नाथ संप्रदाय से दीक्षित योगी आदित्यनाथ राजनीति तो करते हैं भाजपा की, लेकिन वे पार्टी के प्राथमिक सदस्य तक नहीं हैं। इसकी वे जरूरत भी नहीं समझते। गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ को ‘पूर्वांचल की शान’ और भाजपा की आन के रूप में भी देखा जाता है। लेकिन कई दफा भाजपा की बेतुकी राजनीति उन्हें हताश भी करती है। ‘सच और न्याय’ के लिए योगी कभी-कभी उग्र हो जाते हैं। हालांकि, वे भाजपा के लिए समर्पित हैं। देश की मौजूदा राजनीति, भाजपा का भविष्य जैसे विषयों पर उनसे अखिलेश अखिल ने लंबी बातचीत की। पेश हैं संपादित अंश :
– आप योगी हैं?
— हम नाथ संप्रदाय से संबंधित हैं। इससे जुड़े प्रत्येक संन्यासी को योगी कहा जाता है। योगी लोभ लालच से ऊपर होता है। राष्ट्रचिंतन और समाज निर्माण ही उसका धर्म होता है।
– आप पहले योगी बने या भाजपा से जुड़े?
— मैं शुरू से ही राष्ट्रवादी रहा हूं। संघ के साथ पहले से ही जुड़ा था। जन कल्याण के लिए काम कर रहा था। पूज्य महंत अवैद्यनाथ जी का हमें सानिध्य मिला और उन्हीं से मैं दीक्षित भी हुआ। संन्यास ग्रहण किया और मंदिर आंदोलन में शामिल हुआ।
– आप भाजपा से कैसे जुड़े? क्या भाजपा ही राष्ट्रवादी पार्टी है?
— पूज्य महंत अवैद्य नाथ जी हालांकि अधिकतर चुनाव हिंदू महासभा से ही लड़ते रहे हैं। रामजन्म भूमि आंदोलन के दौरान 1991 और 1996 के चुनाव वे भाजपा से लड़े। मुझे राजनीति और धार्मिक ज्ञान की बातें उन्हीं से प्राप्त हुई हैं। 1998 से मैं संसद में हूं। राजनीति मेरे लिए साध्य नहीं है। अपने राष्ट्रवादी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए यह एक साधन मात्र है। इसे हम स्वीकार भी करते हैं। जहां तक राष्ट्रवादी होने की बात आप कह रहे हैं, किसी भी पार्टी के लोग राष्ट्रवादी हो सकते हैं। जहां तक भाजपा का सवाल है, तो उसकी स्थापना ही राष्ट्रवाद की नींव पर हुई है। उसके चिंतन और स्वभाव में राष्ट्रवाद है।
– आप राजनीति करते हैं भाजपा की, लेकिन उस पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं?
— राजनीति करने के लिए किसी का सदस्य होना जरूरी नहीं होता। मैं आज भी इस पार्टी का सदस्य नहीं हूं। मैं मूल्यों और सिद्धांतों में विश्वास करता हूं। मेरे जो मूल्य और सिद्धांत हैं, वही भाजपा के हैं। इसलिए सदस्य होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
– विधानसभा चुनाव के दौरान आप पार्टी से नाखुश थे?
— मैं पार्टी से नाखुश नहीं था। कुछ नेताओं से मैं ज्यादा नाखुश था। कुशवाहा के मसले पर मैं आज भी कह सकता हूं कि वह पार्टी के लायक नहीं थे। पार्टी की हार जिन कारणों से हुई हो, उसमें एक कारण कुशवाहा प्रकरण भी है।
– आप राजनीति करते हैं भाजपा की और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आपने राष्ट्रीय युवा वाहिनी को मैदान में उतारा था?
— ऐसा नहीं है। भाजपा ने कुछ जगहों से अपने उम्मीदवार नहीं खड़े किए थे। कुछ लोग खड़े थे, जिन्हें युवा वाहिनी समर्थन कर रहा था।
– विधानसभा चुनाव में आप भी ‘सीएम’ की कुर्सी देख रहे थे?
— कौन कहता है? मैं कोई पद नहीं ले सकता। मेरी दीक्षा भी इसी तरह की हुई है। मैं केवल विचारधारा के आधार पर भाजपा के साथ हूं। भाजपा देश में एकमात्र राष्ट्रवादी चिंतन वाली पार्टी है, जो देश के बारे में सोचती है और मैं उसके साथ खड़ा हूं।
– लेकिन भाजपा के भीतर तो पद को लेकर घमासान मचा हुआ है?
— हो सकता है। लेकिन पार्टी के भीतर जो कुछ भी हो रहा है, वह लोकतंत्र के लिए ठीक है। पार्टियों के भीतर भी लोकतंत्र होना चाहिए। भाजपा में लोकतांत्रिक मूल्य आज भी जीवित हैं। यही वह पार्टी है, जहां एक सामान्य कार्यकर्ता को पार्टी अध्यक्ष बना दिया जाता है।
– क्या पार्टी में प्रधानमंत्री के उम्मीदवार की कमी है?
— भाजपा में नेताओं की कमी नहीं है। इसी पार्टी में केवल लीडर है, बाकी पार्टियों में तो रीडर हैं। हमारे पास आडवाणी और नरेंद्र मोदी जैसे सक्षम नेता हैं। इन पर देश को नाज है।
– क्या यही दोनों प्रधानमंत्री के उम्मीदवार भी हैं?
— उम्मीदवार तो कोई भी बन सकता है। पार्टी जिसे पेश कर दे। अगला चुनाव आडवाणी और मोदी के नेतृत्व में ही लड़े जाएंगे और एनडीए की सरकार बनेगी।
– लेकिन नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के कई नेताओं पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं?
