए भी अब उनको गिरफ्तार कर रैकेट का खुलासा करने में रूचि नहीं ले रहा है’  तो इससे अधिक शर्म की बात क्या हो सकती है.

इतना ही नहीं, उक्त अधिकारी तो अपनी चिट्ठी में यहाँ तक कह रहे हैं कि प्रदेश के शिक्षा माफिया उन्हें फंसाने के लिए बेसिक शिक्षा मंत्री के साथ मिल कर साजिश रच रहे हैं. तो, अब इसके अलावा कौन सी बात बची हुई थी? यदि इसके बाद भी प्रदेश का शासन और शिक्षा प्रशासन नहीं चेतता है तो यह एक दुर्भाग्य ही कहा जाएगा.

इस पूरे प्रकरण का एक दूसरा पहलू यह है कि क्या डॉ. दुबे द्वारा इस तरह से दूसरे प्रांत के अधिकारियों को पत्र प्रेषित करना और इसमें अपने प्रदेश के अधिकारियों और नेताओं के सम्बन्ध में कटु टिप्पणियाँ करना उनकी सेवा-सम्बन्धी शर्तों का उल्लंघन नहीं है? इस पत्र से यह तो साफ़ जाहिर हो जाता है कि डॉ. दुबे ने कई सारी बातें ऐसी लिखी हैं जो प्रथम दृष्टया सरकारी सेवाओं की आचार नियमावली का उल्लंघन सी दिखती है. इस जगह मेरी दृष्टि से किसी भी न्यायपरक शासन के लिए उचित कदम यह होना चाहिए कि सबसे पहले तो डॉ. राजकुमार दुबे द्वारा प्रेषित कथित पत्र की सत्यापरकता की जांच कराई जाए और उसके पश्चात इसमें अंकित तथ्यों की तत्काल किसी पर्याप्त उच्च स्तर से जांच की जाए. ऐसा इसीलिए नितांत आवश्यक प्रतीत होता है, क्योंकि डॉ. दुबे के इस पत्र में उत्तर प्रदेश शासन, प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री, पूरे शिक्षा विभाग और बागपत प्रशासन पर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इतना ही गंभीर यह मामला है कि यह पत्र अपने किसी सम्बंधित अधिकारी को नहीं प्रेषित कर दूसरे प्रदेश के एक प्रकार से असंबद्ध अधिकारी को प्रेषित किया गया है. ऐसे में इस प्रकरण को नजरअंदाज़ करना अत्यंत ही घातक एवं प्रत्येक दृष्टि से अनुचित होगा.

मैंने इन सारी बातों को प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री एवं बेसिक शिक्षा के प्रमुख सचिव को तत्काल इस पत्र के परिप्रेक्ष्य में इस पूरे मामले की जांच करने और इसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने का निवेदन किया है. अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मसले को किस हद तक गंभीर मानती है और इस सम्बन्ध में क्या कार्रवाई करती है.

डॉ. नूतन ठाकुर

 

सचिव

आईआरडीएस, लखनऊ

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