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शिव प्रसाद जोशी एवं शालिनी जोशी ने लिखी न्‍यू मीडिया पर किताब

शिवप्रसाद जोशी और शालिनी जोशी की लिखी किताब आई है. किताब का नाम है वेब पत्रकारिताः नया मीडिया नये रुझान.  राजकमल प्रकाशन से नवंबर 2012 में आई इस किताब का प्राक्कथन लिखा है जाने माने पत्रकार और इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी में जनसंचार विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सुभाष धूलिया ने. किताब का सारांश कुछ इस तरह है, ”एक ऐसे दौर में जब मीडिया प्रिंट रेडियो और टीवी से होता हुआ वेब पर उतर आया है और वहां भी उसके कई रूप दिखने लगे हैं, ऐसे न्यू मीडिया के दौर में जर्नलिज़्म से जुड़े छात्रों, शोधकर्ताओं और अध्यापकों, पेशेवरों और विशेषज्ञों के सामने कुछ नई चुनौतियां और सवाल भी आए हैं. न्यू मीडिया कमोबेश उसी समय प्रकट हुआ जब ग्लोबल विलेज की अवधारणा ज़ोर मार रही थीं, भूमंडलीकरण ने आकार ग्रहण कर लिया था और नवउदारवादी शर्ते व्यापक कॉरपोरेट मिज़ाज का निर्माण कर रही थीं.”

शिवप्रसाद जोशी और शालिनी जोशी की लिखी किताब आई है. किताब का नाम है वेब पत्रकारिताः नया मीडिया नये रुझान.  राजकमल प्रकाशन से नवंबर 2012 में आई इस किताब का प्राक्कथन लिखा है जाने माने पत्रकार और इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी में जनसंचार विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सुभाष धूलिया ने. किताब का सारांश कुछ इस तरह है, ”एक ऐसे दौर में जब मीडिया प्रिंट रेडियो और टीवी से होता हुआ वेब पर उतर आया है और वहां भी उसके कई रूप दिखने लगे हैं, ऐसे न्यू मीडिया के दौर में जर्नलिज़्म से जुड़े छात्रों, शोधकर्ताओं और अध्यापकों, पेशेवरों और विशेषज्ञों के सामने कुछ नई चुनौतियां और सवाल भी आए हैं. न्यू मीडिया कमोबेश उसी समय प्रकट हुआ जब ग्लोबल विलेज की अवधारणा ज़ोर मार रही थीं, भूमंडलीकरण ने आकार ग्रहण कर लिया था और नवउदारवादी शर्ते व्यापक कॉरपोरेट मिज़ाज का निर्माण कर रही थीं.”

आधुनिकतम तकनीकी से लैस इस मीडिया सिस्टम में नए सवाल और नई पेचीदगियां भी जुड़ती जा रहीं हैं. उन्हें समझने, उनके हल के औजार तैयार करने के लिए एक बिल्कुल ही नए तेवर वाले मुस्तैद जर्नलिस्ट की दरकार है. कहने को वे मल्टीमीडिया न्यूज़पर्सन होंगे लेकिन उन्हें सिर्फ स्किल्स में ही दक्षता हासिल नहीं करनी होगी बल्कि उन्हें समाचार के बुनियादी मूल्यों और अपने पेशे की बुनियादी नैतिकताओं पर भी फिर से नज़र डालनी होगी. उन्हें नए ढंग से विश्वसनीयता और प्रामाणिकता हासिल करनी होगी जो इधर कॉरपोरेट मीडिया के विभिन्न क़िस्मों के दबावों, स्वार्थों और लालचों में कमज़ोर पड़ गई है या बिखर गई है या मिटा ही दी जा रही है.

न्यू मीडिया सिर्फ़ वेब का ही मीडिया नहीं माना जाना चाहिए इसे विश्वास का भी न्यू मीडिया समझना चाहिए. ऐसा करते हुए हमें डी शिलर का ये कथन भी नहीं भूलना चाहिए कि इंटरनेट की कथित विविधता सांस्कृतिक परजीवीपन है. इसे सांस्कृतिक वैविध्य नहीं समझना चाहिए. प्रस्तुत किताब इंटरनेट की इन तात्कालिक कमज़ोरियों और अंतर्विरोधों की ओर भी इशारा करती है. किताब का प्रमुख उद्देश्य ये है कि इन कमज़ोरियों से निपटने के औजार भी बनें. उन औजारों को इस्तेमाल करने वाले लोगों के सामने उलझन न हो. इसीलिए ये किताब वेब मीडिया के छात्रों और प्रशिक्षुओं को इस माध्यम की बारीकियों के बारे में बताते हुए लिखी गई है. ये किताब उन सहूलियतों का भी विवरण पेश करती है जो न्यू मीडियाकर्मी के लिए हो सकती हैं. और इसमें पत्रकारिता के बुनियादी उसूल, समाचार ज़रूरतें, भाषा और प्रयोग की विविधताओं जैसे पाठ तो स्वाभाविक रूप से शामिल हैं ही. किताब के लेखक शिव प्रसाद जोशी न्यूज़ एक्सप्रेस न्यूज़ उत्तराखंड हेड हैं। वे सहारा समय सहित कई न्यूज़ चैनलों में काम कर चुके हैं।

स्‍वतंत्र पत्रकार अनुराग मिश्र की रिपोर्ट.

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