हमें कौन रोकेगा? हम हैं पत्रकार…. हमें किसी का खौफ नहीं है? किसमें है हिम्मत जो हमें रोकेगा, टोकेगा? मुरादाबाद शहर में ये शब्द इस तस्वीर से बोलते हुए साफ़ दिखाई देते हैं। समाज को सच का आईना दिखाने वाले पत्रकार, लेखक यदि इस प्रकार की हरकत करने लगे तो औरों का क्या होगा। हालाँकि ये सच है कि इस प्रकार की हरकत नौसिखिए पत्रकार के अलावा और कोई नहीं कर सकता। पूरे रौब में चलना पुलिस के सिपाही, होम गार्ड पर अपनी धौंस जमा कर शोखी बघारना। ये कर दूँगा…वो कर दूँगा…मुझे जानते नहीं हो…जैसे शब्दों का प्रयोग कर पत्रकारिता जगत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। पैसे दे कर कार्ड धारक बन कर पत्रकारों की जमात में शामिल हो कर पत्रकारिता को कलंकित करते इन नौसिखिए कार्ड धारकों को कौन समझाए? कौन समझाए उन्हें जो ऐसे लोगो को प्रेस कार्ड उपलब्ध करवाते हैं?
जाहिर है इसके बदले पैसे लिए जाते हैं जिसके बाद उन्हें कार्ड मुहैय्या कराया जाता है। वहीँ दूसरी तरफ पुलिस को खुद कानून पढ़ाने वाले पत्रकारों की जमात में शामिल हो कर अपना उल्लू सीधा करते हुए पत्रकारिता जगत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते यदि यही दशा रही तो वो दिन दूर नहीं जब पत्रकारों का औचित्य समाप्त हो जायेगा। शहर में इन दिनों मुख्य सड़कों पर चल रहे वाहनों का सर्वे किया जाये तो प्रति १० मिनट में आपको एक प्रेस/पत्रकार लिखे हुए वाहन मिल ही जायेंगे, अगर इसमें पुलिस के मार्का वाले वाहन को शामिल कर लिया जाये तो प्रति ५ मिनट में एक ऐसा वाहन जरूर मिलेगा, जिस पर प्रेस /पत्रकार या पुलिस लिखा हुआ ज़रूर होगा।
जबकि पत्रकारों की वयस्तता भरे जीवन और समय से समाचार का संकलन
करने में कोई रुकावट न आये इसलिए पत्रकारों के वाहन पर प्रेस लिखा होना आवश्यक भी हो जाता है, लेकिन आज इसका नए और नौसिखिए पत्रकार गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इस प्रकार से हो रहे प्रेस के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए इनके वाहनों की भी विधिवत चेकिंग होनी चाहिए, जिससे कुकुरमुत्तों की तरह फ़ैल रहे प्रेस लिखे वाहनों की संख्या में कमी आयगी। हालाँकि इस तरह से उठाये गए कदम से शुरुआती समय में पत्रकारों को थोड़ी असुविधा ज़रूर होगी, लेकिन कुकुरमुत्तों की भांति फ़ैल रहे ऐसे वाहनों और अवैध पत्रकारों से निजात के साथ पत्रकारिता जगत के औचित्य को बनाये रखने में सहायता भी मिल सकेगी।
लेखक इमरान जहीर मुरादाबाद के युवा पत्रकार हैं.


