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सरकारी पैसे का गबन करिए, मजा लीजिए, पकड़े जाएं तो चुका दीजिए, कुछ नहीं होगा!

बाड़मेर। आप यह जानकर आश्चर्य में पड़ जायेंगे कि स्वतंत्रता दिवस की 64 वीं सालगिरह के उपलक्ष्‍य में बाड़मेर पुलिस ने सरकारी कर्मचारियों को एक नायाब तोहफा दिया हैं। पुलिस के मुताबिक कोई भी सरकारी कर्मचारी सरकारी राशि का गबन कर सकता हैं और यदि उसके गबन की पोल खुल जाती हैं तो उसे दुगुना धन जमा करवा कर फ्री होने की छूट दी जा सकती हैं। उस पर कोई मुकदमा नही बनेगा। भले ही उसने 5-10 साल तक सरकारी खजाने के लाखों रुपयों का मजा क्यों न लूटा हो! इसमें भी सबसे बड़ी छूट पुलिस ने यह दी हैं कि किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा किए गये गबन के मामले मे यदि उसका अधिकारी चुप्पी पकड़ बैठ जाता हैं तो उसके खिलाफ कोई दूसरा व्यक्ति एफआईआर दर्ज नहीं करवा सकता।

बाड़मेर। आप यह जानकर आश्चर्य में पड़ जायेंगे कि स्वतंत्रता दिवस की 64 वीं सालगिरह के उपलक्ष्‍य में बाड़मेर पुलिस ने सरकारी कर्मचारियों को एक नायाब तोहफा दिया हैं। पुलिस के मुताबिक कोई भी सरकारी कर्मचारी सरकारी राशि का गबन कर सकता हैं और यदि उसके गबन की पोल खुल जाती हैं तो उसे दुगुना धन जमा करवा कर फ्री होने की छूट दी जा सकती हैं। उस पर कोई मुकदमा नही बनेगा। भले ही उसने 5-10 साल तक सरकारी खजाने के लाखों रुपयों का मजा क्यों न लूटा हो! इसमें भी सबसे बड़ी छूट पुलिस ने यह दी हैं कि किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा किए गये गबन के मामले मे यदि उसका अधिकारी चुप्पी पकड़ बैठ जाता हैं तो उसके खिलाफ कोई दूसरा व्यक्ति एफआईआर दर्ज नहीं करवा सकता।
पुलिस ने लाखों के गबन मे दी क्लीन चिट : वीरमाराम मेघवाल नामक व्यक्ति ने नगर पालिका की रसीदों से लाखों रुपये वसूल कर 9 साल तक आराम से बैठे रहे कनिष्ठ लिपिक योगेश आचार्य के विरुद्व पुलिस कोतवाली बाड़मेर में फौजदारी मामला अदालत के जरिए दर्ज करवाया था। आरोपी लिपिक के विरुद्व शिकायत होने पर तत्कालीन आयुक्त सुश्री शशि शर्मा ने करीब साढे़ पांच लाख की वसूली निकाली। यह रकम लिपिक ने नगरपालिका की नियमन पत्रावलियों पर लिये जाने वाले शुल्क की रसीदें काट कर अपनी जेब मे रख ली थी। वर्ष 2000 के इस मामले की पोल 2009 मे खुली तो लिपिक ने 3 लाख रुपये जमा करवा दिये और बाकी की रकम अभी तक बकाया पड़ी है।

इस बीच आये किसी आयुक्त एवं अध्यक्ष ने लिपिक से वसूली नहीं की। बाड़मेर पुलिस के सब इन्सपेक्टर रामसिंह राजपुरोहित ने इस मामले में अदालत में पिछले दिनों पेश की एफआर में लिखा हैं कि इस मामले मे वीरमाराम को रिपोर्ट करवाने का अधिकार नहीं है। पालिका के अधिकारी व अध्यक्ष ने वर्ष 2009 के बाद वसूली की कोई कोशिश नहीं की। इसलिए इस मामले को गबन का मामला नहीं कहा जा सकता। पुलिस के मुताबिक योगेश ने गबन की राशि की दुगुना से अधिक राशि जमा करवा ली हैं इसलिए उसका कोई गुनाह नहीं बनता। यानि कि पुलिस इन्सपेक्टर के मुताबिक गबन की दुगुना राशि जमा करवाने के बाद कोई उसके विरुद्व गबन का कोई अपराध ही नहीं बनता।

बहरहॉल, बाड़मेर पुलिस की इस राय से एक बार तो लाखों के गबन का मामला रफादफा हो चुका हैं लेकिन यदि पुलिस की इस सलाह पर चलने की सीख यदि बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों ने ले ली तो आने वाले समय मे कईं बैंक दिवालिया हो सकते हैं। रोजाना करोड़ों रुपये जमा के लिए प्राप्त करने वाले बैंक अधिकारी व कर्मचारी मस्ती से यह रकम घर ले जायेंगे और पोल खुलने पर वापिस जमा करवा देंगे। ऐसा ही ढर्रा हर सरकारी कर्मचारी व कैशियर चलाना शुरू कर दे तो सरकार के क्या हालात होंगे!

बाडमेर से महावीर जैन की रिपोर्ट.

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