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काटजूजी, लखनऊ में पत्रकारिता के नाम पर दलाली करने वालों की जांच कराएं

सेवा में, माननीय श्री काटजू जी, अध्यक्ष, भारतीय प्रेस परिषद, नई दिल्ली। महोदय, सबसे पहले मैं आपका यूपी की तीन दिवसीय दौरे के आगमन पर स्वागत करता हूं। प्रेस की सर्वोच्च संस्था प्रेस परिषद में आप जैसे गौरवमान जस्टिस का अध्यक्ष पद पर रहना हम सभी पत्रकारों के लिए एक गौरव है। क्योंकि आप जैसे निर्भीक व स्पष्‍टवादी अध्यक्ष से मुझे पत्रकारिता के स्तर को सुधारने वाला एक ऐसा महायोद्वा मिला है जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता। आपकी सोच पूरी तरह से पत्रकारिता के स्तर को सुधारने व पत्रकारिता के क्या मापदंड होने चाहिये उस पर खरी उतरती है। आपने जब से इस पद को सम्हाला है तब से लेकर अब तक आपने मीडिया के चेहरे को सुधारने के लिए अहम बातें देश के सामने रखी हैं, जिसका मैं स्वागत करता हूं। हो सकता है कि कुछ लोगों ने आपके दिए गये वक्‍तव्‍य को पसंद न किया हो लेकिन आपकी स्पष्ट बातों का हम लगातार स्वागत करते हैं।

सेवा में, माननीय श्री काटजू जी, अध्यक्ष, भारतीय प्रेस परिषद, नई दिल्ली। महोदय, सबसे पहले मैं आपका यूपी की तीन दिवसीय दौरे के आगमन पर स्वागत करता हूं। प्रेस की सर्वोच्च संस्था प्रेस परिषद में आप जैसे गौरवमान जस्टिस का अध्यक्ष पद पर रहना हम सभी पत्रकारों के लिए एक गौरव है। क्योंकि आप जैसे निर्भीक व स्पष्‍टवादी अध्यक्ष से मुझे पत्रकारिता के स्तर को सुधारने वाला एक ऐसा महायोद्वा मिला है जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता। आपकी सोच पूरी तरह से पत्रकारिता के स्तर को सुधारने व पत्रकारिता के क्या मापदंड होने चाहिये उस पर खरी उतरती है। आपने जब से इस पद को सम्हाला है तब से लेकर अब तक आपने मीडिया के चेहरे को सुधारने के लिए अहम बातें देश के सामने रखी हैं, जिसका मैं स्वागत करता हूं। हो सकता है कि कुछ लोगों ने आपके दिए गये वक्‍तव्‍य को पसंद न किया हो लेकिन आपकी स्पष्ट बातों का हम लगातार स्वागत करते हैं।

गत दिनों एनेक्सी मीडिया सेंटर में आयोजित आपकी प्रेस वार्ता के समय हुए कुछ बबाल की मैं तहे दिल से निंदा करता हूं तथा आशा करता हूं कि ऐसी घटनाएं कभी दुबारा न हों। लेकिन मैं आपको यूपी की पत्रकारिता के बारे में कुछ विस्तार से भी बताना चाहता हूं। जिस पर आप तत्काल कार्रवाई करके मुझे और मेरे द्वारा दिए जा रहे पत्रकारों के हितों के ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करेंगे और उसे अंजाम तक अवश्‍य पंहुचाएंगे ऐसी मुझे आशा है। आप जैसे ईमानदार जस्टिस से मैं न्याय की आशा जरूर करता हूं।

