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सैफई महोत्‍सव में शिल्‍पा और उर्मिला को लाने की लिस्‍ट पकड़ा दी जाती थी : अमर सिंह

इटावा :  राष्ट्रीय लोकमंच पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव के गृह जनपद में एक जनसभा करके जमकर अपनी भड़ास निकाली. जनसभा में पहुंचे लोगों ने सोचा था कि पार्टी की नीतियों और मुद्दों पर बात होगी,  लेकिन जनसभा में तो अमर सिंह ने मुलायम सिंह के घर में ही उन्हें बुरा भला कहने के लिए लोकमंच का सहारा लिया और १४ वर्षों की खट्टी-मीठी यादों को ताजा किया.  हुंकार लगा लगा कर अमर सिंह अपना मुलायम प्रेम दर्शाते रहे और पानी पी-पी कर कोसते रहे. जयाप्रदा को साथ लेकर आये अमर सिंह ने भीड़ तो अच्छी जुटाई लेकिन वोट बैंक कहीं नजर नहीं आया.

इटावा :  राष्ट्रीय लोकमंच पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव के गृह जनपद में एक जनसभा करके जमकर अपनी भड़ास निकाली. जनसभा में पहुंचे लोगों ने सोचा था कि पार्टी की नीतियों और मुद्दों पर बात होगी,  लेकिन जनसभा में तो अमर सिंह ने मुलायम सिंह के घर में ही उन्हें बुरा भला कहने के लिए लोकमंच का सहारा लिया और १४ वर्षों की खट्टी-मीठी यादों को ताजा किया.  हुंकार लगा लगा कर अमर सिंह अपना मुलायम प्रेम दर्शाते रहे और पानी पी-पी कर कोसते रहे. जयाप्रदा को साथ लेकर आये अमर सिंह ने भीड़ तो अच्छी जुटाई लेकिन वोट बैंक कहीं नजर नहीं आया.

अमर सिंह के नाम में तीन नाम समाहित है (अ) से (अमर ) (म) से (मुलायम) और (र) से (रामगोपाल) तो फिर समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह को अमर सिंह कैसे भूल सकते हैं. १४ वर्षों के अमर-मुलायम गठबंधन का रोना रोने को सत्ता परिवर्तन रैली का नाम दिया गया. मुलायम सिंह के परिवार, समाजवादी पार्टी को अमर सिंह पूरी जनसभा में कुलाचे भर-भर कर कोसते रहे. सत्ता परिवर्तन रैली के सहारे अमर सिंह ने अपना दिल तो हल्का कर लिया जो सब वह मुलायम के सामने नहीं कह सके वह इस रैली के सहारे कह लिया. हद तो तब हो गयी जब अमर सिंह ने कहा कि अम्बिका चौधरी कहते हैं कि शिल्पा शेट्टी की पतली कमर की थिरकन दिखा कर मुलायम की संस्कृति को तुमने ख़राब कर दिया है,  तो उन्होंने कहा कि हर वर्ष उन्हें सैफई महोत्सव में शिल्पा और उर्मिला को लाने की लम्बी चौड़ी लिस्ट पकड़ा दी जाती है तो उनका क्या दोष है? 

अमर सिंह से लेकर छुटभैये नेताओं तक ने मुलायम सिंह और समाजवादी पार्टी को ही निशाना बनाया. मुलायम सिंह को सादर प्रणाम कर भाषण की शुरुआत करते हुए अमर सिंह ने मुलायम चालीसा पढ़ना शुरु किया तो चालीस मिनट तक रुकने का नाम ही नहीं लिया.  बीच-बीच में रामगोपाल और आजम खां पर भी भड़ास निकाली. १४ वर्षों तक छोटे कद के मुलायम सिंह को अमर सिंह कंधे पर ढोते रहे लेकिन छोटे कद का एहसास नहीं होने दिया. कैश फॉर वोट मामले पर उन्हों ने कहा कि अपने बच्चों की कसम खा कर कहते हैं कि रेवती रमण सिंह बीजेपी के सांसदों को लेकर उनके घर नहीं आये. अमर सिंह की इस सत्ता परिवर्तन रैली ने इतना तो साफ़ कर दिया कि अमर सिंह के नाम में समाहित समाजवादी पार्टी उनके दिल से कभी नहीं निकलेगी,  इंतजार है तो सिर्फ इतना कि कब मुलायम सिंह उन्हें अपनी पार्टी में वापस बुलाते हैं.

इटावा से विकास मिश्र की रिपोर्ट.

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