नेशनल आरटीआई फोरम की कन्वेनर डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ खंडपीठ में दायर पीआईएल संख्या 1574/2012 में आज जस्टिस उमानाथ सिंह और जस्टिस रितुराज अवस्थी की खंडपीठ ने सीबीआई को उसकी प्रतिष्ठा और मानव अधिकारों से जुड़े इस रिट याचिका में दो सप्ताह में अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं. यह पीआईएल अभी हाल के दिनों में सीबीआई द्वारा पूछताछ करने के बाद अकस्मात रहस्यमयी स्थितियों में लोगों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाओं के दृष्टिगत दायर किया गया था.
याचिका में कहा गया था कि लोगों की अब तक यह धारणा बनी हुई थी कि सीबीआई अपनी विवेचना में पूछताछ के दौरान मारपीट और दूसरे पुलिसिया तरीकों का इस्तेमाल नहीं करती है. लेकिन हाल की कुछ घटनाओं से सीबीआई की इस छवि पर प्रश्नचिन्ह लगे हैं. इनमे एनआरएचएम घोटाले से जुड़े उत्तर प्रदेश जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर सुनील वर्मा और रविन्द्र त्यागी हत्याकांड से जुड़े दिल्ली के व्यवसायी रविन्द्र सिंह की संदिग्ध स्थितियों में की गयी आत्महत्याएं महत्वपूर्ण हैं.
इन घटनाओं के आधार पर डॉ. नूतन ठाकुर ने यह प्रार्थना की कि यह आवश्यक हो गया है कि सीबीआई कुछ ऐसे कदम उठाये जिससे उसकी छवि बची रहे और मानव अधिकार हनन पर भी रोक लगे. इसमें पूरे देश भर के सीबीआई कार्यालयों के गेट पर आगंतुक रजिस्टर और सीसीटीवी के प्रयोग की बात कही गयी है. इसी प्रकार से यह भी सुझाव दिया गया है कि सीबीआई अपने समस्त कार्यालयों में अपने सभी साक्षियों से एक खास कक्ष में ही पूछताछ करे और उसमें भी सीसीटीवी का प्रयोग किया जाये. उच्च न्यायालय ने इन सभी बिंदुओं पर सीबीआई से दो सप्ताह में अपना पक्ष प्रस्तुत करने के आदेश निर्गत किये हैं.


