‘‘सांच को आंच क्या’’ इस कहावत को चरितार्थ होती देख रहा हूं। अब देखिए ना बारां-झालावाड़ के यूथ कांग्रेस के लोकसभा महासचिव जसविन्दर सिंह साबी को, राजनीतिक इच्छाशक्ति रखने वाले इन भाई साब ने दूसरा दशक परियोजना के खिलाफ खूब साजिशें रची है, लेकिन सांच के पथ पर चल रही इस संस्था को कोई आंच नहीं आई। दूसरी तरफ अब खुद ही फंसते नजर आ रहा है। अब बचने के लिए ना ना प्रकार की जुगत कर रहे है। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने बारां जिले के भंवरगढ़ गांव के तेजाजी के डांडे पर संचालित दूसरा दशक परियोजना (स्वयंसेवी संस्था) में आयोजित शिविर से गई दो सहरिया लड़कियों ने संस्था के कार्यकर्ताओं पर अश्लीलता करने के आरोप लगाए थे। 20 दिसम्बर को भंवरगढ़ थाने में संस्था के निदेशक मोती लाल सहित 6 कार्यकर्ताओं के खिलाफ भंवरगढ़ थाने में मामला दर्ज किया गया। आईपीसी की धारा 354, 294 व अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 (11) के तहत मामला दर्ज किया गया व एससी/एसटी सेल (बारां) के पुलिस उपाधीक्षक कल्याणमल बंजारा द्वारा आरंभ की गई।
यह पूरा मामला कुछ यूं है कि 4 नवम्बर 2011 को गणेशपुरा गांव की दो लड़कियां दूसरा दशक परियोजना द्वारा आयोजित आवासीय शिविर में जुड़ी थी। वे महज 12 दिन ही संस्था में रूकी और 16 नवम्बर को उनकी माताएं संस्था में आई और यह कहकर लड़कियों को अपने साथ ले गई कि घर में काम करने वाला कोई नहीं है इसलिए लड़कियां घर का काम करेंगी। उन लड़कियों के द्वारा 20 दिसम्बर को भंवरगढ़ थाने में रिपोर्ट दिलवाई गई कि संस्था में कार्यकर्ताओं ने उनके साथ अश्लीलता की, उन्हें नंगा किया गया और फोटो खिंचे गए। उन्होंने 56 वर्षीय संस्था के निदेशक मोतीलाल, समन्वयक विजय मेहता (38) व आवासीय कैम्प में पढ़ाने वाली 4 अध्यापिकाओं (आयु 22-25 वर्ष) पर आरोप लगाए।
ये आरोप निराधार है क्योंकि संस्था के कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआई आर दर्ज होने से पहले 19 दिसम्बर को ईटीवी राजस्थान टीवी चैनल पर लड़कियों के साथ अश्लीलता करने के समाचार प्रसारित हुए थे। जगजाहिर हो चुका है कि जसविन्दर सिंह साबी 19 दिसम्बर को संस्था में गया था और विडियोग्राफी की थी। यहां बहुत ही बड़ा सवाल उठता है कि जसविन्दर सिंह साबी द्वारा ली गई वीडियो फुटेज ईटीवी राजस्थान जैसे टीवी चैनल पर कैसे प्रसारित हुई? और निःसंदेह समाचार के कंटेंट भी जसविन्दर सिंह साबी द्वारा किए गए हो?
