विकीलीक्स के खुलासे के नाम पर कुछ समय से वेब मीडिया पर इस बात को प्रचारित किया जा रहा है कि कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने यह कहा था कि ‘‘भारत को हिन्दुत्व से खतरा है’’. इसी बात को लेकर एक महाशय लिखते हैं कि ‘‘राहुल ने अमेरिकी राजदूत से कहा था- भारतीय मुसलमानों के बीच कुछ ऐसे तत्व हैं जो लश्कर-ए-तैयबा जैसे इस्लामिक संगठनों का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन उससे बड़ा ख़तरा तेजी से पांव पसार रहे चरमपंथी हिंदू संगठनों से है जो मुस्लिम समुदाय से धार्मिक तनाव और राजनैतिक वैमनस्य पैदा कर रहे हैं.’’
सर्वप्रथम तो इस प्रकार के खुलासे की सत्यता का कहीं कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं दिया जा रहा है. दूसरे इस प्रकार की बात राहुल गांधी के बयान के बारे में लिखी गयी हैं, जिसे लेकर कांग्रेस विरोध मात्र के लिये ही जन्मे कुछ लोग जमकर हो हल्ला मचा रहे हैं. जबकि पहली नजर में इस वाक्य में जिसे राहुल गांधी का बयान बताया जा रहा है, कुछ भी गलत या असत्य नजर नहीं आता है, जिसमें भारत को खतरा ‘चरमपंथी हिंदू संगठनों से’ बताया गया है. भारत का मतलब है एक ऐसा देश जिसमें सांप और सपेरे बसते हैं. जिस देश में कोई भी आक्रान्ता या लुटेरा आता है और भारत तथा भारत के लोगों को लूटता है और चला जाता है. भारत की बहन-बेटियों की इज्जत को तार-तार कर देता है और भारत के हिन्दू अपने भगवान को रक्षक मानकर मूकदर्शक बने देखते रहते हैं.
जिन्दगीभर हत्याएँ करने वाले सम्राट अशोक का अचानक हृदय परिवर्तित हो जाता है तो उसे हम भारतीय महान सम्राट अशोक का दर्जा दे देते हैं. इस्लाम के अलावा अन्य धर्मों का सम्मान करने की बात करने और कहने वाले बादशाह अकबर को भी हम अशोक की ही भांति महानता का तमगा थमा देते हैं. अंग्रेज आते हैं और देश का सारा धन विदेशों में ले जाते हैं. आज भी ले जा रहे हैं और सदैव की भांति इस देश का हिन्दू ‘‘वसुधैव कुटम्बकम्’’ का नारा देकर चुप बैठे रहते हैं.
यही नहीं, भारतीय हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा हिस्सा (ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य के बाद शेष आबादी) अर्थात् शूद्र वर्ग हजारों वर्ष से मुट्ठीभर उच्च जातीय हिन्दुओं के अत्याचारों और मनमानी को अपनी नियति मानकर सहता और झेलता रहता है. भारत की हिन्दू स्त्री को दोयम दर्जे का नागरिक, बल्कि निरीह प्राणी समझा जाता रहा है. इसके बाद भी भारत की स्त्री हजारों वर्षों से चुपचाप इसे सहती रही है. इसके उपरान्त भी स्त्री को कागजी सम्मान देने के लिये उसे देवी बना दिया जाता है. जिसे एक कवियत्री “स्त्री की त्रासदी” बताती हैं और कहती हैं कि “स्त्री या तो देवी है या दासी.”
