देवरिया। जिले में जालसाजी कर अध्यापक बनने का होड़ लगा हुआ है। रसूखदार इसी फर्जीवाड़े के सहारे कई वर्षों से गुरुजी बन सरकार का करोड़ों रुपया प्रतिमाह वेतन के रूप में गटक रहे हैं। जब कभी जांच होती है तो थोड़े बहुत मामले पकड़ में आ जाते हैं। हाल ही में फर्जी अंक पत्र लगाकर शिक्षक बनने वाले 32 मामलों का खुलासा हुआ है, जिसमें दोषी पाए लोगों के खिलाफ शुक्रवार को जालसाजी करने का मुकदमा पुलिस थाने में दर्ज किया गया है। पुलिस इन जालसाज गुरुओं को पकड़ने के लिए उनके घरों पर दबिश दे रही है। बताया जाता है कि ज्यादातर ने संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी का फर्जी अंक पत्र लगाया है। फर्जी शिक्षकों में एक ही गांव के चार तथा दो सगी बहनें एवं एक बसपा नेता की बेटी भी शामिल है।
वर्ष 2011 में जिले में बीटीसी प्रशिक्षण के लिए 200 सीटें थी। इसमें 20 सीटें शिक्षा मित्रों के लिए आरक्षित थी। मेरिट में अव्वल आने वाले लोगों की काउसंलिंग के समय ही विभाग ने मूल प्रमाण पत्र जमा करा लिए थे। जब विभाग ने इसकी जांच कराई तो इसमें से 32 लोगों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। जानकारी के अनुसार से 29 लोगों ने संपूर्णानन्द विश्वविद्यालय तथा 3 लोगों ने बीए का फर्जी अंक पत्र लगाकर जालसाजी के जरिये गुरुजी बनने के लिए धोखाधड़ी किया। जबकि इण्टरमीडिएट एवं हाई स्कूल के प्रमाण पत्रों की जांच अभी जारी है। इस बारे में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं प्रभारी डायट प्राचार्य एएन मौर्या ने बताया कि दोषी पाये लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468 एवं 471 के तहत पुलिस थाना रामपुर कारखाना में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।
देवरिया से ओपी श्रीवास्तव की रिपोर्ट.


