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सूचना तो मिली नहीं, हांथ-पांव जरूर टूट गए

बाड़मेर :  राजस्थान का सीमावर्ती जिला, जहां पर सरकारी योजनाओं का लाभ कभी मिल जाए तो बड़ी बात मानी जाती हैं, छोटे-बड़े भ्रष्टाचार यहाँ पर जम कर हावी हैं, लेकिन इस भ्रष्टाचार के खिलाफ एक युवक ने आरटीआई को हथियार बनाकर लड़ना चाहा, लेकिन अफ़सोस कि वो इस जंग में भ्रष्टाचारियो से हार गया। बाड़मेर के बामनोर गाँव कि यह घटना हैं जहां के निवासी मंगलाराम ने ग्राम पंचायत में इंदिरा आवास, मनरेगा योजना के घोटालों के खुलासे के लिए सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किया लेकिन सूचना मिलने कि जगह उसके हाथ-पांव तोड़ दिए गए।

बाड़मेर :  राजस्थान का सीमावर्ती जिला, जहां पर सरकारी योजनाओं का लाभ कभी मिल जाए तो बड़ी बात मानी जाती हैं, छोटे-बड़े भ्रष्टाचार यहाँ पर जम कर हावी हैं, लेकिन इस भ्रष्टाचार के खिलाफ एक युवक ने आरटीआई को हथियार बनाकर लड़ना चाहा, लेकिन अफ़सोस कि वो इस जंग में भ्रष्टाचारियो से हार गया। बाड़मेर के बामनोर गाँव कि यह घटना हैं जहां के निवासी मंगलाराम ने ग्राम पंचायत में इंदिरा आवास, मनरेगा योजना के घोटालों के खुलासे के लिए सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किया लेकिन सूचना मिलने कि जगह उसके हाथ-पांव तोड़ दिए गए।

मंगला राम नहीं जानता कि वो वापस अपने पैरो पर खड़ा हो पाएगा या नहीं,  क्यूंकि सूचना का अधिकार उसके लिए जानलेवा साबित हो गया। बाड़मेर के धोरीमन्ना के गाँव बामनोर निवासी मंगलाराम ने ग्राम पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोला और सूचनाए मांग ली, बस फिर क्या था गाँव के दबंग सरपंच को इस दलित युवक का यह कदम रास नहीं आया और उसको भरे गाँव की पंचायत के बीच मारने की नियत से पीट-पीट कर अधमरा कर दिया और उसके हाथ पांव तोड़ डाले। अब करीब छह माह से मंगलाराम अपंगता का दंश झेलने को मजबूर हैं। मंगला राम का अब सरकार और सरकारी कानूनों से पूरा भरोसा उठ चुका हैं। उसके अनुसार जब सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगने का परिणाम उसको उसे इस तरह से चुकाना पड़ा तो भी उसको सरकार या प्रशासन ने कोई मदद नहीं की,  यहाँ तक की घोटालो की जांच भी करवाई गई तो भी आरोपी सरपंच के घोटाले साबित हुए और जांच टीम के द्वारा सरपंच को हटाने कि अनुशंसा की गई लेकिन राजनेताओं ने जांच बदलवा दी,  ऐसे में उसका कोई नहीं रहा हैं,  जो काफी दुखद हैं।

मंगला राम के अनुसार क्या उसने इस क़ानून को हथियार बना कर कोई गलती कर दी। बाड़मेर जिला मुख्यालय के सामने इस मामले को लेकर करीब ढाई माह तक धरना और अनशन भी चला था,  लेकिन जांच के झूठे आश्वासन के अलावा कुछ भी इस पीड़ित को नसीब नहीं हुआ। यहाँ के ग्रामीणों की माने तो ग्राम पंचायत में पांच बार सरपंच बने इस आरोपी ने ग्राम पंचायत में सिवाय घोटालों के कुछ भी नहीं किया लेकिन राजनीतिक ताकत के चलते कोई इस का कुछ भी नहीं बिगाड़ पाया हैं। हाथ-पैरों को तुड़वा चुके इस शख्स को अब किसी ना किसी प्रकार से हमेशा धमकियां मिल रही हैं लेकिन पुलिस, प्रशासन और सरकार इसको सुरक्षा देने की बजाय इस मामले से भागने का प्रयास कर रही हैं। दलित संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं यहाँ के जनप्रतिनिधि उदा राम मेघवाल के ओसार कई बार जांच के तहत दोषी पाए जाने के बावजूद भी आरोपी सरपंच को गिरफ्तार तो दूर की बात उससे पूछताछ भी नहीं की गई।

यक़ीनन जिस तरह की भूमिका इस मामले में प्रशासन और सरकार की रही हैं वो चौंकाने वाली हैं। जिस क़ानून के तहत बाड़मेर के इस शख्स ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मामला उठाया उस से भ्रष्टाचारी पूरी तरह से बौखला गए और उन्होंने इस के हाथ पांव तोड़ डाले। इस मामले में अरुणा रॉय और निखिल डे जैसे बड़े आरटीआई कार्यकर्ताओं ने भी हाथ डाला लेकिन सरकारी हठधर्मिता के आगे वे भी पंगु नज़र आये।

 

बाड़मेर से दुर्ग सिंह राजपुरोहित की रिपोर्ट.

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