भारत की इस स्थिति को भारत के कथित उच्च पदस्थ हिन्दू, हिन्दुत्व की धार्मिक ताकत कहते रहे हैं. इसी को भारत की महान संस्कृति कहते रहे हैं क्योंकि मुट्ठीभर हिन्दुओं की इस नीति से शेष सभी हिन्दुओं को मानसिक रूप से गुलाम बनाये रखने में बड़ी भारी आसानी रही है. लेकिन पहली बार भारत के हिन्दू का बहुसंख्यक और मुट्ठीभर हिन्दू बदल रहा है. भारत की स्त्री भी बदल रही है. बहुसंख्यक भारत हिन्दुत्व की धार्मिक गुलामी के खिलाफ खड़ा हो रहा है. स्त्री अपनी धार्मिक एवं सामाजिक गुलामी से मुक्ति के लिये सक्षम होकर संघर्ष कर रही है, बल्कि छटपटा रही है. मुट्ठीभर हिन्दू जिनका काम शूद्रों और स्त्रियों को गुलाम बनाये रखना था, उसे समझ में आ गया है कि अब स्त्री और शूद्र को फिर से पुराने तरीकों से गुलाम बनाये रखना सम्भव नहीं है. ऐसे में वह उग्र हिन्दुत्व और इस्लाम विरोध के नाम पर फिर से हिन्दुत्व का राग अलाप रहा है.
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को आक्रामक मुद्रा में दर्शा रहा है और विधर्मियों का खतरा दिखा कर अपने ही नेतृत्व में फिर से सम्पूर्ण स्त्रियों सहित, शूद्र हिन्दुओं को एकजुट होने का आह्वान कर रहा है. इसलिए ताकि हिन्दू धर्म के नाम पर शोषण करने वाला मुट्ठीभर हिन्दू फिर से हिन्दू धर्म को इस्लाम और इसाइयत से खतरा दिखाकर सारे हिन्दू धर्मावलम्बियों को एकजुट कर सकें. क्योंकि अब भोले-भाले शूद्र मनु या वेदव्यास या तुलसीदास के धर्मादेशों से तो एकजुट हो नहीं सकते. ऐसे में हिन्दुओं के बड़े वर्ग (शूद्र-दलित, आदिवासी, पिछड़े और सम्पूर्ण वर्गों की स्त्री) को गुलाम बनाने के लिये नये-नये राजनैतिक और कूटनीतिक तरीके ईजाद किये जा रहे हैं.
इसमें से एक बहुत बड़ा और खतरनाक तरीका है- लगातार यह सिद्ध करते रहना कि भारत को इस्लाम से खतरा है, भारत को सोनिया से खतरा है, भारत को इसाइयत से खतरा है, भारत को अंग्रेजी से नहीं, अंग्रेजों से खतरा है, भारत को मुस्लिम वोटरों से नहीं, मुस्लिम धर्म से खतरा है, भारत को धर्म निरपेक्षता से खतरा है, भारत को समाजवादी और सामाजिक न्यायवादियों से खतरा है, भारत को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा और कम्यूनिस्टों से खतरा है, यहां तक कि द्रविड़ पार्टियों से भी भारत को खतरा है… इस प्रकार की छद्म बातें करने वाले लोगों का भारत हिन्दुत्व को मजबूत करने से मजबूत होता है, लेकिन साथ ही साथ हिन्दू शूद्रों और हिन्दू स्त्रियों के ताकतवर होने से इनका महान भारत कमजोर होता है.
यही तो कारण हैं कि हृदय परिवर्तन के जरिये बदलाव लाने की बात करने वाले और अनशन को हृदय परिवर्तन का सबसे ताकतवर अहिंसक माध्यम बतलाने वाले मोहन दास कर्मचन्द गॉंधी भारत के बहुसंख्यक शूद्रों के उत्थान के लिये स्वीकृत सैपरेट इलेक्ट्रोल को छीनने के लिये अनशन करते हैं और शूद्रों से छलावा करके सैपरेट इलेक्ट्रोल के अधिकार को छीनकर शूद्रों को हमेशा के लिये पंगु बना देते हैं. यही नहीं, गॉंधी डॉ. अम्बेडकर को विवश कर देते हैं कि वे शूद्रों के लिये सरकारी सेवाओं और विधानमण्डलों में आरक्षण के प्रावधान को मानें और सैपरेट इलेक्ट्रोल की मांग को छोड़ें, क्योंकि इससे भारत का हिन्दुत्व मजबूत होता है. लेकिन गांधी के हिन्दुत्व से उत्पन्न गांधी के मानसपुत्रों को गांधी के शूद्रों को आरक्षण देने के विचार से भी हिन्दुत्व को खतरा उत्पन्न होता दिख रहा है. इसलिये उन्हें स्त्रियों, पिछड़ों, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को नौकरियों, शिक्षण संस्थानों और विधान मंडलों में आरक्षण देने से देश कमजोर होता नजर आ रहा है, हिन्दुत्व कमजोर होता नजर आ रहा है, उन्हें उनका महान भारत कमजोर होता नजर आ रहा है.
