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शिप्रा को बचाने के लिए मरने को तैयार हैं एकलव्‍यदास जी महाराज

उज्जैन के नृसिंह घाट पर 12 दिनों से आमरण-अनशन पर बैठे 82 वर्षीय संत श्री एकलव्यदास जी महाराज शिप्रा नदी के सीमांकन, प्रदूषण मुक्ति, सफाई और गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार मांग उठा रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन दोनों ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। उज्जैन कुम्भ के लिए खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये ऐसी जगह लगाए जा रहे है, जिसका कोई औचित्य नहीं है। शिप्रा नदी केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड द्वारा जहरीली नदी घोषित कर दी गयी है जिसका पानी अब पीने लायक तो क्या नहाने लायक भी नहीं बचा है। इस दिशा में अब पूरे भारत वर्ष के 1000 से ज्यादा संत एकलव्यदास जी के साथ उज्जैन में सामूहिक आमरण-अनशन शुरू करने जा रहे हैं।

उज्जैन के नृसिंह घाट पर 12 दिनों से आमरण-अनशन पर बैठे 82 वर्षीय संत श्री एकलव्यदास जी महाराज शिप्रा नदी के सीमांकन, प्रदूषण मुक्ति, सफाई और गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार मांग उठा रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन दोनों ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। उज्जैन कुम्भ के लिए खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये ऐसी जगह लगाए जा रहे है, जिसका कोई औचित्य नहीं है। शिप्रा नदी केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड द्वारा जहरीली नदी घोषित कर दी गयी है जिसका पानी अब पीने लायक तो क्या नहाने लायक भी नहीं बचा है। इस दिशा में अब पूरे भारत वर्ष के 1000 से ज्यादा संत एकलव्यदास जी के साथ उज्जैन में सामूहिक आमरण-अनशन शुरू करने जा रहे हैं।

 

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