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स्वयं को दोहरता है फैशन : डा. प्रभजोत बरार

यमुनानगर। फैशन स्वयं को दोहराता है। जो फैशन आज है, वहीं १५-२० साल उपरांत थोड़े बदलाव में फिर से नजर आ जाएगा। उक्त शब्द यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से आई असिस्टेंट प्रोफेसर डा. प्रभजोत बरार ने चौथे हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में फैशन टॉक इन वॉक इन विमेन सिनेमा विषय पर आयोजित संगोष्ठी के दौरान कहे। डा. बरार का मानना है कि फैशन ट्रेन के समान है। जो एक बार निकल गया, तो उसे पकड़ा नहीं जा सकता। फैशन के मामले में हमें स्वयं को अपटूडेट रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमें फैशन मेकर बनाना चाहिए, ना कि फालोवर। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमें किसी भी प्रकार के एक ब्रांड के प्रति क्रेजी नहीं होना चाहिए। बरार ने कहा कि आज के दौर में फैशन मल्टीपरपज हो गया है। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक कुर्ती को जींस, कैपरी, स्कर्ट, लैगिंगस, शॉर्टस के साथ पहना जा सकता है। जिससे इसका मल्टीपरपज हल होता है।

यमुनानगर। फैशन स्वयं को दोहराता है। जो फैशन आज है, वहीं १५-२० साल उपरांत थोड़े बदलाव में फिर से नजर आ जाएगा। उक्त शब्द यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से आई असिस्टेंट प्रोफेसर डा. प्रभजोत बरार ने चौथे हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में फैशन टॉक इन वॉक इन विमेन सिनेमा विषय पर आयोजित संगोष्ठी के दौरान कहे। डा. बरार का मानना है कि फैशन ट्रेन के समान है। जो एक बार निकल गया, तो उसे पकड़ा नहीं जा सकता। फैशन के मामले में हमें स्वयं को अपटूडेट रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमें फैशन मेकर बनाना चाहिए, ना कि फालोवर। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमें किसी भी प्रकार के एक ब्रांड के प्रति क्रेजी नहीं होना चाहिए। बरार ने कहा कि आज के दौर में फैशन मल्टीपरपज हो गया है। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक कुर्ती को जींस, कैपरी, स्कर्ट, लैगिंगस, शॉर्टस के साथ पहना जा सकता है। जिससे इसका मल्टीपरपज हल होता है।
डा. बरार ने विद्यार्थियों को हर दशक के बाद फैशन में हुए बदलाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने संगोष्ठी के दौरान एक सदी के फैशन पर विस्तार से चर्चा की। जिसमें उन्होंने दशक के हिसाब से बताया। उन्होंने कहा फैशन एक रिसाइकिल की तरह है, जो घूमता रहता है। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष १९९० में जो फैशन चला था, उसे आज कल थोड़े बदलाव के बाद देखा जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने पारंपरिक भारतीय हैडलूम फैबरिक व पावर लूम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डा. बरार ने कहा कि जब से महिलाओं ने घर की चारदीवारी छोडक़र नौकरी करना शुरू किया है, तभी से उनकी ड्रेसेज में भी बदलाव देने को मिल रहा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि फैशन डिजाइनर रितु कुमार, रितू बेरी, जेजे वलाया, मनीष मल्होत्रा, मनीष अरोड़ा इत्यादि ने वर्ष १९८० के करीब फैशन के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। उपरोक्त फैशन डिजाइनरों की बदौलत भारतीय फैशन पूरे वर्ल्‍ड में मशहूर है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि फैशन को लेकर कुछ लोग क्रिएटिव होते हैं, जबकि कुछ लोग फैशन को कॉपी करते हैं। उन्होंने कहा कि जो मार्केट में मिलता है, वहीं फैशन होता है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे लेटेस्ट फैशन की जानकारी होना बेहद जरुरी है। इसके अलावा उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए सवालों का बड़ी संजीदगी से जवाब दिया। डा. दीपिका ने कहा कि कालेज में फैशन डिजाइनिंग विभाग द्वारा फैशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फैशन से हमें सोशल स्टैंडर्ड का पता चलता है। हम जिस क्षेत्र में रहते हैं, वहां पर उसी के हिसाब से फैशन मिलेगा। कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों ने छात्राओं में फैशन के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। आने वाले समय में भी इस प्रकार के आयोजन किए जाएंगे। मौके पर डा. विश्वप्रभा, डा. दीपिका, फैशन विभाग से डोली लांबा, कंचन मदान, पारूल, नीतू व शालू उपस्थित रहीं। प्रेस रिलीज

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