साबी साब ने लाल सिंह जी फौजदार को खबर व वीडियो फुटेज घर बैठे उपलब्ध करवा दिए, लाल सिंह जी को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। भाईसाब ने सत्यता की जांच करने की जहमत भी नहीं उठाई, तथ्य रहित खबर ईटीवी को भेज दी। 35 किलोमीटर दूर की खबर उन्हें घर बैठे ही मिल गई, अजी सही बात तो यह है कि उन्हें मिलता ही कितना है, जो वो इतनी दौड़ भाग करते? इस खबर के बारे में कुछ बुद्धिजीवी पत्रकारों ने ईटीवी राजस्थान जयुपर के संपादकीय सलाहकार ईश मधु तलवार साब को बारां जिले के संवाददाता लाल सिंह फौजदार की भूमिका पर सवाल खड़े किए है। साबी साब ने संस्था के लोगों को फंसाने के लिए खूब मेहनत की। साबी साब 17 दिसम्बर को मध्यपद्रेश सीमा से सटे बारां जिले के कालीमाटी गांव में भी गए थे और वहां इत्मीनान से महिलाओं को बताया कि संस्था के कार्यकर्ता कैम्प में पढ़ रही तुम्हारी लड़कियों की गंदी तस्वीरें लेकर विदेशों में भेज रहे है। साबी साब संस्था के खिलाफ माहौल तैयार करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने महिलाओं को प्रलोभन भी दिए। लेकिन वे महिलाएं भी ना….., ईमानदारी का चोला पहने घूम रही है। साबी साब ने तो आगे चलकर महिलाओं को साफ साफ कहा था कि अपनी लड़कियों को संस्था में से ले आओ और जैसा मैं कहूं वैसा कहलवा दो तो मैं सरकार से डेढ़-डेढ़ लाख रुपए दिलवा दूंगा। इससे ज्यादा तो ओर क्या करते साबी साब। शायद साबी साब सरकार से रुपए दिलवा भी सकते हैं, हो सकता है राहुल गांधी या मुख्यमंत्री जी ने उन्हें इस बात का ठेका दे रखा हो।
कालीमाटी गांव के लोग खुल कर सच्चाई बता रहे है। वो बिना किसी डर के सच बयां कर रहे है, इस गांव की पंसूरी बाई सहरिया का कहना है कि वो तो राज्य महिला आयोग में जाकर सच बता कर आई है। पंसूरी बाई व अन्य लोगों का कहना है कि 18 दिसम्बर को जसविन्दर सिंह साबी (यूथ कांग्रेस, लोकसभा महासचिव, बारां-झालावाड़) का कालीमाटी गांव में गया था और महिलाओं को संस्था के खिलाफ भड़काया, कहा कि ‘‘भंवरगढ़ की दूसरा दशक संस्था में तुम्हारी लड़कियों को नंगा कर के उनकी फोटो खिंची जा रही है, संस्था के लोग उन फोटो को विदेशों में भेजकर पैसा कमा रहे है।’’ उसने महिलाओं को कहा कि तुम भी अपनी लड़कियों को संस्था से ले आओ और जैसा मैं कहूं वैसा कह दो तो सरकार से डेढ़-डेढ़ लाख रुपए दिलवाउंगा। उसने कहा कि गणेशपुरा गांव की तुम्हारे समाज की दो लड़किया भी संस्था से भागकर आ गई है, मैं उन्हें सरकार से डेढ़-डेढ़ लाख रुपए दिलवाउंगा।’’
सत्ताधारी भी सभी आंख पर पट्टी बांधे राज कर रहे है, क्षेत्र के लोग असलियत को जान चुके है कि जसविन्दर सिंह साबी ने संस्था के कार्यकर्ताओं को फंसाने के लिए साजिश की। संस्था के निदेशक मोतीलाल छाबड़ा ने जसविन्दर सिंह साबी के खिलाफ पुलिस थाना भंवरगढ़ व पुलिस अधीक्षक बारां को रिपोर्ट भी दी है। मानवाधिकारों के लिए कार्य कर रहे लोगों के खिलाफ षडयंत्र रच कर झूठा मुकदमा दर्ज करवाने वाले जसविन्दर सिंह साबी के खिलाफ प्राप्त रिपोर्ट पर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने की बजाए महज परिवाद दर्ज कर जांच की जा रही है, ऐसा लगता है कि सरकार अपने लोगों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं करना चाहती है।