पहले मैं आपकों अपना परिचय दे दूं। मैं राजधानी लखनऊ से प्रकाशित दैनिक ‘समाजवाद का उदय’ समाचार पत्र का ब्यूरो प्रमुख हूं। यह समाचार पत्र पिछले 15 वर्षो से निर्भीक व स्पष्ट खबरों के लिए नियमित प्रकाशित होता आ रहा है। आज तक इस समाचार पत्र ने कोई पीत पत्रकारिता नहीं की है। यह समाचार पत्र भारत सरकार डीएवीपी से मान्यता प्राप्त समाचार पत्र है जिसकी प्रकाशक मुद्रक तथा सम्पादक मेरी पत्नी ममता त्रिपाठी हैं। मैं यूपी राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त संवाददाता हूं। मैं यूपी मान्यता संवाददाता समिति में कई बार अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ चुका हूं। लेकिन जीत नहीं सका। क्योंकि मैं स्पष्ट रूप से पत्रकारों के हितों में होने वाली बातों की बेबाक टिप्पणी करता हूं। और पिछले 20 वर्षों से यूपी के पत्रकारों के हितों की बात को पत्रकारों के फोरम में रखता आया हूं। मैंने जब से राजधानी लखनऊ में पत्रकारिता शुरू की है तब से लेकर अब तक मैं लगातार पत्रकारों की समस्या को लेकर जूझ रहा हूं। मैं आपसे अपने इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए आशीर्वाद चाहता हूं और मैं जो पत्रकारों के हितों के लिये कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु आपकों ज्ञापन के रूप में दे रहा हूं। कृपया करके इस ज्ञापन में दिए जा रहे बिन्दुओं को तत्काल दूर कराने का कार्य करें, जिससे यूपी की पत्रकारिता में पीड़ित समाचार पत्र व पत्रकारों के हितों की रक्षा की जा सके।

पिछले दिनों प्रेस वार्ता में जो कुछ हुआ वह इन सभी दिए जा रहे बिन्दुओं से प्रभावित होता है। इसके साथ ही मैं आपको यह भी अवगत कराना चाहता हूं कि यूपी में धर्म के नाम पर अब पत्रकारिता की खाई खोदी जा रही है, जो एक गम्भीर विषय बन रहा है, जो आने वाले समय में काफी विस्फोटक स्थिति में खड़ी कर सकता है। धर्म के नाम पर पत्रकारों को एकत्र करके एक समुदाय को धमकी देना और उस पर लगातार राजनीति का चोला पहनाना आने वाले समय में काफी घातक हो सकता है। मैंने अपनी जो लड़ाई पत्रकारों के हितों के लिए यूपी की राजधानी लखनऊ में पत्रकारों के लिए अब तक लड़ी है उसमें कई दोस्त भी है, लेकिन दुश्‍मन जादा बन गये हैं, जिससे मुझे अपनी जानमाल का भी खतरा लगातार दिखाई देता रहता है। लेकिन अगर मैं पत्रकारों के हितों के लिए लड़ी जा रही लड़ाई में सही बात को बेबाक रूप से पत्रकारों के हितों के लिए रख रहा हूं तो उसके लिए अगर मेरी जान भी चली जाए तो कोई मुझे गिला-शिकवा नहीं होगा। क्योंकि सही बात करने वाला अकसर कुछ न कुछ तो परेशानी में पड़ता है। मैं यह बातें आपके संज्ञान में इस लिए ला रहा हं कि अगर मुझे कुछ होता है तो आपकी प्रेस परिषद इस मुद्दे को गंभीरता से संज्ञान में लाकर दोषी लोगों को दण्डित अवश्‍य करेगी। मैं आपको यूपी की पत्रकारिता में लगातार बढ़ रहे असंतोष व पत्रकारों के हितों पर हो रहे कुठाराघात के बिन्दुवार मुद्दे आपको ज्ञापन के रूप में दे रहा हूं। जिसे आप संज्ञान में लेकर आवश्‍यक कार्रवाई कर सकें और मेरे सुझाव को सभी छोटे व मझोले समाचार पत्रों व राज्य मुख्यालय तथा जिला मान्यता प्राप्त पत्रकारों के हितों में लागू कराने के लिये कार्रवई को अंतिम रूप दे सकें।

