घाट-घाट का पानी पीकर चार बार विधायकी कर चुके अंबेडकरनगर के शेर बहादुर सिंह ने आज समाजवादी पार्टी के घाट पर मत्था टेक दिया। अपने राजनीतिक जीवन में यह पांचवां मौका है जब उन्होंने अपनी स्वार्थपरक राजनीति के तहत सपा का दामन थामा है। वे यहां की जलालपुर विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के एमएलए हैं और करीब चार मास पहले जारी बसपा प्रत्याशियों की सूची में उनका नाम है।
सपा के खाते में शेरबहादुर का जुड़ना सपा की एक बड़ी विजय के तोर पर देखा जा रहा है। सपा मुख्यालय में आज उनका जोरशोर से स्वागत किया गया, जबकि बहुजन समाज पार्टी के खेमे में इसको लेकर खासी नाराजगी बतायी जा रही है। कारण अंबेदकर नगर का क्षेत्र मायावती की निजी जागीर के तौर पर माना जाता है और प्रदेश बसपा के तीन कद्दावर नेता इसी क्षेत्र से हैं। खुद मायावती ने तय किया है कि शेरबहादुर सिंह के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत विधानसभा अध्यक्ष के सामने चायिका दायर की जाएगी ताकि उनसे विधायकी का ओहदा छीना जा सके।
सपा मुख्यालय में हुए एक नाटकीय मोड़ के तहत शेरबहादुर सिंह अचानक ही सपा कार्यालय पहुंचे और प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ चंद मिनट की गुफ्तगू के बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी को छोड़ने की घोषणा कर दी। साथ ही शेर बहादुर सिंह ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करते हुए मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व तथा समाजवादी पार्टी की नीतियों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त का ऐलान भी किया। इस मौके पर अखिलेश यादव ने श्री सिंह का स्वागत करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी को इससे बल मिलेगा।
दरअसल, शेर बहादुर सिंह को दलबदल का खासा अनुभव है। वक्त-जरूरत के मुताबिक शुरू से ही उनकी आस्थाएं लगातार बदलती ही रही हैं। उनका हर कदम निजी हित से ही जुड़ा माना जाता रहा है। वे सन 1980 में कांग्रेस से, 1985 में निर्दलीय, 1996 के भाजपा और 2007 में बसपा की नीतियों के प्रति आस्था जताते हुए वे विधायक निर्वाचित हुए थे। आज उन्हें बसपा सरकार की नीतियां जनविरोधी और भ्रष्ट दिखायी पड़ी तो वे सपा की गोद में बैठ गये। इस बार उन्हें सपा में खींच लाने का श्रेय पूर्वांचल के कुख्यात अपराधी अभय सिंह को जाता है।
उधर इस दलबदल पर आज बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री मायावती ने सीधे अपना ही मुंह खोला। खिसियानी बिल्ली सी हरकत करते हुए बसपा ने शेर बहादुर सिंह की इस हरकत पर पहले तो उन्हें निलम्बित कर दिया ओर फिर मायावती ने कहा कि शेर बहादुर सिंह का यह आचरण दल-बदल कानून की परिधि में आता है और बसपा उनकी सदस्यता समाप्त कराने के लिए विधान सभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर करेगी।
शेर बहादुर सिंह को नैतिकता का सबक सिखाते हुए मायावती ने कहा कि सपा की सदस्यता ग्रहण करने से पहले ही शेरबहादुर सिंह को अपनी विधान सभा सीट से इस्तीफा देना चाहिए था, क्योंकि वे बसपा के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। मायावती की झुंझलाहट इस बात पर है कि बसपा के टिकट पर निर्वाचित श्री सिंह चार वर्ष से अधिक समय तक विधायक के रूप में सारी सुविधायें एवं उससे जुड़े अन्य विशेषाधिकारों का उपभोग करते रहे हैं। शेर बहादुर का नाम आगामी चुनाव में प्रत्याशियों की सूची में शामिल होने पर मायावती ने तो कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन कहा कि श्री सिंह के खिलाफ लगातार यह शिकायतें आ रही थीं कि वे अपने विधान सभा क्षेत्र में आम जनता की दुःख तकलीफों पर ध्यान नहीं देते थे और अपने परिवार के हितों को साधने में ही व्यस्त रहते थे। इस प्रकार श्री सिंह ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के साथ धोखा एवं विश्वासघात किया है। मायावती ने कहा कि अगले चुनाव में शेर बहादुर सिंह मुंह की खायेंगे। उनका कहना है कि बसपा एक राष्ट्रीय पार्टी है और उसमें अनुशासनहीनता की कोई जगह नहीं है।