ऐसा भी नहीं है कि जसविन्दर सिंह साबी की करतूतों के बारे में यूथ कांग्रेस के आलाकमान को जानकारी नहीं हो। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी, राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व राजस्थान में यूथ कांग्रेस के बड़े लीडर भंवर जितेन्द्र सिंह को अपनी युवा टीम के इस नेता के करतूत की सूचना पहुंच चुकी है। लेकिन कोई भी एक कदम आगे आकर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। जसविन्दर सिंह अभी तक यूथ कांग्रेस का लोकसभा महासचिव है।
सहरिया समुदाय की महिलाओं ने राज्य महिला आयोग को ज्ञापन भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। राज्य महिला आयोग ने आरोप लगा रही लड़कियों को सुनवाई के लिए जयपुर बुलवाया था। वो तय तारीख को तो आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुई लेकिन उसके बाद 23 जनवरी को वो अपनी माताओं सहित आयोग में गई थी। वे जसविन्दर सिंह साबी के साथ उसकी जीप में गणेशपुरा से आयोग (जयपुर) में गई। जसविन्दर सिंह साबी (जिसके खिलाफ साजिश रचने के आरोप लगे हुए है व पुलिस कछुआ चाल से जांच कर रही है।) के साथ उसके नियंत्रण में आई लड़कियां व उनकी माताएं आयोग के समक्ष क्या बताया होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। भई कहावत है ना… समन्दर के बीच रहकर मगरमच्छ से बैर नहीं किया जा सकता है। महिलाओं ने वही कहा होगा जो जसविन्दर ने उन्हें बताया।
23 जनवरी को रानी और डिम्पल (काल्पनिक नाम) उनकी माताओं सहित जसविन्दर सिंह साबी के साथ ईटीवी राजस्थान टीवी चैनल कार्यालय के बाहर नजर आए थे। वहां रानी और डिम्पल का साक्षात्कार किया जा रहा था। वो साक्षात्कार टीवी पर नजर नहीं आया, मतलब जसविन्दर की साजिश नाकाम रही। आजकल वो रानी और डिम्पल की माताएं बतियां रही है कि भंवरगढ़ थाने में रानी और डिम्पल के नाम से दर्ज एफआईआर में लिखित बातें झूठी हैं। रानी और डिम्पल भी कह रही है कि फूलचंद सहरिया एक लिखा हुआ पत्र लाया जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर कर दिए थे, रानी और डिम्पल की माताओं का भी यही कहना है। यानि कि उन्हें पता नहीं था कागज में क्या लिखा हुआ है, अपन भी क्या मजाक कर रहे हैं, वैसे वो महिलाएं शिक्षित ही नहीं है तो उन्हें पता भी क्या होगा कि कागज में क्या लिखा है। उन्हें तो फूलचंद सहरिया ने जाति से बाहर कर देने का दबाव बनाकर कागज पर अंगूठे लगवाए।
अब बातें क्या साफ हो रही है… संस्था में जाकर वीडियोग्राफी किसने की? जसविन्दर साबी ने। कालीमाटी गांव में जाकर महिलाओं को किसने उकसाया? जसविन्दर सिंह साबी ने। साजिश रचने के लिए चंदा किसने उगाया? जसविन्दर सिंह साबी ने। भंवरगढ़ थाने में रानी और डिम्पल की रिपोर्ट किसने दिलवाई? जसविन्दर सिंह साबी ने। संस्था के खिलाफ केलवाड़ा में समाज की बैठक का आयोजन किसके इशारे पर हुआ? जसविन्दर सिंह साबी के। बारां की पुलिस अधीक्षक केबी वन्दना के समक्ष रानी और डिम्पल को पेश कर संस्था के खिलाफ कार्रवाई की मांग किसने की? जसविन्दर सिंह साबी ने। राज्य महिला आयोग के बुलाने पर रानी और डिम्पल को उनकी माताओं सहित आयोग (जयपुर) में कौन ले गया?