समाचार पत्रों के लिए व पत्रकारों के हितों के लिए जिसमें राज्य मुख्यालय व जिलों के मान्यता प्राप्त पत्रकार शामिल हैं कुछ अहम महत्वपूर्ण बिन्दु-

1.    देश व प्रदेश के समस्त समाचार पत्रों के स्तर को सुधारने के लिए प्रेस परिषद सभी हिन्दी व अंग्रेजी तथा उर्दू समाचार पत्रों व इलेक्ट्रानिक चैनलों को खबरों के मामले में आचार संहिता से बांध कर उनकी समय-समय पर समीक्षा करे और उन पर अनर्गल खबरों को दिखाने के लिए अंकुश लगाने का काम कड़ाई से करे जिससे समाज में पत्रकारिता का चेहरा साफ सुथरा दिखाई दे और चौथे स्तम्भ की गरिमा इस देश में बरकरार रहे। इसके लिए अगर कुछ अधिकार की आवश्‍यकता हो तो उसे प्रेस परिषद हासिल करे और अपने अधिकार को बढ़ाये।

2.    सभी समाचार पत्रों को बराबरी से उसका हक मिले चाहे वह छोटे समाचार पत्र हो या फिर बड़े। समाचार पत्रों की प्रसार संख्या कुछ भी हो उन पर आ रही आर्थिक दिक्कतों को प्रेस परिषद समझे और उसे दूर कराने के लिए कोई ऐसे ठोस उपाय करे जिससे कोई भी समाचार पत्र इस देश में खास तौर पर यूपी में बंद न हो सके और उनका प्रकाशन नियमित कराया जा सके। इसके लिए कोई ठोस नीति बनाई जाने का काम किया जाए।

3.    मीडिया के छेत्र में लगातार बढ़ रहे बिल्डरों व उधोग नगरी के उद्योगपतियों के हस्तक्षेप पर रोक लगाई जाए और नजर रखी जा सके जिससे समाचार पत्र पूरी तरह से व्‍यवसायिक रूप धारण न कर सके। समाचार पत्र की भूमिका समाज को स्वच्छ बनाने की है न कि फूहड़ व अश्‍लीलता परोसने की। जो पत्र व चैनल अश्‍लीलता प्रकाशित करके समाज के चेहरे को बिगाड़ने का काम करे उन पर तत्काल कार्रवाई हो।

4.    यूपी में छोटे समाचार पत्रों को उनके मानक के अनुसार विज्ञापन नहीं मिल पा रहे है। हर सरकार सिर्फ बड़े समाचार पत्रों को भारी संख्या में विज्ञापन देती चली आ रही है जिससे छोटे समाचार पत्र बन्दी के कगार पर पंहुच गए है। उनके हितों की रक्षा करने के लिए नियमों में दिए गये विज्ञापन नीति का कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चित किया जाए। जिससे छोटे समाचार पत्रों के हितों की रक्षा हो सके और उन्है हर माह कुछ न कुछ सरकारी विज्ञापन मिल सके जिससे समाचार पत्र बंद होने से बचाया जा सके।

5.    यूपी में मान्यता देने की समिति का गठन हो इसके साथ ही विज्ञापन के लिए विज्ञापन समिति का भी गठन शीघ्र हो जिसमें छोटे समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों की भी हिस्सेदारी हो जिससे विज्ञापन व मान्यता दिए जाने के समय उनके संवाददाताओं की अनदेखी न की जा सके। इस महत्वपूर्ण बिन्दु को प्रेस परिषद तत्काल नोटिस में लेकर यूपी के सूचना निदेशक को निर्देश दे कि इसका कड़ाई से पालन इसी समय से किया जा सके।

