Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रदेश

हे वित्‍तमंत्री! गैस पर इतनी सब्सिडी मत दे देना कि चूल्‍हें पर चढ़ाने को दाल न मिले

हे वित्तमंत्री, गैस पर इतनी भी सब्सिडी मत देना कि चूल्हा ही रह जाये और उस पर चढ़ाने को दाल न मिले। हम जानते हैं कि आपके पास सीमित धन है क्योंकि आप एक ईमानदार देश के नेता हैं। हम यह समझते हैं कि आप एक जगह से निकाल कर ही दूसरी जगह पैसा डाल पाते हैं। आप इधर का माल उधर करते हैं तभी सब सुचारू रूप से चल पाता है स्वामी। इसीलिये आपसे हाथ जोड़ विनती करते हैं कि गैस, तेल, उद्योगादि की सब्सिडी थोड़ी कम करके बेचारे किसानों को दे दें क्योंकि हम मोबाइल, कार नहीं खाते। हम तो वही खाते हैं, जो वह उगाता है।

हे वित्तमंत्री, गैस पर इतनी भी सब्सिडी मत देना कि चूल्हा ही रह जाये और उस पर चढ़ाने को दाल न मिले। हम जानते हैं कि आपके पास सीमित धन है क्योंकि आप एक ईमानदार देश के नेता हैं। हम यह समझते हैं कि आप एक जगह से निकाल कर ही दूसरी जगह पैसा डाल पाते हैं। आप इधर का माल उधर करते हैं तभी सब सुचारू रूप से चल पाता है स्वामी। इसीलिये आपसे हाथ जोड़ विनती करते हैं कि गैस, तेल, उद्योगादि की सब्सिडी थोड़ी कम करके बेचारे किसानों को दे दें क्योंकि हम मोबाइल, कार नहीं खाते। हम तो वही खाते हैं, जो वह उगाता है।

हे वित्तमंत्री, किसानों के घर जाते ही लगता है मानो बिना वीज़ा के हम सोमालिया आ गये हैं। हम भारत में ही रहना चाहते हैं प्रभो, अत: आपसे विनम्र निवेदन है कि यह सुविधा तुरन्त समाप्त कर दें। देव, चीन आँखें लाल-लाल करके लगातार घूरता रहता है, आप उसका भी कुछ करें। इसके लिये आप रक्षा देव की तपस्या करने को मत कहियेगा। आप देवों के देव हैं। सब आपसे ही संचालित हैं। आपके बिना यहाँ क्या हो सकता है भगवन? हम अल्पबुद्धि प्राणी आपकी स्तुति किन शब्दों में करें, यह समझ नहीं पाते हैं। स्वामी, देवाधिदेव प्रधानमंत्री जी अपने गण विदेश मंत्री जी के सहयोग से जाने किस-किस लोक से, कितने ही प्रयत्नों से धन मांगकर लाते हैं। उस समय उनकी स्थिति किसी भिक्षु की सी हो जाती है। हमारे पूज्यों की ऐसी हालत देख मेरा मन द्रवित हो उठता है प्रभु।

पर आप उस धन को र्निलिप्त भाव से हम अंकिचनों में बाँट देते हैं। आप दयासिंधु हैं देव। आपसे कुछ नहीं छिपा है प्रभु। आप सब जानते हैं, पर मन नहीं मानता आपसे कहे बिना। आप दाता हैं, अपना दु:खड़ा आपसे न कहें तो किससे कहें? आप जब ऊपर से हज़ारों करोड़ रुपये बरसाते हैं तो आँखों में चमक आ जाती है। पर नीचे धरती पर हर बार चवन्नी ही हाथ आती है प्रभो। बीच में उडक़र सब इधर-उधर गिर जाता है। हमारी धृष्टता को क्षमा करना स्वामी, पर इस बार निशाना कुछ ठीक कर लेना। आपको बारम्बार प्रणाम!!!

साध्वी चिदर्पिता गौतम का यह लिखा उनके ब्लाग मेरी ज़मीं मेरा आसमां से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया गया है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...