: पांचवीं कक्षा से हिंदी बाहर : कपिल पाटिल ने किया विरोध : साठ हजार शिक्षक हो जाएंगे बेरोजगार : मुंबई : एक तरफ दुनियाभर के शक्तिशाली देश अपने नागरिकों को हिंदी सिखाने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ से अपने ही देश में हिंदी के साथ ऐसा द्वेषपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है कि आने वाली पीढ़ी के लिए यह भाषा ही अपरिचित हो जाए. महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडल पांचवीं कक्षा से अनिवार्य तीन भाषाओं की सूची में से हिंदी को बाहर करने पर तुली हुई है. शिक्षक विधायक कपिल यह मामला विधान परिषद में भी उठा चुके हैं. अगले सप्ताह इस पर सदन में चर्चा होने वाली है.
लोकभारती के अध्यक्ष विधान परिषद सदस्य कपिल पाटिल ने बताया कि हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूलों के अलावा अन्य मीडियम के सरकारी स्कूलों में पांचवीं कक्षा से हिंदी, मराठी व अंग्रेजी भाषा अनिवार्य भाषा के रुप में पढ़ाई जाती है. पर अब राज्य शिक्षण मंडल हिंदी को अनिवार्य भाषा की सूची से बाहर कर रहा है. पाटिल ने कहा कि मुझे यह बात समझ में नहीं आ रही है कि इसकी जरुरत क्यों आन पड़ी. वे कहते हैं कि हिंदी देश में सबसे ज्यादा समझी व बोली जाने वाली भाषा है. यह देश की राजभाषा के साथ-साथ सम्पर्क भाषा भी है और रोजगार का बड़ा माध्यम भी, यदि पांचवीं कक्षा से गैर हिंदी माध्यम स्कूलों के बच्चे हिंदी नहीं पढ़ेंगे तो वे कभी भी इस भाषा से परिचित नहीं हो पाएंगे.
पाटिल ने मंगलवार को यह मसला विधान परिषद में उठाया था. इसका शिवसेना सहित अन्य सदस्यों ने भी समर्थन किया. सभापति शिवाजीराव देशमुख ने इस विषय पर अगले सप्ताह चर्चा कराए जाने का आश्वासन दिया है. पाटिल ने बताया कि यह फैसला लागू हुआ तो हिंदी माध्यम के ६० हजार शिक्षक भी बेरोजगार हो जाएंगे. विधायक पाटिल का कहना है कि जब राज्य सरकार ने भाषा नीति में कोई परिवर्तन नहीं किया है तो राज्य शिक्षण मंडल को इस तरह का फैसला लेने की जरुरत क्यों पड़ गई. इसका खुलासा होना चाहिए. उन्होंने विश्वास जताया कि सदन में चर्चा के दौरान इस मसले को लेकर सरकार अपना पक्ष रखेगी तो स्थिति स्पष्ट होगी. उन्होंने कहा कि हिंदी के अलावा अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों से मराठी को समाप्त करने की साजिश हो रही है. अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में मराठी का जो पाठ्यक्रम स्वीकार किया गया है. वह इतना कठिन है कि बच्चे यह विषय पढ़ना ही नहीं चाहेंगे.
मुंबई से विजय सिंह कौशिक की रिपोर्ट.