6.    राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकार हो या फिर लखनऊ जिले के मान्यता प्राप्त पत्रकार उनको एक समान सुविधा जैसे प्रेस कार्ड पर विधान सभा में प्रवेश व सचिवालय में प्रवेश हो वह व्‍यवस्था एक समान लागू कराई जाए जिससे किसी के साथ भेदभाव न किया जा सके।

7.    पीआईबी की नियमावाली को सूचना विभाग कड़ाई से लागू कराये जिससे सभी मानक अपने आप तय हो जायेंगे चाहे मान्यता देने का मामला हो या फिर विज्ञापन देने का मामला हो कोई समस्या नहीं खड़ी होगी। नियम सबके लिए बराबर हो।

8.    यूपी में पत्रकारों के लिए बनी एक समिति कई पत्रकरों के साथ भेदभाव कर रही है। यूपी सरकार उन्हें हर वर्ष एक मोटी रकम पत्रकारों के जीवनबीमा व उनके जीवन की रक्षा के लिए देती है जिसमें कुछ गिने चुने पत्रकार उसका लाभ लगातार उठाते रहते है। इस संगठन ने कुछ मानक ऐसे रखे है जो सभी पत्रकारों के लिए खास तौर पर सभी राज्य मुख्यालय या फिर जिले के मान्यता प्राप्त पत्रकार लाभ नहीं ले पा रहे हैं, जब इस सगंठन को सरकार पैसा दे रही है तो इसे सभी पत्रकारों को इसका लाभ देना चाहिये कुछ मुठ्ठी भर लोगों को लाभ देना न्याय प्रिय नहीं है, इसकी जांच करके इसकों मिलने वाली धनराशि जो सरकार जारी करने जा रही है उस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाकर निर्देशित करें कि इसमें सभी पत्रकारों को तत्काल प्रभाव से जोड़ा जाए अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो इस सगंठन की सभी सरकारी धनराशि रोक दी जाए जिससे सभी पत्रकारों के साथ भेदभाव न हो सके।

9.    यूपी की पिछली सरकारों ने राजधानी में कई पत्रकार पुरम योजनाएं दी थी। पत्रकार पुरम में दी गई योजनाओं के तहत पत्रकारों को प्लाट दिए गये थे जिसका लाभ कुछ हिस्सा सरकारी सब्सिडीडी के तहत एलडीए से दिया गया था। इसकी समीक्षा की जानी चाहिये कि कुछ संगठन के कुछ चिन्हित पत्रकारों को ही इस योजना में लाभ देकर प्लाट आबंटित किए गये है। इन लोगों ने राजधानी में अब तक बने कई पत्रकार पुरम की योजनाओं में एक ही पत्रकार ने कई बार प्लाट हथिया लिए हैं और कई पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है, ऐसे लोगों को चिन्हित करके उन्हें दिए गये प्लाटों की जांच की जाए कि उन लोगों ने उसमें अपने आवास बनाए हैं कि नहीं कहीं उन्हें ऊंचे दामों में बेच तो नहीं दिया है, अगर ऐसा किया गया है तो उन पत्रकारों पर तत्काल कार्रवाई हो।