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि स्त्रियों, पिछड़ों, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों के उत्थान और सत्ता तथा संसाधनों में समान भागीदारी का विरोध करने वाले हिंदुत्व के पुजारियों को, बतलाना चाहिये कि वे कौन से भारत के कमजोर होने की बात कर रहे हैं. वह कौनसा भारत है जो स्त्रियों, पिछड़ों, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों के ताकतवर होने से कमजोर होगा? वह कौनसा भारत है जो स्त्रियों, पिछड़ों, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सत्ता, संसाधनों एवं प्रशासन में समान भागीदारी देने से रसातल में चला जायेगा? वह कौनसा हिन्दुत्व है जो हिन्दू स्त्रियों, हिन्दू पिछड़ों, हिन्दू आदिवासियों, हिन्दू दलितों और हिन्दू अल्पसंख्यकों के मानवीय उत्थान और इनके सम्मान की रक्षा से टूट सकता है? मुसलमानों को शिक्षा और नौकरी देने में सामना अवसर देने से भारत कैसे टूट जायेगा?
इस क्रूर षडयन्त्र को समय रहते इस देश के बहुसंख्यक लोगों को समझना होगा अन्यथा मुट्ठीभर हिन्दुत्व के सौदागर भारत के सच्चे हिन्दुओं के हकों का कभी भी गला घोंट सकते हैं. क्योंकि इनका न तो हिन्दुत्व से कोई लेना-देना है और न ही राष्ट्रवाद से. इनका सीधा और साफ उद्देश्य है येनकेन प्रकारेण भारत की सत्ता पर काबिज होना और भारत को लूटना. अभी भी अनेक क्षेत्रों में ये लूट ही रहे हैं.
ऐसे में भारत के हिन्दुओं को जागना होगा और हिन्दुत्व को खतरे के नाम पर हिन्दुओं को बरगलाने वाले धोखेबाजों से सावधान रहना होगा क्योंकि ये हिन्दुत्व के वेष में हिन्दू धर्म और बहुसंख्यक हिन्दू आबादी के सबसे बड़े दुश्मन हैं. हिन्दुओं को गुलाम बनाने के लिये ये बहरूपिये, शूद्र हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ाने के बहाने ढूँढते रहते हैं, जिसके लिये हिन्दुओं को आतंकवादी विचारधारा में झोंकने से भी नहीं चूक रहे हैं. यदि राहुल ने ऐसे लोगों या विचारधारा से भारत को खतरा बतलाया है तो इसमें कौनसी गलत बात कही है? ऐसे खतरनाक लोगों से भी क्या भारत को खतरा नहीं है? निश्चय ही ऐसे लोग भारत के लिये सबसे बड़ा खतरा हैं, क्योंकि सत्य तो यही है कि भारत का मतलब है, “बहुसंख्यक भारत के लोगों का भारत!”. सबसे घिनौनी बात तो यह है कि हिन्दुत्व को ताकतवर करने के नाम पर देशवासियों को बरगालने वाले हर हाल में एक ही घिनौना सूत्र लेकर चल रहे हैं कि हिन्दुत्व को ताकतवर बनाने की बात करते रहो, लेकिन हिन्दू शूद्रों और स्त्रियों को दबाये रखो, क्योंकि इनके कमजोर होने से हिन्दुत्व और भारत कमजोर होता है.
ये विचार डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ के हैं.