— आरोप लगाने वाले कौन हैं, उन्हें तो देखिए। नरेंद्र मोदी गुजरात में फिर लौट रहे हैं। उन्होंने विकास का जो काम किया है, वह सबके सामने है। उनके नेतृत्व को सबने सम्मान दिया है। कुछ राज्यों में कुछ नेताओं पर आरोप लगे हैं। पार्टी उसे देख रही है। ऐसे लोगों को भाजपा अन्य दलों की तरह बर्दाश्त नहीं करती।
– क्या आप मानते हैं कि भाजपा के मूल्यों में भी ह्लास हुआ है?
— समाज में कोई पूर्ण नहीं होता। कमियां सब में होती हैं, लेकिन भाजपा में अन्य दलों से कमियां कम हैं। अन्य राजनीतिक दल भ्रष्टाचारियों को पालते हैं, जबकि भाजपा उसे अलग कर देती है।
– आप निर्मल बाबा को जानते हैं?
— ये निर्मल कब से बाबा हो गए? वे किसी से दीक्षित तो हैं नहीं। ऐसे बाबाओं के बारे में क्या कहा जा सकता है?
– लेकिन इसी तरह के कई और बाबा लोगों को चूना लगाते फिर रहे हैं?
— मीडिया की मति भ्रष्ट हो गई है कि जनता की समस्या को छोड़कर ऐसे बाबाओं के पीछे पड़ी है। यह प्रेस ही है, जो अफजल जैसे आदमी को गुरु कह रहा है। प्रेस केवल हिंदू धमार्चार्यों के बारे में ही क्यों लिख रहे हैं? ईसाई पादरियों और मुस्लिम मौलवी तथा मौलानाओं के बारे में उन्हें जानकारी नहीं होती? उनकी करतूतें उन्हें दिखाई नहीं पड़तीं? इनके आचरणों के बारे में भी चर्चा की जानी चाहिए।
– बाबा रामदेव पर भी आरोप हैं?
— आरोप हैं, तो देश के कानून के मुताबिक उन पर भी कार्रवाई होगी। लेकिन वे बोल तो रहे हैं। भ्रष्टाचार के ऊपर आज कौन बोल रहा है? क्या कांग्रेस और अन्य दलों के नेता भ्रष्टाचार पर कुछ बोल रहे हैं। देश में ऐसा कब तक चलेगा?
– क्या आदिवासी को राष्ट्रपति बनाने की मुहिम से आप सहमत हैं?
— इस देश का हर आदमी आदिवासी है, सोनिया गांधी को छोड़कर। हमसब आदिवासी हैं। राजनीतिक पार्टियां इसका हल निकालेंगी। यह राजनीतिक मसला है। बेहतर आदमी राष्ट्रपति बने, ताकि देश का भला हो।
– आपके रहते हुए पूर्वांचल से भाजपा को ज्यादा लाभ नहीं हो सका?
— शायद, भाजपा प्रदेश में विकल्प नहीं दे सकी। जनता ने सपा में विकल्प देख लिया। देखिए, आगे क्या होता है? अभी तो प्रदेश सरकार की शुरुआत ही खराब है, तो अंत भी खराब ही होगा।
– आप कहना क्या चाहते हैं?
— देखिए, अभी दो महीने में केवल तबादलों का कारोबार चल रहा है। इतने समय में 30 हजार लोग तबादलों का शिकार हुए हैं। राज्य में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। हमें कहने में कोई ऐतराज नहीं कि जो लोग समाज में दहशत फैला रहे हैं, एक खास वर्ग के लोग हैं। कोई भी जिला ऐसा नहीं है जहां लूट, डकैती, दुष्कर्म और हत्या की घटनाएं नहीं हो रही है।
– फिर आप मौन क्यों हैं?
— समय आ गया है। एक बार फिर हमारी लड़ाई शुरू होगी। ऐसे अपराधियों को बेनकाब कर सबक सिखाया जाएगा।
– आप पूर्वांचल के सबसे महत्वपूर्ण सांसदों में से एक हैं। फिर भी पूर्वांचल पिछड़ा है?
— पूर्वी उत्तर प्रदेश देश का सबसे उर्वरा क्षेत्र है। देश और दुनिया को पहले भी इस क्षेत्र से नेतृत्व मिला है और अभी भी नेतृत्व करने की क्षमता है यहां के लोगों में। हम लोग यहां संकीर्ण राजनीति से उठकर काम कर रहे हैं। हमने अपने आचार और विचार से जनता के बीच पहचान बनाने की शुरुआत की है। हाल के समय से जनता किसी पार्टी और नेता पर सहज विश्वास नहीं करती, जनता ने हमें स्वीकार किया है। यह मामूली बात नहीं है। जहां तक इस क्षेत्र के पिछड़ेपन का सवाल है, इसके लिए हमारी केंद्र सरकार और पिछले वर्षों में प्रदेश सरकारें ज्यादा जिम्मेदार हैं। इस इलाके की आबादी 10 करोड़ के आस-पास है। सभी मिलें बंद पड़ी हैं। इस इलाके में बेहतर शिक्षण संस्थानों की कमी तो है ही, स्वास्थ्य सेवाओं का भी अकाल है। अब जाकर यहां एम्स बनाने की तैयारी चल रही है। हमलोग लगे हुए हैं कि पूर्वी उत्तर प्रदेश को कैसे आगे बढ़ाया जाए?
लेखक अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं तथा राष्ट्रीय साप्ताहिक हमवतन से जुड़े हुए हैं. उनका यह लेख हमवतन से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया जा रहा है