10.   यूपी में पत्रकारों के साथ लगातार भेदभाव हो रहा है। एक संगठन ने तो यूपी के चाइनागेट पर प्रेस क्‍लब के नाम पर पिछले चालीस सालों से यूपी प्रेस क्‍लब के नाम पर कब्जा कर रखा है। और उस जमीन पर मुर्ग मुसल्‍लम की दुकान खुलवा रखी है। जिससे उसका किराया मिल सके। प्रेस कल्ब पत्रकारों के उठने बैठने व उनके परिवारों के बीच सामंजस स्थापित करने का एक अहम स्थान होता है लेकिन इस क्‍लब का स्वरूप ही बदल गया है। क्योकि एक एक जेबी संगठन के कब्जे में है इसमें सभी पत्रकारों को सदस्यता नहीं दी जा रही है। इस प्रेस क्लब को जेबी प्रेस क्लब बना रखा गया है। इस प्रेस क्लब में वह लोग सदस्य है जो पत्रकारिता से जुड़े ही नहीं है। कोई वकील इसका सदस्य है तो कोई प्रेस करने वाला इसका सदस्य है तो कोई नाई इसका सदस्य है। इसकी तत्काल प्रभाव से जांच होनी चाहिये। और इस प्रेस क्‍लब को सभी सम्मानित पत्रकारों के लिए चाहे वह राज्य मुख्यालय से जुड़े पत्रकार हो या फिर लखनऊ जिले से जुड़े पत्रकार हों, उन्हें तत्काल इसकी सदस्यता दी जाए। मान्यता कार्ड ही इसकी सदस्यता मानी जाए। जेबी संगठन का यूपी प्रेस क्लब न बना रहे क्योंकि यह प्रेस क्लब सरकारी सुविधा भी समय-समय पर सभी पत्रकारों के नाम पर सूचना विभाग से लेता रहता है जो पूरी तरह से नाजायज है। इस लिए प्रेस परिषद के अध्यक्ष काटजू जी को इस पर तत्काल प्रभाव से ध्यान देकर इस प्रेस क्ल्ब को जेबी संगठन से मुक्त कराकर सभी पत्रकारों के लिए यूपी प्रेस क्‍लब का सम्मान दिलाया जा सके। यह एक अहम बिन्दु है। इस पर तमाम पत्रकारों में गुस्सा है। क्योंकि यूपी प्रेस कल्ब सभी पत्रकारों के उठने-बैठने का एक अहम स्थान होता है। इसे एक जेबी संगठन से मुक्त कराया जाए और इस पर सूचना निदेशक के रूप में तत्काल रिसीवर नियुक्त किया जाए और इसकी जांच कराकर इसे सभी पत्रकारों के लिए खोल दिया जाए।

11.   यूपी की राजधानी लखनऊ में राज्य सम्पत्ति विभाग द्वारा दिए गये आवासों पर कई ऐसे पत्रकारों ने पिछले तीस सालों से कब्जा कर रखा है, जो अब पत्रकार नहीं है या फिर पत्रकारिता से रिटायर्ड हो गये हैं। कुछ पत्रकार तो राजधानी से बाहर चले गये हैं। साथ ही शहर में अपने मकान होने के बाद भी सरकारी सुविधा लिए हुए हैं और उन्होंने अपने मकानों को ऊंचे दामों में किराए पर चढ़ाये हुए हैं, ऐसे लोगों को तत्काल चिन्हित कराकर उनसे मकान वापस लिए जाए और उन कलमकारों को मकान दिए जाए जो वास्तव में शहर में रहकर किराए के मकान में कई सालों से रह रहे हैं। और गरीबी रेखा के कारण अपना जीवन यापन सही ढंग से नहीं कर पा रहे है। सरकारी मकानों की समीक्षा की जाए।

12.   उन संगठनों पर कड़ी नजर रखी जाए जो पत्रकारों के नाम पर हर वर्ष सरकार से मदद लेकर अपनी दुकान लगातार चलाए हुए हैं। उन संगठनों को सरकार द्वारा दी गई मदद की पूरी जांच की जाए कि पत्रकारों के नाम पर लिए गये अब तक के पैसों का उन्होंने पत्रकार हित में क्या-क्या किया है।

13.   यूपी राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवादादाता समिति जो एनेक्सी मीडिया सेंटर के लिए जानी जाती है उसकी पत्रकारों के हितों के लिए क्या उपयोगिता है, इस पर भी ध्यान दिया जाए कि क्या यह समिति सही मायनों में पत्रकारों के उत्पीड़न के लिए अब तक काम कर सकी है, उसकी भी उपयोगिता की समीक्षा की जाए और उसमें अगर ऐसा महसूस होता है कि इस समिति की जरूरत है तो उसे और मजबूत किया जाए तथा उसके स्वरूप को बदल कर एक ठोस स्वरूप में इस समिति को खड़ा किया जाए।

