मैं आम जनता हूँ.. मैं जानना चाहता हूँ संसद सर्वोच्च है या सांसद जिन्हें हम चुनकर सदन में भेजते है.. आज संसद में अन्ना टीम के खिलाफ कई सांसदों ने संसद में जमकर भड़ास निकाली… आखिर ये भड़ास ही तो है.. जहाँ एक मुहावरे के इर्द गिर्द पूरी संसद नाचती रही या यूँ कहें की समय बर्बाद करती रही… आखिर क्यों? ऐसा क्या नया कह दिया अन्ना टीम ने जो पहले उसने नहीं कहा है…..चोर को चोर नही तो क्या कहेंगे? माना की संसद सर्वोच्च है… वो मंदिर है हम भी मानते हैं.. तो क्या आप जूते पहन के उसमें जायेंगे… सच क्या है वो आप भी जानते हैं माननीय लोग.. खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे जैसी हालत है आप लोगों की… आप देश के बारे में कितना बेहतर सोच रहे हैं वो 63 सालों से दिख रहा है.. आप चुनाव जीतने के लिए जो जो हरकतें करते हो वो क्या आपकी गरिमा बढ़ाता है..संसद की तो गरिमा है..पर आपकी?
आप अपने गिरेबान में झांकिए सच पता लग जाएगा, जरुर पता लग जाएगा अगर आत्मा बची होगी तो.. क्या आपने 63 सालों में ऐसा क़ानून बनाया जिस से आपके बीच (आपके अनुसार तथाकथित 162 दागी सांसद) दागी लोग न पहुंचे.. आपने इतने सालों में सिर्फ जनता को मजबूर किया है कि मैं अमुक पार्टी से चुनाव लड़ रहा हूँ आप मुझे चुने…भले ही मैं चाहे जैसा हूँ क्योंकि आपके पास विकल्प नहीं है… फिर आप चुन लिए जाते हैं… फिर आप जनता को ही अपना घमंड दिखाते हैं कि मैं चुन के आया हूँ…. आप चुन के कहाँ आये हैं ..आपको तो जनता ने अपनी मजबूरियों या यूँ कहें बदकिस्मती से अपने ऊपर थोप लिया है… और आप ठसक दिखा रहे हैं कि आप चुन के आये हैं…. आप सर्वोच्च हैं…. आपमें से कितने सांसद हैं जिन्हें अपने संसदीय क्षेत्र से कुल पड़े मतों का 50 प्रतिशत वोट भी मिला है? ..आप तो जातीय समीकरण और गुणा-भाग के जरिये बमुश्किल से जीत के आये हैं…. कल एक नेता जी बोल रहे थे भ्रष्टाचार नीचे से ऊपर को आता है…. आप का चश्मा उलट गया है नेताजी इसके जिम्मेदार हम नहीं हैं…. आपका गुरुर है, आपको मोतियाबिंद हो गया नेताजी… जब से आप सांसद बने हैं.. आपको हमारी समस्या दिखाई देना बंद हो गई ….लेकिन हमें भी तो आपने मजबूर कर रखा है… 5 साल से पहले हम आपका इलाज भी नहीं कर सकते…आपकी बपौती है क्या कि आप जबतक मर नहीं जायेंगे चुनाव लड़ते रहेंगे…
आप लोग बात युवाओं की करते हैं और टिकट थमा देते हैं अपने परबाबा को, फिर कहते हैं चुन लीजिये इन्हें, ये मरते दम आपकी सेवा करेंगे.. फिर आप लग जाते हैं जातिवाद, सम्प्रदायवाद की भावना भड़काने में…. जीत गए तो बल्ले-बल्ले.. हार गये तो चुनाव के दौरान किये गये अपने कुकर्मों के लिए माफ़ी भी नहीं मांगते… अब रहा सवाल आपको अपशब्द कहने का …तो ये आप सोचिये कि लोग आपको ऐसा बोलने को क्यों मजबूर हैं….”अन्ना टीम आपके मुताबिक़ जनता की नुमाइंदगी नहीं करती, चंद लोग हैं जो तमाशा कर रहे हैं”.. ..चलिए माना कि वो हमारी नुमाइंदगी नहीं करते …तो क्या उन सवालों के जवाब हैं आपके पास जो वे उठा रहे हैं….तो आप क्या चाहते हैं हम सब सड़क पर आ जाये और क़ानून को हाथ में ले लें तब आप समझेंगे कि हम क्या चाहते हैं… आप माननीय सांसद ये बताने का कष्ट करेंगे कि आपके पास ऐसा कौन सा पैमाना है जिस से आप अपने क्षेत्र की जनता की भावनाओं को समझ सकें… जाहिर है आप निरुत्तर हैं.. लेकिन शेखी बघारने को कह दो तो सबसे आगे खड़े मिलेंगे… आप में से कुछ लोग तो ऐसा बोलते हैं या ऐसा करते हैं ..जिन्हें देखकर आप में से कई भले लोग ही कह दोगे कि आखिर ये संसद में आया कैसे? लेकिन आप भी कुछ नहीं कर सकते क्योंकि आपने खुद संसद रुपी मंदिर में पहुंचकर मंदिर के देवता को ही मजबूर कर दिया है…या यूँ कहें बंधक बना लिया है…वो देवता भी आपकी बात मान ने को मजबूर है …जैसे मैं मजबूर हूँ… इस देश के नागरिक के रूप में मेरी यही दुआ है कि आपका मोतियाबिंद जल्दी से जल्दी ठीक हो… कहा सुना माफ़ आपका
शुभेच्छु
एक भारतीय नागरिक