चार-चार मुकदमे जिसके खिलाफ दर्ज है वो सज्जन श्रीमान जसविन्दर सिंह साबी अचानक इतने समाजसेवी कैसे हो गए? रानी और डिम्पल के मर्मों का जानकार इतने मार्मिक कैसे हो गए? एक्च्यूएली जनाब के पिताश्री और कुछ रिश्तेदार सहरिया समुदाय के लोगों से बंधुआ मजदूरी करवाते थे। पिछले साल दूसरा दशक परियोजना ने अपनी सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से बंधुआ मुक्ति अभियान चलाया था। जिसके तहत क्षेत्र में काम कर करीबन 150 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया। इनकी बदौलत बंधुआ मजदूर न केवल मुक्त हुए बल्कि जिन लोगों पर बंधुआ मजदूरी करवाना सिद्ध हुआ उनके खिलाफ कार्रवाई भी हुई। जसविन्दर सिंह साबी के परिवार के लोग भी बंधुआ मजदूरी करवाते पाए जिनके खिलाफ कार्रवाई की गई। इसी बात से झल्लाए जसविन्दर सिंह साबी ने संस्था के कार्यकर्ताओं के खिलाफ साजिश रची। पर सच ही तो है, सांच को आंच नहीं। सच्चाई से कार्य कर रहे संस्था के लोगों को समस्याओं का सामना तो करना पड़ा। संस्था के निदेशक मोतीलाल छाबड़ा के चेहरे पर सिलन तक दिखाई नहीं पड़ती वो कहते है – सांच को आंच क्या। जब बिलकुल साफ हो गया है कि जसविन्दर सिंह साबी ने संस्था के खिलाफ दुष्प्रचार किया है। संस्था को बदनाम करने की साजिश की है तो, उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है? टीवी चैनल पर प्रसारित हुई खबर के मामले में ऐसा प्रतीत होता है पत्रकारिता में आया यह नौजवान महज पैसा और शोहरत बटोरने ही आया है अगर ऐसा नहीं है तो क्या सामाजिक सरोकारों के लिए कार्य कर रही संस्था के खिलाफ किसी और के द्वारा दी गई खबर की सत्यता को जाने बैगर वह प्रसारित करने हेतु भेजता? अपन भी कैसी बात कर रहे है, उसे सामाजिक सरोकारों की क्या पड़ी… मीडि़या का चेहरा भी सामने आया, कालीमाटी गांव की महिलाएं साफ बता रही है जसविन्दर सिंह साबी गांव में आया था और उन्हें संस्था के बारे झूठी भ्रामक सूचना दी और प्रलोभन देते हुए संस्था के खिलाफ उकसाया। पर दैनिक नवज्योति को छोड़कर किसी भी मीडिया प्रतिष्ठान ने इस सच्चाई को प्रकाशित/प्रसारित करने की जहमत नहीं उठाई। कहा तो है ना कि कार्पोरेट घरानों को भला सामाजिक सरोकारों से क्या वास्ता !
संस्था के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति मोतीलाल ने पढ़ाई छोड़ने के बाद युवा उम्र में ही घर छोड़कर सहरिया आदिवासी इलाके में आकर रहने लगे और बच्चों को शिक्षित करने का कार्य करने लगे थे। सामाजिक सरोकारों से उनका रिश्ता है, दूसरा दशक परियोजना के निदेशक होने के नाते मिलने वाले मासिक वेतन में से 9000 रुपए अपनी बहिन व भाई को भेजते हैं व शेष रकम एक फण्ड में जमा करते है। वह फण्ड़ गरीबों की मदद में खर्च किया जाता है। आजकल मोतीलाल एक वर्ग विशेष व मीडिया संस्थानों के रवैये से दुःखी है, लेकिन वो बड़े ही हिम्मत वाले इंसान है, अहसास कराते है कि -“साख से गिर जाए हम वो पत्ते नहीं, आंधियों से कह दो अपनी औकात में रहे।”
राजस्थान से लखन साल्वी की रिपोर्ट.