14.   यूपी के सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों के जीवन की रक्षा के लिए जो अपने काम को करते-करते आर्थिक स्थित से जूझते हुए स्वर्ग पधार जाते है या फिर पूरे जीवन भर कुछ पैसों के लिए आर्थिक तंगी महसूस करते हुए टूट जाते हैं, उनके लिए राज्य सरकार कुछ ठोस मदद देने के लिए कुछ धनराशि समय-समय पर जरूरत के मुताबिक चाहे वह लोन के रूप में ही क्यों न हो उसकी व्‍यवस्था सरकार के माध्यम से कराने का प्रस्ताव बनवाएं और सभी उन पत्रकारों की स्थिति का अध्ययन करायें, जो वाकई में अपने मालिक के उत्पीड़न का शिकार होकर कम वेतन पर कार्य कर रहे हैं, उनके जीवन को मजबूत करने के लिए कोई ठोस पहल प्रेस परिषद राज्य सरकार से कराने का प्रस्ताव पेश करे जो एक अहम कार्य होगा।

15.   प्रेस मान्यता कार्ड की महत्व को सभी पत्रकारों के लिए एक समान रखा जाए एनेक्सी स्थित पंचम तल हो या फिर विधानसभा की कवरेज हो, उनको एक समान व्‍यवस्था में लागू कराया जाए, जिससे किसी भी मीडिया कर्मी को कवरेज करने के लिए कोई परेशानी न हो और पिक एण्ड चूज के आधार पर कोई एकतरफा फैसला न लिए जाए। इस व्‍यवस्था को कड़ाई से पालन करने के लिए सूचना निदेशक को कहा जाए।

अंत में मैं सभी समाचार पत्र व पत्रकारों के लिए एक महत्वपूर्ण बिन्दु यह रख रहा हूं कि सभी समाचार पत्रों को सरकार द्वारा समय-समय पर दिए जा रहे विज्ञापन को उनके मानक के आधार पर दिए जायें और कोई भेद भाव, चाहे वह प्रदेश स्तर के विभाग से हो या फिर डीएवीपी स्तर पर हो उस पर प्रेस परिषद नजर रखे और समाचार पत्रों को मजबूत करने के लिए उन पर दवाब बनाते हुए नीति के आधार पर विज्ञापन उपलब्ध कराने की कृपा करे। साथ ही मीडिया के चेहरे को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए ऊपर दिए गये बिन्दुओं पर तत्काल ध्यान देते हुए ऐसे स्पष्ट निर्देश सूचना निदेशक व प्रदेश के मुख्यमंत्री को देने की कृपा करे जिससे सभी समस्याओं का निराकरण हो सके और प्रदेश के तमाम पत्रकार व समाचार पत्र निष्‍पक्ष रूप से अपने हक को पा सकें, जिससे उन्हें महसूस हो कि उनके लिए स्थापित प्रेस परिषद कुछ ठोस उपाय कर सका है। क्योंकि प्रेस परिषद पत्रकारों व समाचार पत्रों के हितों के लिए एक मंदिर है। जिसमें बैठे अध्यक्ष का कर्तव्‍य है कि वह तमाम पत्रकारों के हितों की रक्षा कर सके। मेरे इन सुझावों को संज्ञान में लेकर ठोस कार्रवाई करने की कृपा करे। आपकी अति कृपा होगी।

प्रतिलिपि सूचनार्थ:-

1.    माननीय मुख्यमंत्री अखिलेश जी
उत्तर प्रदेश, लखनऊ

2.    श्री बादल चटर्जी,
सूचना निदेशक
उत्तर प्रदेश, लखनऊ

भवदीय,

प्रभात कुमार त्रिपाठी
ब्‍यूरो प्रमुख
दैनिक समाजवाद उदय

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